डॉक्टर नामवर सिंह सम्मान 2026: प्रो. आशीष त्रिपाठी होंगे सम्मानित, विप्लवी पुस्तकालय ने किया ऐलान,  22–23 मार्च को समारोह

डॉ. नामवर सिंह सम्मान 2026 के लिए प्रो. आशीष त्रिपाठी का चयन किया गया है। विप्लवी पुस्तकालय द्वारा दिया जाने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान 22–23 मार्च 2025 को प्रदान होगा। त्रिपाठी कविता, आलोचना और संपादन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं।

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Dr Namvar Singh Samman 2026: विप्लवी पुस्तकालय द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित डॉक्टर नामवर सिंह राष्ट्रीय सम्मान 2026 इस साल प्रख्यात कवि, आलोचक और संपादक प्रो. आशीष त्रिपाठी को दिया जाएगा। यह सम्मान 22–23 मार्च को आयोजित होने वाले दो दिवसीय वार्षिकोत्सव में प्रदान किया जाएगा। नामवर सिंह की जन्मशती के अवसर पर यह सम्मान एक ऐसे साहित्यकार को दिया जा रहा है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को संरक्षित एवं विस्तारित करने में अहम भूमिका निभाई है।

सम्मान समिति के संयोजक राजेन्द्र राजन ने बताया कि संचालन समिति की बैठक 21 दिसंबर 2025 को आयोजित की गई थी।  जिसमें सर्वसम्मति से प्रो. त्रिपाठी के नाम पर मुहर लगाई गई।

पहली बार आचार्य विश्वनाथ त्रिपाठी को मिला था सम्मान 

यह सम्मान 2020 से शुरू हुआ था, जिसके पहले प्राप्तकर्ता दिल्ली के प्रख्यात साहित्यकार आचार्य विश्वनाथ त्रिपाठी थे। उसके बाद क्रमशः नरेश सक्सेना (लखनऊ), प्रो. अवधेश प्रधान (वाराणसी), प्रो. शंभुनाथ (कोलकाता), प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल (दिल्ली) और प्रो. ब्रजकुमार पांडेय (पटना) को यह सम्मान दिया जा चुका है।

किसे मिलता है ये सम्मान 

नामवर सिंह की जन्मशती के अवसर पर यह सम्मान एक ऐसे साहित्यकार को दिया जा रहा है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को संरक्षित एवं विस्तारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रो. आशीष त्रिपाठी का साहित्यिक व्यक्तित्व

प्रो. आशीष त्रिपाठी  का जन्म 21 सितंबर, 1973 को मध्य प्रदेश के सतना जिले के जमुनिहाई गांव में हुआ था। प्रो. आशीष त्रिपाठी वर्तमान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के हिंदी विभाग में प्रोफेसर हैं। प्रो. त्रिपाठी ने कम उम्र से ही कविता लिखना शुरू कर दिया था। उनकी पहली कवित 1986 में प्रकाशित हुई थी और 1994 से उनका लगातार साहित्यिक प्रकाशन जारी है। 

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उनका पहला कविता संग्रह ‘एक रंग ठहरा हुआ’ (2010) प्रकाशित हुआ, जिसे लक्ष्मण प्रसाद मंडलोई स्मृति सम्मान मिला। दूसरा कविता संग्रह ‘शांति पर्व’ (2024) ने भी साहित्यिक जगत में एक अलग पहचान बनाई।

प्रो. आशीष त्रिपाठी आलोचना के क्षेत्र में भी वे उतने ही सक्रिय हैं। उनकी पुस्तक ‘समकालीन हिन्दी रंगमंच और रंगभाषा’ विशेष रूप से चर्चित रही। इसके अलावा वह भक्ति आंदोलन, तुलसीदास और हिंदी नाटकों पर लोक रंग-परंपराओं के प्रभाव से जुड़े अपने शोधकार्य को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस समय वे रज़ा फेलोशिप के तहत प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर की जीवनी लिखने में भी जुटे हुए हैं।

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नामवर सिंह की 19 पुस्तकों का संपादन

प्रो. त्रिपाठी ने प्रो. नामवर सिंह की 19 महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया है, जिनमें कविता की जमीन और जमीन की कविता, साहित्य की पहचान, आलोचना और संवाद, संमक, जीवन क्या जिया, आधुनिक विश्व साहित्य और सिद्धांत जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने रामचंद्र शुक्ल रचनावली के आठ खंडों का संपादन भी प्रो. नामवर सिंह के साथ किया था। वे काशीनाथ सिंह, स्वयं प्रकाश, अरुण कमल और चंद्रकांत देवताले की कई पुस्तकों व कथा-चयनों का भी संपादन कर चुके हैं। 

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