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New Tax Regime Zero Tax: नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में अब मिडिल क्लास सैलरीड लोगों के लिए बड़ी राहत की संभावना है। अगर सालाना सैलरी 14 से 15 लाख रुपये के बीच है, तो सही प्लानिंग के जरिए पूरा टैक्स बचाया जा सकता है और टैक्स देनदारी शून्य तक लाई जा सकती है।
टैक्स फ्री आय की सीमा कैसे बढ़ी
नई कर व्यवस्था के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होता है। इसके अलावा सरकार की ओर से 75 हजार रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) भी मिलती है, जिससे टैक्स फ्री आय की सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। आम तौर पर इससे ज्यादा कमाई पर टैक्स बनता है, लेकिन कुछ कानूनी छूट (Tax Exemption) का सही इस्तेमाल करके इस सीमा को और बढ़ाया जा सकता है।
EPF से कैसे बचेगा टैक्स
नई टैक्स व्यवस्था में कर्मचारी की EPF (Employees’ Provident Fund) में खुद की जमा राशि पर टैक्स छूट नहीं मिलती, लेकिन नियोक्ता यानी एम्प्लॉयर की ओर से EPF में किया गया योगदान टैक्स फ्री होता है। यह छूट बेसिक सैलरी और डीए (Dearness Allowance) के 12 प्रतिशत तक मिलती है। इसी छूट के जरिए टैक्सेबल इनकम को कम किया जा सकता है। अगर किसी व्यक्ति की सैलरी स्ट्रक्चर में बेसिक पे कुल सैलरी का लगभग 50 प्रतिशत है, तो EPF के जरिए अच्छी-खासी रकम टैक्स से बाहर हो जाती है।
NPS से टैक्स बचाने का दूसरा तरीका
नई टैक्स व्यवस्था में NPS (National Pension System) का सबसे बड़ा फायदा नियोक्ता के योगदान पर मिलता है। एम्प्लॉयर अगर कर्मचारी के NPS खाते में बेसिक सैलरी और डीए के 14 प्रतिशत तक योगदान करता है, तो यह राशि पूरी तरह टैक्स फ्री रहती है। इससे टैक्सेबल इनकम में बड़ी कटौती होती है और 14.5 लाख तक की सैलरी भी टैक्स फ्री बनाई जा सकती है।
EPF और NPS दोनों का फायदा
अगर किसी कर्मचारी को अपने एम्प्लॉयर से EPF और NPS दोनों का लाभ मिलता है, तो 14 से 15 लाख रुपये तक की सालाना सैलरी होने के बावजूद उसकी टैक्सेबल इनकम घटकर 12 लाख रुपये तक आ सकती है। स्टैंडर्ड डिडक्शन और इन दोनों स्कीम्स के एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन को जोड़ने पर इनकम पूरी तरह टैक्स फ्री हो जाती है।
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सिर्फ EPF होने पर भी कैसे बचेगा टैक्स
अगर किसी कंपनी में NPS की सुविधा नहीं है, लेकिन EPF लागू है, तब भी कर्मचारी 13.5 लाख रुपये तक की सैलरी को टैक्स फ्री बना सकता है। इसमें EPF के एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन और स्टैंडर्ड डिडक्शन की बड़ी भूमिका रहती है। सही सैलरी स्ट्रक्चर और CTC प्लानिंग से टैक्स देनदारी लगभग खत्म हो सकती है।
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सही प्लानिंग से बचा सकते हैं टैक्स
नई कर व्यवस्था में टैक्स बचाने के लिए सैलरी स्ट्रक्चर सबसे अहम हो गया है। बेसिक सैलरी, अलाउंसेस (Allowances) और रिटायरमेंट बेनिफिट्स का सही बैलेंस बनाकर टैक्स बचाया जा सकता है। EPF और NPS को केवल टैक्स बचाने के साधन ही नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) का हिस्सा भी माना जा रहा है।
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EPF और NPS से भविष्य भी सुरक्षित
EPF और NPS में नियमित निवेश से टैक्स बचाने के साथ-साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड भी तैयार हो सकता है। लंबी अवधि में कंपाउंडिंग (Compounding) का फायदा मिलने से करोड़ों रुपये का कॉर्पस बन सकता है, जिससे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मजबूत होती है।
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