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Avimukteshwaranand Controversy: गोरक्षा और मांस निर्यात (Meat Export) को लेकर एक बार फिर धर्म और सत्ता के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर तीखे सवाल खड़े किए हैं। शंकराचार्य का कहना है कि गोमाता की रक्षा और गौवंश संरक्षण की मांग करना आज के भारत में अपराध बना दिया गया है और जो भी इस आवाज को उठाता है, उसे सत्ता द्वारा दबाने की कोशिश की जाती है।
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गौरक्षा आंदोलन और पुराने जख्मों का हवाला
शंकराचार्य ने अपने बयान में कहा कि स्वतंत्र भारत में जब-जब गौमाता की रक्षा और सख्त कानून की मांग उठी है, तब-तब सरकारों ने उसे कुचलने का प्रयास किया। उन्होंने 1966 के दिल्ली गौरक्षा आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन सरकार में कई गौभक्त साधु-संतों को गोलियों का शिकार होना पड़ा और धर्मसम्राट करपात्री जी महाराज जैसे संतों को भी अपमानित किया गया। शंकराचार्य का आरोप है कि आज भी वही इतिहास दोहराया जा रहा है।
शंकराचार्य की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप

अपने बयान में शंकराचार्य ने कहा कि गौरक्षा की आवाज बुलंद करने के कारण उन पर और उनके समर्थक गौभक्तों पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण तक मांगा जा रहा है और सनातनी समाज में उनकी छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके करीबी संतों पर इस पूरे अभियान का नेतृत्व करने का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री से सीधा सवाल और चुनौती
एक विशेष प्रेस वार्ता (Press Conference) में शंकराचार्य की ओर से सरकार को कड़ा संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि उनसे परंपरा और पद का प्रमाण मांगा गया, जिसे उन्होंने दे दिया क्योंकि सत्य को प्रमाण से डर नहीं लगता। लेकिन अब सवाल मुख्यमंत्री से है। शंकराचार्य ने कहा कि हिंदू होना सिर्फ भाषण और मंच तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके साथ जिम्मेदारी और धर्मनीति जुड़ी होती है।
गौमाता को राज्य का दर्जा देने की मांग
शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने साफ मांग रखी कि गौमाता को राज्य माता (Rajya Mata) का दर्जा दिया जाए। उन्होंने मध्य प्रदेश और नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां गाय को सम्मान मिल सकता है तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि भगवान राम और कृष्ण की भूमि पर गौवंश की स्थिति सबसे चिंताजनक क्यों बनी हुई है।
मांस निर्यात पर गंभीर सवाल
शंकराचार्य ने मांस निर्यात (Meat Export) को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि देश के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। भैंस के मांस की आड़ में गौवंश के वध का खेल चल रहा है और बिना डीएनए जांच (DNA Test) के मांस का निर्यात हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में भैंसों की संख्या और निर्यात के आंकड़ों में भारी असमानता है, जो पूरे तंत्र पर सवाल खड़े करती है।
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40 दिन का अल्टीमेटम और चेतावनी
शंकराचार्य ने सरकार को 40 दिनों का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में गोमाता को राज्य का दर्जा नहीं मिला और मांस निर्यात पर सख्त आदेश जारी नहीं हुए, तो संत समाज बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री को सार्वजनिक रूप से नकली हिंदू (Fake Hindu) घोषित करने का निर्णय लिया जाएगा। swami Avimukteshwaranand controversy protest Magh Mela 2026
जनता और संत समाज से आह्वान
शंकराचार्य ने इसे केवल एक व्यक्ति या पद की लड़ाई नहीं बताया, बल्कि इसे राष्ट्रमाता और सनातन धर्म से जुड़ा प्रश्न बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती पर मांस निर्यात का बढ़ना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है और अब निर्णय का समय आ चुका है। Shankaracharya Avimukteshwaranand controversy
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अविमु्क्तेश्वरानंद ने माघ मेले में स्नान से मना किया
अविमु्क्तेश्वरानंद प्रेस वार्ता में कहा कि, '11 दिनो तक माफी का मौका दिया था लेकिन प्रशासन ने माफी नहीं मांगी। अब हम स्नान नहीं करेंगे। 10 -12 दिनों से मांफी का मौका दिया था नहीं मांगी माफी अब मुझे माफी चाहिए भी नहीं है। माग मेला निकल गया अब बात आगे बढ़ चुकी है। अब जब दोबारा माघ मेला आएगा तब जाएंगे माग मेले में। "हमने 11 दिन का समय दिया था" और रही बात मेरे प्रयागराज जाने की तो हम अपनी व्यवस्था खुद कर सकते हैं। किसी जरूरत नहीं है।
10-11 मार्च को पहुंचेंगे लखनऊ
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर हमारी मांगे पूरी नहीं हुई तो हम 10 -11 मार्च को साधू-संतो के साथ लखनऊ पहुंचेंगे और धरना देंगे। योगी जी के पास 40 दिन का समय है अपने आप को हिंदू साबित करें और अगर नहीं कर पाए तो हम खुद उन्हें कालनेमी घोषित करेंगे।
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