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EPFO: केंद्र बजट 2026 के आने बाद केंद्र सरकार ने चार नई श्रम संहिताएं (Four Labour Codes) (Four Labour Codes India)को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। केंद्र सरकार की तरफ से एक समान न्यूनतम वेज (सैलरी) वाला श्रम संहिताएं (Four Labour Codes) फरवरी से लागू कर दिया गया है। सरकार ने कहा है कि ये व्यवस्था तब पूरी तरह से लागू होंगी जब राज्य सरकारे इस पर नए नियम बनाएंगी। केंद्र सरकार ने उम्मीद जताई है कि 1 अप्रैल तक सभी राज्य नियन लागू कर देंगे।
Labour Reforms for Aatmanirbhar Bharat Ensuring Fair Wages, Strengthening India’s Workforce. With the Government bringing the Four Labour Codes into effect, minimum wage protection has been expanded to every worker. #श्रमेवजयते#ShramevJayate@narendramodi@mansukhmandviya… pic.twitter.com/DkCXghbCU0
— EPFO (@officialepfo) February 2, 2026
पुराने कानूनों की जगह नई व्यवस्था
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इन श्रम सुधारों में 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार नई श्रम संहिताएं बनाई गई है। इससे नियमों को आसान, साफ और ज्यादा प्रभावी बनाया गया है। पहले न्यूनतम वेतन सिर्फ कुछ तय उद्योगो तक ही सीमित था, जिससे असंगठित क्षेत्र में कई मजदूर इससे वंचित रह जाते थे। EPFO labour Reforms
अब हर वर्कर को मिलेगा न्यूनतम वेतन
नया वेज कोड (Code on Wages, 2019) के लागू होने के बाद अब देश के हर वर्कर को न्यूनतम वेतन का कानूनी अधिकार मिल गया है। है। संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों को इसका लाभ मिलेगा। सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी कदम मान रही है।
फ्लोर वेज से कम होगी मजदूरी की असमानता
नई व्यवस्था में फ्लोर वेज (Floor Wage) की व्यवस्था की गई है। जिसका मतलब है कि मजदूरी का एक समान न्यूनतम वेतन स्तर तय होगा, ताकि अलग-अलग राज्यों में वेतन का फर्क कम हो सके। यह वेतन जीवन-यापन की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा।
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राज्यों के नियमों का इंतजार
फरवरी 2026 तक ये श्रम संहिताएं देशभर में लागू तो हो चुकी हैं, लेकिन पूरी तरह से लागू तब होंगी जब राज्य सरकारें अपने नियम बनाएंगी। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि 1 अप्रैल तक सभी राज्य नियम लागू कर देंगे।
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ईपीएफओ सेवाओं पर सवाल
जहां एक तरफ सरकार श्रमिकों के लिए बड़े सुधार बात कर रही है, वहीं कई लोग ईपीएफओ की सेवाओं में देरी की शितायत भी कर रहे हैं। पीएफ क्लेम, पेंशन और दूसरी सेवाओं में समय लगने को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिससे इन सुधारों के सही तरीके से लागू होने पर भी नजर रखी जा रही है।
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