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Budget Latest Highlights From the Union Budget 2026 for the PMMSY Sector: मत्स्य पालन क्षेत्र को आधुनिक बनाने और मछुआरों की आय बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,500 करोड़ का निवेश तय किया है, जिसका मुख्य जोर नई तकनीक और निर्यात पर होगा।
रोजगार और महिला सशक्तिकरण के तहत ग्रामीण भारत में रोजगार क्रिएशन का एक बड़ा जरिया बनने वाली है। मत्स्य पालन क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 2,50,000 (ढाई लाख) नए रोजगार सृजित किए जाएंगे। विशेष रूप से महिलाओं के लिए 1.41 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा करने पर फोकस किया गया है।
तकनीक से बढ़ेगी मछली उत्पादन की क्षमता
मत्स्य पालन में पारंपरिक तरीकों को आधुनिक तकनीकों में बदलने का लक्ष्य रखा है। जिसके तहत उन्नत सिस्टम पर काम किया जाएगा। बायोफ्लॉक (Biofloc), आरएएस (RAS) और केज कल्चर जैसे आधुनिक एक्वाकल्चर सिस्टम के माध्यम से 180 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को कवर किया जाएगा।
9% तक मछली उत्पादन बढ़ाने का टारगेट
मछली उत्पादन बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा। जिसके तहत नई तकनीकों के उपयोग से पिछले वर्ष की तुलना में मछली उत्पादन में 9% की बढ़ोतरी का टारगेट रखा गया है। कौशल विकास के तहत इस क्षेत्र में विशेषज्ञता बढ़ाने के लिए 80,000 लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
आय में 10% वार्षिक बढ़ोतरी का टारगेट
सरकार ने वैश्विक मत्स्य बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कड़े लक्ष्य रखे हैं। मछली निर्यात के माध्यम से विदेशी मुद्रा आय में 10% की वार्षिक बढ़ोतरी का टारगेट निर्धारित किया गया है। बिचौलियों को कम कर कोल्ड चेन में मजबूती लाकर मछुआरों को उनके उत्पाद की बेहतर कीमत एन्श्योर की जाएगी।
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10,000 हेक्टेयर जलीय अतिरिक्त क्षेत्र का लक्ष्य
सरकार ने जलीय कृषि (Aquaculture) क्षेत्र में विस्तार का टारगेट रखा है। जिसमें जलीय कृषि के दायरे में 10,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र जोड़ने का लक्ष्य है। साथ ही समुद्री शैवाल (Seaweed) उत्पादन में 20% की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। एक्वाकल्चर बीमा के तहत 10,000 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जाएगा, जिसके लिए ₹25 करोड़ का प्रोत्साहन दिया जाएगा। दावों का निपटान 90 दिनों के भीतर करने का कड़ा निर्देश है।
10 नए बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, 50 FFPOs बनाएंगे
इंफ्रास्ट्रक्चर और एफएफपीओ: मछली प्रबंधन के लिए 10 नए बंदरगाह और लैंडिंग सेंटर बनेंगे। साथ ही, 50 नए मत्स्य किसान उत्पादक संगठन (FFPOs) बनाए जाएंगे। वैज्ञानिक तरीके से मछली हैंडलिंग के लिए 3.25 लाख टन की क्षमता विकसित की जाएगी।
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