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Gwalior Jiwaji University Assistant Professor Bharti Vivad: ग्वालियर का जीवाजी विश्वविद्यालय (Jiwaji University Gwalior) एक बार फिर अपने प्रशासनिक फैसलों के कारण चर्चा में है। विश्वविद्यालय ने हाल ही में असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया है, लेकिन इसमें एक ऐसी विसंगति सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। विवि प्रशासन ने उस 'इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग' के लिए दो प्रोफेसरों की भर्ती निकाली है, जहाँ पिछले चार सालों से ताला लटका हुआ है और कोई भी कोर्स संचालित नहीं हो रहा है।
विश्वविद्यालय में बंद विभाग में भर्ती
जीवाजी विश्वविद्यालय द्वारा 14 अलग-अलग विषयों के लिए 40 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस भर्ती विज्ञापन में इलेक्ट्रॉनिक्स विषय के लिए भी दो पदों (एक सामान्य और एक एसटी वर्ग) का प्रावधान किया गया है। लेकिन जैसे ही यह विज्ञापन सार्वजनिक हुआ, विवि के गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं कि आखिर ये प्रोफेसर किसे पढ़ाएंगे?
4 साल पहले बंद हो चुका है कोर्स
जानकारी के अनुसार, बाजार में बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स की बढ़ती मांग और एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रति छात्रों के गिरते रुझान को देखते हुए विश्वविद्यालय ने करीब चार साल पहले ही एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स को बंद कर दिया था। पहले यहाँ 20 सीटें हुआ करती थीं, लेकिन लंबे समय तक छात्रों के प्रवेश न लेने के कारण विवि ने इसे आधिकारिक तौर पर बंद करने का फैसला लिया था।
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कोर्स नहीं, क्लास नहीं, पढ़ाएंगे किसे?
फिजिक्स विभाग के एचओडी प्रो. डीसी गुप्ता के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग चार साल पहले ही बंद हो चुका है। अब सवाल यह उठता है कि जब विभाग अस्तित्व में ही नहीं है, तो वहां प्रोफेसरों की नियुक्ति करने का क्या औचित्य है? विवि प्रशासन ने भर्ती निकालने से पहले यह भी चेक नहीं किया कि संबंधित विभाग में छात्र संख्या या कोर्स की स्थिति क्या है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय को नई भर्ती करनी ही थी, तो इन पदों को उन विभागों में डायवर्ट किया जाना चाहिए था जहाँ शिक्षकों की भारी कमी है और छात्र संख्या अधिक है। इस विसंगति ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। (jiwaji university gwalior news)
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