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Meerut Dalit Woman Murder: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना थाना क्षेत्र स्थित कपसाड़ (Kapsad) गांव में गुरुवार सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। खेत जा रही दलित महिला की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई, जबकि उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण (abduction) कर लिया गया। घटना के बाद से पूरे गांव में तनाव का माहौल है और प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
घटना कैसे और कब हुई
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गुरुवार सुबह करीब 8 बजे सुनीता नाम की दलित महिला अपनी बेटी रूबी के साथ गांव के पास स्थित राजबाहा (canal) की ओर खेत जा रही थी। इसी दौरान गांव का ही युवक पारस सोम अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा। आरोप है कि पारस ने युवती को जबरन अपने साथ ले जाने की कोशिश की। जब मां सुनीता ने इसका विरोध किया तो पारस ने धारदार हथियार से उस पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल सुनीता को परिजन इलाज के लिए मोदीपुरम स्थित एसडीएस अस्पताल ले गए, जहां शाम करीब पांच बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
पहचान और पुराना विवाद
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पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी पारस सोम और युवती रूबी एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद भी हो चुका था और गांव में पंचायत तक बैठी थी। सीओ सरधना आशुतोष कुमार और एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने भी बताया कि युवक और युवती के बीच पहले से जान-पहचान थी। रूबी इंटर तक पढ़ी हुई है और अप्रैल महीने में उसकी शादी तय थी। वहीं आरोपी पारस गांव में ही एक डॉक्टर के पास कंपाउंडर का काम करता था।
अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़
महिला की मौत की खबर मिलते ही एसडीएस अस्पताल में मौजूद परिजन, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस में तोड़फोड़ की और चालक दीपक को खींचकर पीट दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि अस्पताल को पुलिस छावनी में तब्दील करना पड़ा। बीच-बचाव करने पहुंचे अस्पताल मैनेजर मनोज गोयल के हाथ में कांच लगने से गंभीर चोट भी आई।
पोस्टमार्टम को लेकर विरोध
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परिजनों और ग्रामीणों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया और मांग रखी कि जब तक अपहृत बेटी की सुरक्षित बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती, अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। घंटों चले हंगामे और भीम आर्मी के विरोध के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन पर परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार हुए।
राजनीतिक बयान और बढ़ता दबाव
इस घटना ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया (social media) पर सरकार को घेरा, जबकि बसपा प्रमुख मायावती ने घटना को बेहद दुखद और शर्मनाक बताया। सरधना विधायक अतुल प्रधान ने आरोपियों पर रासुका (NSA) लगाने, 50 लाख रुपये मुआवजा और मृतका के बेटे को सरकारी नौकरी देने की मांग की।
चंद्रशेखर आजाद के आने की संभावना
आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना विधायक चंद्रशेखर आजाद के कपसाड़ गांव पहुंचने की संभावना जताई गई है। उन्होंने एक्स प्लेटफॉर्म (X platform) पर लिखा कि यह घटना सिर्फ अपराध नहीं बल्कि जातिगत हिंसा और महिलाओं की असुरक्षा का भयावह उदाहरण है।
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गांव सील, विधायक को रोका गया
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घटना के बाद गांव के सभी रास्ते सील कर दिए गए हैं और भारी पुलिस बल तथा पीएसी तैनात है। जब सपा विधायक अतुल प्रधान गांव पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें बाहर ही रोक दिया, जिससे धक्का-मुक्की और हंगामा हुआ। विधायक धरने पर बैठ गए और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
पुलिस की कार्रवाई और तलाश
एसएसपी विपिन ताडा ने बताया कि मुख्य आरोपी पारस सोम और उसके साथियों की गिरफ्तारी के लिए एसपी ग्रामीण के नेतृत्व में पांच टीमें गठित की गई हैं। पुलिस की सर्विलांस टीम लगातार आरोपियों और अपहृत युवती को ट्रेस करने में जुटी है। आरोपी के घरों पर दबिश दी गई, लेकिन वहां ताले लगे मिले।
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परिवार की स्थिति और मांग
सुनीता के पति सतेंद्र मजदूरी करते हैं। उनके चार बच्चे हैं, जिनमें नरसी, मनदीप, शिवम और सबसे छोटी बेटी रूबी है। परिवार का कहना है कि जब तक रूबी सुरक्षित नहीं मिलती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। गांव में हालात संवेदनशील बने हुए हैं और प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। \
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