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St Georges College Agra Scam: आगरा के प्रतिष्ठित मिशनरी शिक्षण संस्थान सेंट जॉर्जेज कॉलेज (यूनिट-वन) में कथित रूप से करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरोप कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल जे. एस. जरमाया पर लगे हैं, जिन पर पद का दुरुपयोग कर पारिवारिक हित साधने का आरोप है।
कॉलेज की फीस से निजी फर्म को करोड़ों का भुगतान
चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (Church of North India) से संबद्ध आगरा डायोसिस के अंतर्गत संचालित सेंट जॉर्जेज कॉलेज यूनिट-वन को लेकर सामने आई शिकायतों और दस्तावेजों में गंभीर खुलासे हुए हैं। आरोप है कि साल 2015 से 2021 के बीच कॉलेज की फीस से प्राप्त धनराशि में से लगभग 15 करोड़ रुपये एक निजी कंप्यूटर प्रशिक्षण फर्म को भुगतान किए गए। यह फर्म कंप्यूट्रॉनिक्स (Computronics) पूर्व प्रिंसिपल जे. एस. जरमाया के बेटे अक्षय राजशेखर जरमाया के नाम पर संचालित बताई जा रही है।
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कॉलेज के पते पर ही दर्ज थी फर्म
जांच से जुड़े दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि जिस कंप्यूट्रॉनिक्स फर्म को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया, उसका पंजीकरण कॉलेज के ही पते पर कराया गया था। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या कॉलेज के संसाधनों और पहचान का इस्तेमाल निजी व्यवसाय के लिए किया गया। आरोप है कि इस फर्म के माध्यम से प्राप्त धनराशि बाद में परिवार द्वारा स्थापित इंडियन हेरिटेज स्कूल (Indian Heritage School) में ट्रांसफर कर दी गई।
नियमों के खिलाफ बेटे की नियुक्ति
मामले में एक और गंभीर आरोप यह है कि मिशनरी नियमों और तय अर्हताओं (Eligibility) की अनदेखी करते हुए जे. एस. जरमाया ने सेवानिवृत्ति के बाद अपने बेटे को सेंट जॉर्जेज कॉलेज यूनिट-वन का प्रिंसिपल नियुक्त कराया। आरोप है कि बेटे के पास न तो आवश्यक अनुभव था और न ही निर्धारित शैक्षणिक डिग्री, इसके बावजूद नियुक्ति कराई गई।
एंपायर कंप्यूटर्स को भी बड़े भुगतान का दावा
प्रारंभिक जांच में यह बात भी सामने आई है कि इसी अवधि में एंपायर कंप्यूटर्स (Empire Computers) नाम की एक अन्य फर्म को भी कॉलेज की ओर से बड़ी धनराशि का भुगतान किया गया।
पुलिस जांच में सबूत मिलने की बात
बालूगंज स्थित कॉलेज प्रशासन की ओर से की गई शिकायत के बाद पुलिस स्तर पर प्रारंभिक जांच शुरू की गई है। सूत्रों के अनुसार, जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों में तथ्य पाए गए हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले को लेकर शिक्षा जगत और अभिभावकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व प्रिंसिपल और बेटे की चुप्पी
जब इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए पूर्व प्रिंसिपल जे. एस. जरमाया और उनके पुत्र अक्षय राजशेखर जरमाया से फोन, एसएमएस और व्हाट्सएप (WhatsApp) के माध्यम से कई बार संपर्क किया गया, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। क्रिसमस के बाद अपना पक्ष रखने का आश्वासन जरूर दिया गया, लेकिन उसके बाद भी संपर्क नहीं हो सका।
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भूमि खरीद से भी जोड़े जा रहे पुराने आरोप
इसके अलावा आरोप है कि साल 2004 में प्रिंसिपल पद पर रहते हुए जे. एस. जरमाया ने अकबरपुर क्षेत्र में भूमि खरीदी थी। अब इस भूमि खरीद को भी मौजूदा वित्तीय अनियमितताओं से जोड़कर देखा जा रहा है और इसकी भी जांच की मांग उठ रही है।
सोसायटी विभाग ने मांगे अभिलेख
उपनिबंधक सोसायटीज एवं चिट फंड (Registrar Societies and Chit Fund) विपुल सिंह ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपों और बिंदुओं की गहन जांच के लिए संबंधित अभिलेख मंगाए जा रहे हैं, ताकि पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
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