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संसद के आंकड़ों से खुली धीमी रफ्तार: ड्रोन अपनाने में छत्तीसगढ़ पिछड़ा, सिर्फ 161 रजिस्ट्रेशन, संसद के आंकड़ों ने खोली तकनीकी सुस्ती की पोल

CG Drone Adoption: संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 31 जनवरी 2026 तक सिर्फ 161 ड्रोन पंजीकृत हैं। ड्रोन नियम आसान होने और ग्रीन जोन सुविधा के बावजूद राज्य में तकनीक अपनाने की रफ्तार धीमी है, जबकि सुरक्षा, कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्रों में इसकी बड़ी जरूरत है।

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Shantanu Singh
CG Drone Adoption

CG Drone Adoption: संसद में प्रस्तुत आंकड़ों ने छत्तीसगढ़ में ड्रोन तकनीक के धीमे उपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ में केवल 161 ड्रोन पंजीकृत हैं।

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देश में ड्रोन नियमों को उदार बनाने और तकनीक को बढ़ावा देने के बावजूद राज्य में इसका सीमित उपयोग चिंता का विषय बन गया है।

ड्रोन नियमों में ढील, उपयोग बढ़ाने की कोशिश

केंद्र सरकार ने ड्रोन संचालन को आसान बनाने के लिए Drone Rules 2021 लागू किए हैं, ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में विकास कार्यों में ड्रोन का उपयोग बढ़ सके। नियमों में संशोधन कर अनुपालन प्रक्रिया सरल की गई है।

रिमोट पायलट प्रमाणपत्र के लिए पासपोर्ट अनिवार्यता हटाई गई और पंजीकरण तथा ट्रांसफर नियमों को आसान बनाया गया है, जिससे अधिक लोग और संस्थाएं ड्रोन उपयोग के लिए आगे आ सकें।

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90 प्रतिशत एयरस्पेस ग्रीन जोन घोषित

सरकार ने देश के लगभग 90 प्रतिशत हवाई क्षेत्र को “ग्रीन जोन” घोषित किया है, जहां ड्रोन उड़ाने के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती।

2022 में मानव रहित विमान प्रणाली प्रमाणन योजना लागू की गई, जिससे वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रमाणन ढांचा तैयार हुआ। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर, वैध रिमोट पायलट प्रमाणपत्र और DGCA मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थानों की अनिवार्यता लागू है।

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देश में बढ़ा ड्रोन उपयोग, राज्य पीछे

देशभर में पंजीकृत ड्रोन की संख्या 38,475 तक पहुंच चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़ का आंकड़ा बेहद कम है। महाराष्ट्र 8,210 ड्रोन के साथ शीर्ष पर है, जबकि तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और हरियाणा जैसे राज्य हजारों की संख्या में ड्रोन उपयोग कर रहे हैं। यह अंतर बताता है कि तकनीक अपनाने की गति क्षेत्रवार अलग है।

वन निगरानी और सुरक्षा में बड़ी भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में ड्रोन तकनीक की अत्यधिक आवश्यकता है। राज्य का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र से घिरा है, जहां वन निगरानी और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने में ड्रोन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी और आपदा प्रबंधन में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।

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स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि में उपयोग की संभावना

दूरस्थ क्षेत्रों तक दवाइयों की आपूर्ति, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीण संपर्क की कमी वाले इलाकों में ड्रोन उपयोग जीवनरक्षक साबित हो सकता है। कृषि क्षेत्र में फसल निगरानी, कीटनाशक छिड़काव और भूमि सर्वेक्षण के लिए ड्रोन किसानों की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

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उद्योग और रोजगार के नए अवसर

विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय प्रशिक्षण केंद्र, तकनीकी कौशल विकास और निजी निवेश जरूरी है। यदि राज्य स्तर पर स्टार्टअप और तकनीकी उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जाए तो ड्रोन निर्माण, सेवा और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

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नीति मजबूत, अब अमल की जरूरत

संसदीय आंकड़ों से स्पष्ट है कि नीति ढांचा मजबूत होने के बावजूद तकनीक का वास्तविक उपयोग राज्यों की तैयारी पर निर्भर करता है।

छत्तीसगढ़ के लिए यह अवसर है कि वह प्रशासन, कृषि, स्वास्थ्य और सुरक्षा क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक अपनाकर विकास की गति तेज करे। सही रणनीति और निवेश से राज्य आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ सकता है।

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