KGMU धर्मांतरण मामले में बड़ा खुलासा: आगरा के SN मेडिकल कॉलेज में रमीज-परवेज ने बनाया था 'इस्लामिक मेडिकोज' ग्रुप

KGMU धर्मांतरण मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी डॉक्टर रमीज मलिक और परवेज अंसारी ने आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से ग्रुप बनाया था। एजेंसियां 2012 से 2017 के बीच के संपर्कों की जांच कर रही हैं।

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KGMU Dharmantaran Case Update: लखनऊ के KGMU धर्मांतरण मामले में बड़ी खुलासा हुआ है। केजीएमयू के डॉक्टर रमीज मलिक पर जबरन धर्मांतरण करवाने का और शादी का झांसा देकर अवैध शारीरिक संबंध बनाने का आरोप था। इसी मामले की जांच से जुड़ी गतिविधियों में अब आगरा के SN मेडिकल कॉलेज  जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। जानकारी के अनुसार रमीज और दिल्ली बम धमाके के आरोपी डॉक्टर परवेज अंसारी ने मिलकर यहां एक खास नेटवर्क खड़ा किया था।

मेडिकल कॉलेज में चलाया जा रहा था WhatsApp ग्रुप 

पुलिस जांच में सामने आया कि साल 2012 में SN मेडिकल कॉलेज में रमीज मलिक ने एडमिशन लिया था। जिसके बाद रमीज मलिक और परवेज अंसारी ने ‘इस्लामिक मेडिकोज’ के नाम से एक WhatsApp ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप के बनाने का मुख्य उद्देश्य कॉलेज की छात्राओं से संपर्क बढ़ाया जाता था। इस ग्रुप में कई मौलानाओं को भी जोड़ा गया था। साथ ही कॉलेजद के कमरों में नियमित बैठकें भी होती थी। एजेंसियों को शक है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल छात्राओं को धर्मांतरण के लिए प्रभावित करने में किया गया। 

2012 में एक साथ लिया था एडमिशन 

जानकारी के अनुसार रमीज मलिक ने साल 2012 में SN मेडिकल से MBBS में एडमिशन लिया था। वहीं परवेज अंसारी ने उसी साल MD मेडिसन में दाखिला लिया था। दोनों कॉलेज के सीनियर बॉयज हॉस्टल में रहते थे। दोनों हॉस्टन स्थित मस्जिद में नियमित रूप से नमाज अदा करते थे। दोनों का कई बाहरी लोगों के साथ गतिविधियां देखी गईं थी, जिसे लेकर विवाद हो चुका था।   

टॉपर छात्रा को फंसाने का आरोप

जांच एजेंसियों के मुताबिक रमीज ने अपने ही बैच की टॉपर छात्रा को जाल में फंसाने की कोशिश की थी। आरोप है कि पहले दोस्ती की जाती थी, फिर धीरे-धीरे नजदीकियां बढ़ाकर आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाते थे। बाद में इन्हीं वीडियो के जरिए छात्राओं पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था। सूत्रों का दावा है कि कई छात्राएं इस दबाव में आ गई थीं।

2012 से 2017 तक चला नेटवर्क

बताया जा रहा है कि 2012 से 2017 के बीच हर साल करीब 15 मुस्लिम छात्र एसएन मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेते थे। इन छात्रों को धीरे-धीरे ‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप से जोड़ा जाता था और फिर उन्हें छात्राओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती थी। इसी दौरान कॉलेज परिसर और मस्जिद को लेकर कई बार विवाद भी सामने आए थे।

एजेंसियां खंगाल रहीं पुराने संपर्क

अब जब रमीज मलिक और परवेज अंसारी का एसएन मेडिकल कॉलेज से जुड़ा कनेक्शन सामने आया है, तो जांच एजेंसियां कॉलेज के पुराने छात्रों, जूनियर डॉक्टरों और यूपी के बाहर से जुड़े संपर्कों का ब्योरा जुटा रही हैं। कश्मीर समेत अन्य राज्यों से आए छात्रों के लिंक भी खंगाले जा रहे हैं। मामले की परतें खुलने के साथ जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

अब जानें क्या है पूरा विवाद 

KGMU धर्मांतरण मामला किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (King George’s Medical University, Lucknow) से जुड़ा एक गंभीर विवाद है, जिसमें एक रेजिडेंट डॉक्टर पर यौन शोषण, शादी का झांसा देकर गर्भपात कराना और जबरन धार्मिक परिवर्तन (forced religious conversion) कराना जैसे आरोप लगे हैं। इस मामले की शुरुआत 23 दिसंबर 2025 को तब हुई जब एक महिला मेडिकल स्टूडेंट ने चौक थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके सीनियर डॉक्टर ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, उसके गर्भ को समाप्त कराया और शादी से पहले धर्म बदलने का दबाव डाला। 

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पुलिस ने मामले में डॉ. रमीज़ उद्दीन नायक (Rameezuddin / Rameez Malik) को आरोपी के रूप में नामजद किया और उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। FIR में आरोप है कि उन्होंने धोखे से विवाह का वादा किया, पीड़िता को शारीरिक रूप से शोषित किया और जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। इसी तरह दूसरी मेडिकल छात्रा ने भी इसी तरह के शोषण, गर्भपात और धार्मिक रूपांतरण के आरोप लगाए। 

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इसके बाद विश्वविद्यालय की विशाखा (Vishakha) कमेटी ने जांच में आरोपी को दोषी पाया और उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की, साथ ही उसके प्रवेश पर पाबंदी भी लगाई गई। आरोपी ने शादी छुपाई थी और बाद में फरार हो गया था, जिस पर पुलिस ने ₹50,000 का इनाम घोषित किया और उसकी तलाश तेज कर दी। पुलिस ने आरोपी के माता-पिता को भी गिरफ्तार किया है, जिनके खिलाफ कथित रूप से पीड़ितों के धर्मांतरण और गर्भपात को अंजाम देने में मदद करने का आरोप है।

पुलिस ने FIR में आरोपों के आधार पर कई आपराधिक धाराएँ लगाई हैं, जिनमें बलात्कार, गर्भपात कराने के लिए मजबूर करना, विवाह में धोखाधड़ी और उत्तर प्रदेश के अवैध धार्मिक रूपांतरण विरोधी कानून (Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Religious Conversion Act) की धाराएँ शामिल हैं। पीड़ितों ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज कराए हैं, जिनसे मामले की गम्भीरता स्पष्ट होती है। 

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इस विवाद ने विश्वविद्यालय परिसर और लखनऊ में चर्चा और जांच दोनों को बढ़ा दिया है। KGMU प्रशासन पर भी लापरवाही के आरोप उठे हैं और महिला आयोग के नेता ने सवाल उठाए हैं कि विश्वविद्यालय को शुरुआती शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं करनी चाहिए थी। 

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