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Kanpur Family Bhangra Baord Exam Centre: बोर्ड परीक्षाओं के इस दौर में जहां ज्यादातर छात्र-छात्राएं अंकों के बोझ तले दबे रहते हैं और तनाव से जूझते हैं, वहीं कानपुर के अशोक नगर के एक परिवार ने अपनी बेटी के लिए एक अनोखा और दिल छू लेने वाला तरीका अपनाया है। निर्माण सिंह और उनके परिवार ने परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए स्कूल के बाहर ढोल-नगाड़ों के साथ भांगड़ा करके बेटी का उत्साहवर्धन किया।
बोर्ड परीक्षा देकर आई बेटी को किया सरप्राइज
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कानपुर के अशोक नगर निवासी निर्माण सिंह की बेटी श्रोत कौर फातिमा कांवेंट स्कूल में कक्षा 10वीं की छात्रा हैं। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के दौरान श्रोत काफी नर्वस थीं। वे परीक्षा के परिणामों को लेकर चिंतित रहती थीं, लेकिन परिवार ने कभी भी उन पर अंकों के लिए दबाव नहीं बनाया। इसके बजाय, उन्होंने परीक्षा समाप्त होने पर बेटी को सरप्राइज देने की योजना बनाई। जैसे ही श्रोत का आखिरी पेपर खत्म हुआ और वे परीक्षा केंद्र से बाहर निकलीं, तो परिवार पूरा जोश के साथ तैयार खड़ा था। पिता निर्माण सिंह, मां परमीत कौर, फूफा अमन रंधावा, बुआ और अन्य परिजन ढोल, माला और उत्साह लेकर मौजूद थे।
फूलों की पहनाई माला किया जोरदार स्वागत
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जैसे ही श्रोत बाहर आईं, ढोल की थाप शुरू हो गई। परिवार ने जोर-शोर से भांगड़ा किया, श्रोत को फूलों की माला पहनाई और उनका जोरदार स्वागत किया। यह देखकर श्रोत पहले तो हैरान रह गईं, लेकिन फिर उनकी चेहरे पर मुस्कान फैल गई। अन्य छात्राओं और अभिभावकों ने भी यह नजारा देखा और तालियां बजाईं। पूरा माहौल खुशी और उत्साह से भर गया। श्रोत ने बाद में बताया, "मैं परीक्षा को लेकर बहुत नर्वस थी, लेकिन परिवार का यह प्यार और मोटिवेशन देखकर सारी टेंशन पल भर में दूर हो गई। अब मैं पूरी तरह टेंशन फ्री हूं और मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ गया है।"
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बेटी को खुश रखना मुख्य उद्देश्य
निर्माण सिंह ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य बेटी को खुश करना था। उन्होंने कहा, "हम चाहते थे कि परीक्षा के बाद बच्ची तनाव मुक्त होकर खुशी महसूस करे। हमने कभी अंकों पर फोकस नहीं किया, बल्कि उसकी मेहनत और प्रयास की सराहना की। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को नंबर की दौड़ से दूर रखें और उनकी भावनाओं का ख्याल रखें।" फूफा अमन रंधावा ने भी कहा, "परीक्षाएं तो आती-जाती रहती हैं, लेकिन जिंदगी एक ही बार मिलती है। हमें बच्चों को खुलकर जीने का मौका देना चाहिए, ताकि वे कभी तनाव में न रहें। हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं, उन्हें हमेशा सपोर्ट करना चाहिए।"
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समाज में सकारात्मक उदाहरण
यह अनोखी पहल सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों में काफी चर्चा का विषय बनी। कई अभिभावकों ने इसे एक सकारात्मक उदाहरण बताया और कहा कि ऐसे तरीके अपनाने से बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। आज के समय में जहां परीक्षा के दबाव से छात्र-छात्राएं डिप्रेशन और तनाव का शिकार हो रहे हैं, वहीं निर्माण सिंह जैसे परिवार खुशी और प्यार से तनाव को दूर करने का संदेश दे रहे हैं
यह घटना न केवल परिवार की रचनात्मकता को दर्शाती है, बल्कि अभिभावकों के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी देती है कि बच्चों पर अंकों का दबाव न डालें, बल्कि उनकी मानसिक सेहत और खुशी को प्राथमिकता दें।
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