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MP Budget 2026 Industrial Development: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) सरकार ने आज अपना तीसरा बजट पेश किया। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने 2026-27 में उद्योग-व्यापार, निवेश प्रोत्साहन, एमएसएमई, स्टार्टअप और रोज़गार सृजन को लेकर बजट में क्या प्रावधान दिया है। बजट 2026-27 में निवेश और औद्योगीकरण क्षेत्र के लिए कुल 5,957 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मध्य प्रदेश सरकार का फोकस राज्य को औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर है।
पहले 2025 को घोषित किया गया ‘उद्योग और रोज़गार वर्ष’
मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2025 को ‘उद्योग और रोज़गार वर्ष’ के रूप में चिन्हित किया था। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से निवेश आकर्षित करने के लिए इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव, इंटरैक्टिव सेशन्स और इन्वेस्टमेंट ड्राइव आयोजित किए। जिससे MP में औद्योगिक विस्तार का माहौल बना। बीते दो सालों की बात करने तो विभिन्न क्षेत्रों में करीब 33 लाख करोड़ रुपए का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुआ, जिनमें से 8 लाख 63 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू भी हो चुका है।
नई औद्योगिक नीतियां
औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने एमएसएमई विकास नीति 2025, एमएसएमई औद्योगिक भूमि एवं भवन आवंटन नियम 2025 और उद्योग संवर्धन नीति 2025 लागू की। इसमें निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए ‘मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक नीति 2025’ और ‘मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट संवर्धन नीति 2025’ भी लाई गई है। वहीं, भविष्य की तकनीकों पर ध्यान देते हुए ‘मध्यप्रदेश स्पेसटेक नीति 2026’ के प्रभावी क्रियान्वयन की घोषणा की गई है।
औद्योगिक पार्क और कॉरिडोर से बदलेगा नक्शा
प्रदेश के सभी क्षेत्रों में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए 19,300 एकड़ भूमि पर 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। जिसमें 5 आईटी पार्क, मंडीदीप में फ्लैटेड इंडस्ट्रीज, इंदौर में प्लग-एंड-प्ले पार्क और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। इसके साथ ही इंदौर–पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर परियोजना पर 2,360 करोड़ रुपए की लागत से काम किया जा रहा है। इसमें भी उद्योगों और निवेश को नई गति मिलेगी।
बुंदेलखंड क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए सागर के मसवासी ग्रंट औद्योगिक क्षेत्र के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन (TMZ) की स्थापना की दिशा में भी आगे कदम बढ़ाएं जा रहे हैं।
एमएसएमई, स्टार्टअप और महिला
मध्य प्रदेश में 23 लाख से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्योग पंजीकृत हैं। जिनमें से 4.5 लाख विनिर्माण इकाइयां करीब 36 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत पिछले दो सालों में 16,491 युवाओं को 1,134 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया। स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। जिसमें कुल 6,670 स्टार्टअप्स में से 3,000 से ज्यादा का संचालन महिलाएं कर रही हैं। ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अनुसार ग्वालियर के मिंट स्टोन और छतरपुर के लकड़ी के फर्नीचर को जीआई टैग भी मिला है।
निवेश और औद्योगीकरण के लिए बजट
बजट 2026-27 में निवेश और औद्योगीकरण क्षेत्र के लिए कुल 5,957 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसमें निवेश प्रोत्साहन योजना के लिए 2,550 करोड़, औद्योगिक अधोसंरचना विकास के लिए 490 करोड़, भू-अर्जन व सर्वे कार्य के लिए 327 करोड़, डेस्टिनेशन एमपी-इन्वेस्टमेंट ड्राइव के लिए 200 करोड़, कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास के लिए 193 करोड़, एमएसएमई प्रोत्साहन एवं सुविधा योजनाएं के लिए 1,550 करोड़, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के लिए 130 करोड़ और स्टार्टअप पॉलिसी क्रियान्वयन 96 करोड़ है।
रोज़गार सृजन पर सीधा फोकस
मध्य प्रदेश सरकार का उद्योगों के माध्यम से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। औद्योगिक पार्क, कॉरिडोर परियोजनाएं, स्टार्टअप पॉलिसी और एमएसएमई सपोर्ट सिस्टम से आने वाले सालों में लाखों नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। जिसमें युवाओं और महिलाओं को उद्यमिता के लिए प्रोत्साहन देने पर जोर दिया गया है।
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