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Traffic Challan Contest: गलत ट्रैफिक चालान से परेशान? 45 दिन में चैलेंज नहीं किया तो... रुक सकती है RC और DL सेवाएं, जानें नए नियम

केंद्र सरकार ने ट्रैफिक चालान और ई-चालान को चुनौती देने की प्रक्रिया नोटिफाई की है। चालान 45 दिन में चुनौती देना होगा, 30 दिन में निपटारा होगा और भुगतान न करने पर आरसी व डीएल सेवाएं रोकी जा सकती हैं।

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Shaurya Verma
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Traffic Challan Contest: क्या आपको लग रही है कि आपका चालान गलत तरीके से काटा गया ? चिंता न करें, आप इसके खिलाफ चैलेंज कर सकतें हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय  (Road Transport Ministry) ने  ट्रैफिक और परिवहन से जुड़े चालान और ई-चालान के भुगतान व चुनौती की स्पष्ट प्रक्रिया और समय-सीमा का नोटिफिकेशन जारी किया है।  

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चालान स्वीकार या चुनौती देने की समय-सीमा 

नए नियमों के अनुसार वाहन मालिक या चालक को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के अंदर ये तय करना होगा कि उसे चालान स्वीकार कर जुर्माना भरेगा या उसे चुनौती देगा। चालानको चैलेंज करने के लिए केंद्रीय पोर्टल echallan.parivahan.in पर documentary evidence के साथ एप्लाई करना होगा। अगर 45 दिनो के अंदर चालान को चैलेंज नहीं किया जाता तो उसे उल्लंघनकर्ता की ओर से स्वीकार माना जाएगा। ऐसे में चालान की राशि अगले 30 दिनों के अंदर यानी 75 दिनों में ही जमा करनी होगी।  echallan parivahan portal

चालान विवाद का निपटारा 30 दिनों में

मंत्रालय के अनुसार, अगक किसी चालान को पोर्टल के माध्यम से designated authority के सामने चुनौती दी जाती है, तो सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद 30 दिनों के अंदर उसका निपटारा होना अनिवार्य है। अगर प्राधिकारी सबूतों से संतुष्ट होता है तो चालान रद्द किया जा सकता है। इसके लिए लिखित आदेश जारी कर उसे पोर्टल पर अपलोड करना होगा। अगर किसी वजह से चुनौती खारिज हो जाती है तो उसके कारण भी लिखित रूप में दर्ज किए जाएंगे। आदेश अपलोड होने के 30 दिन के भीतर चालान का भुगतान करना होगा।   

कोर्ट जाने का विकल्प भी मौजूद

अगर उल्लंघनकर्ता प्राधिकारी के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह कोर्ट में आवेदन कर सकता है। इसके लिए चालान की कुल राशि का 50 प्रतिशत पहले जमा करना अनिवार्य होगा। वहीं अगर उल्लंघनकर्ता चालान का भुगचान नहीं करता है और न 30 दिनों के भीतर कोर्ट जाता है ये मान लिया जाएगा कि उसने चालान स्वीकार कर लिया है। उसे अगले 15 दिनो के भीतर पूरी राशि चुकानी होगी। 

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भुगतान न करने पर क्या होगी कार्रवाई

नए नियमों में स्पष्ट किया गया है कि तय समय-सीमा तक भुगतान न करने पर वाहन या ड्राइविंग लाइसेंस (DL) से जुड़ी सेवाएं रोकी जा सकती है। ऐसे मामलों में लाइसेंस या वाहन पोर्टल पर ‘Not to be Transacted’ के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा।  इस दौरान RC Transfer, renewal, duplicate DL, NOC या PUCC जैसी सेवाएं नहीं मिलेंगी। चालान भुगतान की अंतिम तारीख तक रोजाना नोटिस भी भेजा जाएगा।

कोर्ट में अपने आप नहीं जाएगा चालान

अब तक 90 दिनों तक भुगतान न होने वाले चालान अपने आप वर्चुअल कोर्ट (Virtual Court) में चले जाते थे। लेकिन नए नियमों के तहत कोई भी चालान स्वतः कोर्ट में नहीं जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि पहले इस व्यवस्था के कारण लोग चालान को नजरअंदाज करते थे, क्योंकि आरसी और डीएल से जुड़ी सेवाएं बंद नहीं होती थीं। 

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किन चालानों पर लागू होंगे नए नियम

यह व्यवस्था केवल कंपाउंडेबल चालानों (Compoundable Challans) पर लागू होगी, यानी ऐसे उल्लंघन जिनका जुर्माना मौके पर या पोर्टल के जरिए भरा जा सकता है। नॉन-कंपाउंडेबल चालान (Non-compoundable challans) का निपटारा अभी भी केवल कोर्ट में ही होगा। हालांकि सरकार ने संकेत दिए हैं कि मौजूदा कई नॉन-कंपाउंडेबल अपराधों को जल्द कंपाउंडेबल बनाया जा सकता है। इसके लिए संसद में विश्वास बिल 2.0 (Viswas Bill 2.0) पेश किया गया है। 

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चालान जारी और डिलीवरी की प्रक्रिया

नए नियमों के मुताबिक, वर्दी में तैनात कोई भी पुलिस अधिकारी या राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिकृत अधिकारी फिजिकल या इलेक्ट्रॉनिक चालान जारी कर सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग और एनफोर्समेंट सिस्टम (Electronic Monitoring and Enforcement System) के जरिए भी ऑटो-जेनरेटेड चालान जारी किए जा सकते हैं। फिजिकल चालान 15 दिनों के भीतर और इलेक्ट्रॉनिक चालान तीन दिनों के भीतर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाए जाएंगे। सभी चालानों का विवरण राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों के पोर्टल पर क्रमवार दर्ज किया जाएगा। 

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राज्यों में प्राधिकारी नियुक्ति अभी बाकी

हालांकि मंत्रालय की ओर से प्रक्रिया और समय-सीमा अधिसूचित कर दी गई है, लेकिन कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अभी तक वह अधिकृत प्राधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है, जो चालानों से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई और समाधान करेगा। e challan dispute process

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