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लाड़ली बहना योजना पर बड़ा अपडेट: राशि बढ़ाने, नए रजिस्ट्रेशन और उम्र घटाने पर हुआ ये निर्णय, इंदौर HC ने MP सरकार पर क्यों छोड़ा फैसला ?

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने लाड़ली बहना योजना की एक याचिका पर सुनवाई की है, जिसमें कोर्ट ने इस योजना से संबंधित सभी निर्णय प्रदेश सरकार पर छोड़ दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की उन बहनों को बड़ा झटका लगा है, जो इस योजना के लाभ से अब तक वंचित हैं।

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sanjay warude
Ladli Bahna Yojana

Ladli Bahna Yojana Indore High Court: मध्यप्रदेश सरकार के लिए गेम चेंजर बनी लाड़ली बहना योजना में एक बड़ा अपडेट सामने आया है।

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हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने लाड़ली बहना योजना की एक याचिका पर सुनवाई की है, जिसमें कोर्ट ने इस योजना से संबंधित सभी निर्णय प्रदेश सरकार पर छोड़ दिए हैं। कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की उन बहनों को बड़ा झटका लगा है, जो इस योजना के लाभ से अब तक वंचित हैं।

पूर्व MLA ने हाईकोर्ट में लगाई थी जनहित याचिका

दरअसल, रतलाम से निर्दलय पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई थी, जिसमें उन्होंने लाड़ली बहना योजना से वंचित रह गईं महिलाओं के लिए नए रजिस्ट्रेशन कराने, हितग्राहियों की उम्र सीमा घटाने और हर महीने राशि 3 हजार रुपए तक बढ़ाने की मांग की।

सरकार बजट अनुसार शर्तें तय करने के लिए स्वतंत्र

इस मामले पर मध्यप्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता संदीप भार्गव ने दलील दी कि यह एक कार्यकारी योजना और सरकार अपने संसाधनों सहित बजट के अनुसार शर्तें तय करने के लिए स्वतंत्र है। इसमें किसी भी प्रकार का शत्रुतापूर्ण भेदभाव जैसी कोई मंशा नहीं है।

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पूरी तरह असंवैधानिक न हो, तब तक दखल ठीक नहीं

जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और ​जस्टिस आलोक की अदालत ने कहा कि अदालत सरकार की किसी नीति की वैधता की जांच कर सकता है, लेकिन उसकी बुद्धिमत्ता या वित्तीय निर्णयों में दखल नहीं दे सकता, जब तक वह पूरी तरह असंवैधानिक न हो। 

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योजना शुरू, बंद करने का अधिकार सरकार के पास

कोर्ट ने आगे टिप्पणी करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी जनहितकारी योजना कब शुरू करनी है, कब बंद करनी है और उसमें कितनी राशि देनी है, यह पूरी तरह से राज्य सरकार का निर्णय है।

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सरकार ने पोर्टल बंद कर रखा, ये संविधान का उल्लंघन

याचिकाकर्ता पूर्व विधायक पारस सकलेचा द्वारा दायर जनहित याचिका में तर्क दिया गया कि जो महिलाएं अगस्त 2023 के बाद 21 वर्ष की उम्र पूरी कर चुकी हैं, उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। क्योंकि सरकार ने उसके बाद से पोर्टल बंद रखाा है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

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न्यूनतम उम्र 18 और अधिकतम लाइट टाइम हो सीमा

जनहित याचिका में ये भी मांग की गई थी कि योजना का लाभ पाने वाले हितग्राहियों की न्यूनतम उम्र सीमा 18 वर्ष की जाना चाहिए और अधिकतम उम्र सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर लाइट टाइम की जाना चाहिए। ताकि बहनें अपने आखिरी समय तक इसका लाभ उठा सके।

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वर्तमान हर महीने बहनों को मिल रहे 1500 रुपए

याचिकाकर्ता पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने याचिका में मांग थी कि प्रदेश सरकार ने बहनों की किस्त हर माह 3 हजार रुपए करने की बात कही थी, जिसे जल्द से जल्द बढ़ा दिया जाए। वर्तमान में बहनों को 1500 रुपए हर महीने दिए जा रहे हैं। इससे पहले 1250 और उससे पहले 1000 रुपए थी।

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