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Historic Amendments of Indian Constitution: स्वतंत्रता के बाद भारतीय संविधान में हुए 10 ऐतिहासिक संशोधनों ने देश की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। आजादी के बाद किए गए अहम संशोधनों ने देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक दिशा को नई पहचान दी और व्यवस्था की नींव को मजबूत किया।
1st Amendment (1951)
स्वतंत्र भारत में संविधान का पहला बड़ा बदलाव वर्ष 1951 में हुआ। प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम का मकसद सामाजिक और आर्थिक सुधारों को कानूनी सुरक्षा देना था। इसके तहत भूमि सुधार कानूनों को नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) में डाला गया, ताकि अदालतें इन्हें रद्द न कर सकें। इसी संशोधन के जरिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाए गए, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस कदम ने जमींदारी प्रथा के उन्मूलन को मजबूती दी।
42nd Amendment (1976)
1976 में लागू हुआ बयालीसवां संविधान संशोधन भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित संशोधनों में गिना जाता है। इसे मिनी संविधान कहा गया क्योंकि इसने संविधान के कई हिस्सों को प्रभावित किया। प्रस्तावना में समाजवादी (Socialist), पंथनिरपेक्ष (Secular) और अखंडता (Integrity) शब्द जोड़े गए। नागरिकों के लिए मूल कर्तव्यों (Fundamental Duties) की शुरुआत भी इसी संशोधन से हुई। इस दौरान केंद्र सरकार को अधिक शक्तियां दी गईं, जिससे संघीय ढांचे पर भी असर पड़ा।
44th Amendment (1978)
1978 में लाया गया चवालीसवां संविधान संशोधन आपातकाल के अनुभवों का नतीजा था। इसमें आपातकाल लगाने की शर्तों को सख्त किया गया और “आंतरिक अशांति” की जगह “सशस्त्र विद्रोह” शब्द जोड़ा गया। संपत्ति का अधिकार (Right to Property) मौलिक अधिकार की सूची से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया गया। साथ ही न्यायपालिका की भूमिका को फिर से मजबूत किया गया।
52nd Amendment (1985)
1985 का बावनवां संविधान संशोधन दलबदल की बढ़ती प्रवृत्ति को रोकने के लिए लाया गया। इसके जरिए दसवीं अनुसूची (Tenth Schedule) जोड़ी गई और Anti-Defection Law लागू हुआ। इससे विधायकों के बार-बार पार्टी बदलने पर अंकुश लगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में अनुशासन आया।
61st Amendment (1989)
1989 में हुए इकसठवें संशोधन ने मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 साल कर दी। इससे देश के करोड़ों युवा मतदाता बने और लोकतंत्र में उनकी भागीदारी बढ़ी। इस बदलाव ने राजनीतिक जागरूकता को नई दिशा दी।
73rd & 74th Amendments (1992)
1992 में लागू तिहत्तरवें और चौहत्तरवें संशोधनों ने पंचायती राज और शहरी निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया। गांवों में पंचायतें और शहरों में नगरपालिकाएं सशक्त हुईं। इससे Decentralization को बढ़ावा मिला और स्थानीय विकास में जनता की भूमिका बढ़ी।
86th Amendment (2002)
2002 में छियासीवें संशोधन के जरिए अनुच्छेद 21A जोड़ा गया। इसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए शिक्षा को मौलिक अधिकार घोषित किया गया। इस कदम ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा साधन बना दिया।
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103rd Amendment (2019)
2019 में आए 103वें संविधान संशोधन ने Economically Weaker Sections (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया। यह आरक्षण उन वर्गों के लिए था जो सामाजिक आरक्षण के दायरे में नहीं आते थे, जिससे सामाजिक न्याय की बहस को नया आयाम मिला।
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106th Amendment (2023)
2023 का 106वां संविधान संशोधन ऐतिहासिक माना गया। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और Gender Equality को मजबूत करने की दिशा तय हुई।
One Hundred and First Constitutional Amendment Act, 2016
2016 में लागू हुआ 101वां संविधान संशोधन देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हुआ। इसके जरिए Goods and Services Tax (GST) लागू किया गया, जिसने कई अप्रत्यक्ष करों की जगह एक समान टैक्स सिस्टम लागू किया। इससे देश की टैक्स संरचना सरल हुई और आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव आया।
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