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MP में नहीं थम रही रिश्वतखोरी: सागर में डेढ़ लाख की रिश्वत लेते PHE का इंजीनियर गिरफ्तार, नल-जल योजना के बिल पास करने के बदले मांगी थी घूस

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद भी रिश्वतखोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब लोकायुक्त ने सागर में कार्रवाई करते हुए PHE विभाग के इंजीनियर को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है।

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Vikram Jain
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लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई ) कार्यालय में लोकायुक्त की कार्रवाई।

Sagar PHE Department Rishwat Case Lokayukta Action: मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। आए दिन होने वाली लोकायुक्त की धरपकड़ के बावजूद सरकारी अधिकारी-कर्मचारी रिश्वतखोरी से बाज नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला सागर जिले से सामने आया है जहां लोकायुक्त पुलिस ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में बड़ी कार्रवाई करते हुए अधीक्षण यंत्री (Superintending Engineer) एसएल बाथम को 1.5 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

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अधिकारी ने सीधे पैसे न लेकर अपने ड्राइवर के जरिए गाड़ी में घूस की रकम मंगवाई थी। ठेकेदार शैलेष कुमार के बिलों के भुगतान और नए कार्यादेश जारी करने के एवज में 6 लाख रुपए की मांग की गई थी। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

सागर PHE का अधिकारी ने रिश्वत लेते पकड़ाया

भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत सागर लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को एक बड़ी सफलता हासिल की। लोकायुक्त टीम ने सागर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग कार्यालय खंड सागर के अधीक्षण यंत्री एसएल बाथम को 1.5 लाख रुपए की घूसखोरी के आरोप में गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकारी खुद सीधे पैसे न लेकर अपने ड्राइवर के माध्यम से सौदेबाजी कर रहे थे। इस कार्रवाई के बाद से पूरे विभाग में खलबली मच गई है।

योजना के बिल पास करने 6 लाख की डिमांड

जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई ठेकेदार शैलेष कुमार की शिकायत पर आधारित थी, जिन्होंने भ्रष्टाचार की सूचना लोकायुक्त को दी थी। बिहार निवासी ठेकेदार ने सागर और केसली विकासखंड में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन और पानी की टंकी बनाने का ठेका लिया था। साल 2022 से चल रहे इन कार्यों का शासन द्वारा पुनर्निरीक्षण किया गया, जिसके बाद अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए राशि स्वीकृत हुई। जब ठेकेदार कार्यादेश (Work Order) जारी करवाने अधीक्षण यंत्री एसएल बाथम के पास पहुंचे, तो उन्होंने कुल राशि का साढ़े तीन प्रतिशत यानी 6 लाख रुपए रिश्वत की मांग की।

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Sagar PHE Department Rishwat Case Lokayukta Action 1

कार में बिछाया गया 'ट्रैप'

रिश्वत की डिमांड से परेशान होकर ठेकेदार ने लोकायुक्त से शिकायत कर दी। शिकायत की पुष्टि होने के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। बुधवार को जैसे ही ठेकेदार डेढ़ लाख रुपए की पहली किस्त लेकर कार्यालय पहुंचा तो बाथम ने चतुराई दिखाते हुए पैसे खुद न लेकर अपने ड्राइवर फूलसिंह यादव को बुला लिया। उन्होंने ठेकेदार को ड्राइवर के साथ गाड़ी में जाकर पैसे देने का इशारा किया। जैसे ही कार के भीतर पैसों का लेनदेन हुआ, लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर ड्राइवर को रुपयों के साथ धर दबोचा। इस मामले में ड्राइवर को भी आरोपी बनाया गया है।

अधिकारी और ड्राइवर दोनों पर कार्रवाई

लोकायुक्त निरीक्षक कमल सिंह उईके के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में अधीक्षण यंत्री एसएल बाथम को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने ड्राइवर के पास से रिश्वत की राशि बरामद कर ली है। लोकायुक्त टीम ने अधिकारी के हाथ धुलवाए तो वे गुलाबी हो गए, जिससे घूस लेने की पुष्टि मौके पर ही हो गई। लोकायुक्त पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

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ठेकेदार को किया जा रहा था प्रताड़ित

ठेकेदार शैलेष कुमार के अनुसार पुराने बिलों का भुगतान भी विभाग में अटका हुआ था। कार्यादेश जारी करने और पुराने भुगतान को क्लियर करने के नाम पर अधिकारी लगातार कमीशन की मांग कर रहे थे, जिससे विकास कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही थी। जिससे परेशान होकर उन्होंने सागर लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई थी।

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भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त का कड़ा संदेश

सागर लोकायुक्त की इस त्वरित कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी तंत्र में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की अब खैर नहीं है। ड्राइवर के माध्यम से रिश्वत लेने के बावजूद अधिकारी कानूनी चंगुल से बच नहीं पाए। लोकायुक्त की इस कार्रवाई से पीएचई (PHE) महकमे में हड़कंप मच गया है और दफ्तर में सन्नाटा पसरा हुआ है।

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