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KGMU परिसर में अवैध मजारों पर चलेगा बुलडोजर: प्रसासन ने 8 अवैध मजारों को नोटिस भेजा, 15 दिन में हटाने का अल्टीमेटम

लखनऊ के KGMU परिसर में बनी आठ अवैध मजारों पर प्रशासन ने नोटिस चस्पा किया है। 15 दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। समयसीमा के बाद बुलडोजर कार्रवाई होगी और खर्च कब्जाधारकों से वसूला जाएगा।

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Shaurya Verma
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KGMU Illegal Mazar Removal: लखनऊ स्थित KGMU में अवैध रूप से बने मजारों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। परिसर में मौजूद 8 मजारों को अवैध घोषित करते हुए उन्हें हटाने के लिए 15 दिनों की समय-सीमा दिया है। नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि ये सभी मजार विश्वविद्यालय में अवैध रूप से बनाई गई हैं और इन्हें 15 दिनों के अंदर खुद ही हटा लिया जाए। तय समय-सीमा के बाद भी अगर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो विश्वविद्यालय प्रशासन अपने स्तर पर विधिक कार्रवाई करेगा।

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मतांतरण मामले के बाद बढ़ा दबाव

हाल ही में सामने आए मतांतरण से जुड़े एक मामले के बाद राज्य महिला आयोग और कई सामाजिक संगठनों की ओर से KGMU के परिसर में मौजूद अवैध ढांचों को हटाने की मांग उठाई थी। पिछले साल भी पुलिस की मदद से एक मजार के पास बने अवैध निर्माण को ध्वस्त किया था। जिसके बाद पूरे परिसर की समीक्षा की गई थी। 

आठ मजारें चिन्हित

KGMU प्रशासन ने कुल 8 मजारों को चिन्हित किया है जो विश्वविद्यालय परिसर में बिना अनुमति के बनाई गई थी। KGMU के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार किसी प्रकार का अवैध धार्मिक ढांचा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी कड़ी में शुक्रवार को सभी मजारों को अवैध घोषित करते हुए नोटिस चस्पा किया गया। 

मरीजों और एंबुलेंस को हो रही परेशानी

प्रवक्ता ने बताया कि इन अवैध ढांचों और आसपास बढ़ते अतिक्रमण के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। एंबुलेंस के आने-जाने में दिक्कत होती है, जिससे इमरजेंसी सेवा प्रभावित होती है। इसके अलावा पार्किंग की समस्या भी गंभीर बनी हुई है और अस्पताल परिसर का अनुशासन प्रभावित हो रहा है।  KGMU Dharmantaran case

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कार्रवाई का खर्च भी वसूला जाएगा

KGMU प्रशासन ने नोटिस में ये भी स्पष्ट किया कि अगर तय समय में मजारे नहीं हटाई गई और प्रशासन को बुलडोजर व पुलिस बल की मदद से कार्रवाई करनी पड़ी, तो उसका पूरा खर्च अवैध कब्जा करने वालों से वसूला जाएगा। इस संबंध में सभी संचालकों को पहले ही अवगत करा दिया गया है। 

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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर करीब डेढ़ साल पहले भी परिसर में बने कुछ अवैध ढांचों को हटाया गया था। प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप सरकारी अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को किसी भी तरह की अवैध गतिविधियों या कट्टरपंथ का केंद्र नहीं बनने दिया जाएगा।  KGMU Dharmantaran Case Update

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प्रशासनिक और पुलिस सहयोग

इन अवैध मजारों को हटाने की प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए जिला प्रशासन से भी सहयोग मांगा गया है। केजीएमयू प्रशासन ने जिलाधिकारी (District Magistrate) और पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) को पत्र लिखकर आवश्यक सुरक्षा और प्रशासनिक मदद उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। प्रो. केके सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान का हालिया मतांतरण की घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।  

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