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SC on Delhi Riots Case: दिल्ली दंगों से जुड़े यूएपीए मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपियों की भूमिका अलग-अलग आधार पर जांची जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका क्यों ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम (Sharjeel imam bail rejected) की बेल पर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए उनकी याचिका खारिज (Supreme Court bail verdict) कर दी। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि आपराधिक जिम्मेदारी और बेल पर विचार अलग-अलग मुद्दे हैं, इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि दिल्ली दंगों जैसे गंभीर मामले में हर आरोपी की भूमिका को अलग दृष्टिकोण से जांचना आवश्यक है। Umar Khalid bail rejected
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC पहुंचे
दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2022 में दंगे (Delhi riots UAPA case) की कथित साजिश से जुड़े यूएपीए मामले में उमर खालिद और अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सभी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर को दिल्ली पुलिस और आरोपियों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया।
सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ
मामले की सुनवाई (Supreme Court Delhi riots ruling) के दौरान केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी एसवी राजू ने अदालत को बताया कि दंगे की साजिश बेहद संगठित तरीके से की गई थी। वहीं आरोपियों की ओर से कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, सिद्धार्थ दवे, सलमान खुर्शीद और सिद्धार्थ लूथरा ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि आरोपियों को बिना पर्याप्त सबूतों के जेल में रखा गया है। सभी दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित किया था, जिसे अब सुनाया गया है। Supreme Court Delhi riots ruling
यूएपीए केस में क्या हैं आरोप
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर आरोप है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की बड़ी साजिश में इनकी भूमिका थी। इनके खिलाफ यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता के कई प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के बीच जिस तरह से हिंसा भड़की, उसके पीछे एक सुनियोजित रणनीति थी।
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दंगों 53 लोगों ने गवाई थी जान
फरवरी 2020 के दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। कई इलाकों में बड़े पैमाने पर संपत्ति को नुकसान हुआ था। नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों के बीच अचानक हिंसा भड़क उठी थी, जिसे जांच एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश बताया था।
अन्य आरोपियों 12 शर्तों पर मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बताया कि अन्य आरोपियों (गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, मोहम्मद समीर खान, शादाब अहमद और शिफाउर रहमान) को जमानत मिल जाने से उन पर लगे आरोपों में कोई नर्मी नहीं दी जा सकती है। फिलहाल अन्य आरोपियों को क12 शर्तों के अधीन जमानत पर रिहा किया जा रहा है। यदि शर्तों का उल्लंघन होता है, तो ट्रायल कोर्ट आरोपियों की सुनवाई के बाद जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगा।
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