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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक: प्रयागराज हाईकोर्ट ने मंजूर की अग्रिम जमानत याचिका, फैसला सुरक्षित रखा

रिपोर्ट - धीरज बाबा नाबालिगों से कथित यौन शोषण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। 24 फरवरी को दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।

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Shaurya Verma
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Avimukteshwarananda Sexual Abuse Case: नाबालिगों के साथ यौन शोषण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। फिलहाल जस्टिस जितेंद्र सिन्हा ने फैसले को सुरक्षित रख लिया है।  Allahabad High Court 

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की 2 बड़ी बातें 

कोर्ट ने साफ कहा कि फैसला आने तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं होगी। अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद से जांच में सहयोग करने की बात कही है। अदालत में शंकराचार्य तरफ से वकील पी एन मिश्रा ने दलीलें पेश की, जबकि राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। अब मार्च के तीसरे हफ्ते में केस की सुनवाई होगी।

दोनों पक्षों में अपनी दलीलों में कही ये बातें

अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने यातिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट नहीं आ सकते। वहीं शंकराचार्य के वकील ने कहा कि पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता और परिजनों का कोई पता नहीं है। सरकार ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। 

शंकराचार्य के वकील - शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो POCSO वाली अर्जी दाखिल कर दी। दोनों अर्जी भ्रम पैदा कर रही है। ये मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है। 

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शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुज हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, कुकर्म, हत्या का केस दर्ज है. 25 हजार रुपए का इनाम भी है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। इसपर कोर्ट ने सरकार के वकील से सवाल किया कि बच्चे कहा हैं और उनके मां-बाप कहां है। 

शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकारी की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है।

24 फरवरी को लगाई अग्रिम जमानत की गुहार

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 24 फरवरी को हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका लगाई थी। राज्य सरकार ने इसका विरोध किया था। शंकराचार्य के वकील ने कहा था कि ये केस एक धर्मगुरु का है, न कि किसी अपराधी का। ये पूरा मामला एक साजिश के तहत किया जा रहा है।  

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बटुकों से कुकर्म पर FIR 

तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने 173 (4) के तहत जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जज (रेप एंड पोक्सो स्पेशल कोर्ट) विनोद कुमार चौरसिया के आदेश के बाद झूंसी थाने की पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बटुकों से कुकर्म की FIR दर्ज की थी।

झूठ की कलई कोर्ट में खुलेगी

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शंकराचार्य़ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि कोर्ट में झूट की कलई खुल जाएगी। उन्होंने कहा कि कब तक झूठ की कहानी बनाकर बरगलाएंगे। यूपी पुलिस भी उनको संरक्षण दे रही है। बच्चों के साथ कुकर्म की मेडिकल रिपोर्ट किसकी है, उन बच्चों के साथ कुकर्म किसने किया, यो साबित तो उनको करना होगा। पुलिस अपने मुताबिक जांच कर रिपोर्ट भी लगा रही है।  

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बता दें कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण मामले में दर्ज FIR के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। यह मामला न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत में क्रम संख्या 142 पर सूचीबद्ध है। आज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य की अग्रिम जमानत पर सुनवाई चल रही है। 

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