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Ambernath BJP Congress Alliance: महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में बुधवार को बड़ा राजनीतिक खेल देखने के मिला। जहां अंबरनाथ और अकोट नगर परिषद चुनावों के बाद बने अप्रत्याशित गठबंधनों ने सत्ता संतुलन पूरी तरह बदल दिया। अंबरनाथ नगर परिषद से कांग्रेस के सभी 12 नवनिर्वाचित पार्षद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। अचानक बदले समीकरणों से कांग्रेस, शिवसेना और अन्य दलों को बड़ा झटका मिला है। Ambernath Nagar Parishad news
अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता का गणित बदला
ठाणे जिले में स्तिथ अंबरनाथ नगर परिषद (Maharashtra municipal elections), जहां पिछले करीब 25 सालों से शिवसेना का दबदबा रहा है। इस बार हुए 60 सदस्यीय नगर परिषद चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से चार सीट दूर रह गई। भाजपा को 14, कांग्रेस को 12 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) को 4 सीटें मिली थीं।
भाजपा ने चली बड़ी चाल
चुनाव के बाद भाजपा ने शिवसेना को दरकिनार करते हुए कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ (Ambernath Vikas Aghadi – AVA) का गठन किया। एक निर्दलीय पार्षद के समर्थन से इस गठबंधन की संख्या 32 तक पहुंच गई, जो बहुमत के आंकड़े 30 से ज्यादा है। इस कदम से स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई और कांग्रेस नेतृत्व ने भाजपा से हाथ मिलाने वाले अपने 12 पार्षदों को तत्काल निलंबित कर दिया। Akot Nagar Parishad update
कांग्रेस को ठेंगा भाजपा का दामन थामा
कांग्रेस से निलंबित हुए सभी 12 पार्षदों ने आखिरकार भाजपा का दामन थाम लिया है। इस बात की पुष्टि बुधवार देर रात भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने औपचारिक घोषणा की। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि इन पार्षदों ने विकास को प्राथमिकता देते हुए मौजूदा सरकार की कार्यशैली से प्रभावित होकर यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम से भाजपा की स्थानीय पकड़ और मजबूत हो गई, जबकि शिवसेना के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है।
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अकोट नगर परिषद में भी बदले समीकरण
अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में भी कुछ ऐसा ही राजनीतिक समीकरण देखने को मिला। यहां भाजपा ने ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM), शिवसेना और एनसीपी के दोनों गुटों के साथ मिलकर गठबंधन बनाया। 35 सदस्यीय नगर परिषद में इस गठबंधन के पास कुल 25 पार्षद हो गए, जिससे भाजपा समर्थित माया धुले को नगर परिषद अध्यक्ष बनाया गया।
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राज्य नेतृत्व की नाराजगी
इन अप्रत्याशित गठबंधनों से राज्य स्तर पर भी सियासी हलचल बढ़ गई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थानीय इकाइयों द्वारा राज्य नेतृत्व को भरोसे में लिए बिना किए गए गठबंधनों पर नाराजगी जताई और गठबंधन तोड़ने के निर्देश दिए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर बने सत्ता समीकरणों ने यह साफ कर दिया कि नगर निकाय राजनीति में दलों के बीच वैचारिक सीमाएं फिलहाल पीछे छूटती नजर आ रही हैं।
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