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Raisen Rape Case Update: रायसेन जिले में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में धीमी कार्रवाई पर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। 21 नवंबर को हुई इस वारदात के बाद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसके चलते जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी नाराजगी और पुलिस की ढीली तैयारी पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार (26 नवंबर) रात देर तक पीएचक्यू में बैठक की और कई अहम निर्देश दिए। इसी बैठक के बाद रायसेन के एसपी पंकज कुमार पाण्डे को हटाकर भोपाल के डीसीपी आशुतोष को जिले की कमान सौंप दी गई। घटना से आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने गौहरगंज-औबेदुल्लागंज बंद का ऐलान किया है।
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मुख्यमंत्री की देर रात बैठक
मुख्यमंत्री ने रात सवा आठ बजे पीएचक्यू में अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी इंटेलिजेंस और पुलिस कमिश्नर भोपाल मौजूद रहे। बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के चार दिन बाद भी आरोपी सलमान की गिरफ्तारी न होने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई ही जनता का भरोसा कायम रखती है, लेकिन रायसेन में पुलिस यह जिम्मेदारी निभाने में असफल रही। इसी दौरान चक्काजाम और विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित न कर पाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए और एसपी को हटाने का निर्देश दिया।
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पदस्थापना में अहम फेरबदल
गृह विभाग ने रात में आदेश जारी करते हुए रायसेन एसपी को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया। नए एसपी आशुतोष (जो भोपाल में डीसीपी जोन-1 के रूप में कार्यरत थे) अब रायसेन की कानून व्यवस्था संभालेंगे। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह पदस्थापना आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से प्रभावी रहेगी।
पंकज कुमार पाण्डे को एआईजी पुलिस मुख्यालय, भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही मिसरोद थाना प्रभारी संदीप पवार और टीला जमालपुरा के कार्यवाहक निरीक्षक दिनेश प्रताप सिंह को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि हाल में हुए कैफे विवाद में कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे।
चौथे दिन भी आरोपी फरार
घटना के बाद से गांव में तनाव बरकरार है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी सलमान आसपास ही कहीं छिपा होगा, लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में नाकाम रही है। कड़ाके की सर्दी में महिलाएं, बुजुर्ग और युवतियां लगातार धरने पर बैठी हैं। उनका कहना है कि यदि पुलिस आरोपी को नहीं पकड़ पा रही है तो एनकाउंटर किया जाए, ताकि बच्ची को न्याय मिल सके। ग्रामीण लगातार पांचवे दिन आज धरने पर बैठे हुए हैं।
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गांव की महिलाएं लगातार कह रही हैं कि जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता, धरना खत्म नहीं होगा। स्थानीय संगठनों ने भी इस मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाई है। बच्ची के परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर निराशा जताते हुए कहा कि चार दिन बाद भी कोई ठोस नतीजा न आना दुखद है।
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मामले को लेकर लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आज सकल हिंदू समाज गोहरगंज थाने के सामने धरना प्रदर्शन करेगा। इस प्रदर्शन में महिलाओं-बच्चियों समेत हजारों लोग शामिल होंगे। सुरक्षा के मद्देनजर इलाका छावली में तब्दील कर दिया गया है। बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती कर दी गई है। बता दें, पीड़िता का फिलहाल एम्स भोपाल में इलाज चल रहा है। महिलाओं ने आरोपी के एनकाउंटर की मांग की है।
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पीड़िता के परिवार से मिलने पहुंचे जीतू पटवारी
पीड़िता से मिलने पहुंचे पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने परिजनों का हाल जाना और डॉक्टर्स से मासूम की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बच्ची अब ठीक है, लेकिन उसके साथ हुई घटना शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। पटवारी ने आरोपी को राक्षस करार देते हुए उसकी जल्द गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग की। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ एसपी को हटाने से कुछ नहीं बदलेगा, अगर ट्रांसफर से अपराध रुकते हैं तो पूरे प्रदेश के एसपी बदल दो। उनके अनुसार प्रदेश में कानून का खौफ खत्म हो चुका है और राजनीति से ऊपर उठकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटना दोबारा न हो।
बच्ची को चॉकलेट के बहाने ले गया था आरोपी
21 नवंबर की शाम बच्ची अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी आरोपी सलमान आया और उसे चॉकलेट दिलाने का झांसा देकर जंगल की ओर ले गया। कई ग्रामीणों ने दोनों को साथ जाते देखा भी था। कुछ देर बाद बच्ची जंगल में खून से लथपथ पड़ी मिली, वह दर्द से तड़प रही थी।
ग्रामीणों के अनुसार आरोपी श्यामपुर दौराहा क्षेत्र का रहने वाला है और पहले जिला बदर भी हो चुका है। इसके बावजूद वह गांव में किराए से रह रहा था, जिस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि ऐसे लोगों की निगरानी न करना पुलिस और प्रशासन दोनों की गंभीर चूक है।
एम्बुलेंस न मिलने से बढ़ी पीड़ा
घटना के बाद बच्ची को ओबेदुल्लागंज के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां दो घंटे तक एम्बुलेंस नहीं मिली। स्थानीय निवासी परेश नागर ने बताया कि अस्पताल में मौजूद एक एम्बुलेंस पहले से ही खराब थी और बीएमओ ने कॉल रिसीव नहीं किया। एसडीएम मौके पर पहुंच चुके थे, फिर भी एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। अंततः ग्रामीणों ने बच्ची को निजी कार से एम्स भोपाल पहुंचाया। गांव वाले इस लापरवाही को हादसा नहीं, अपराध कह रहे हैं।
सर्च ऑपरेशन जारी, लेकिन हाथ खाली
पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 20 टीमें गठित की हैं। 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी जंगल, पहाड़ी और गांव के इलाकों में लगातार तलाश कर रहे हैं। कई जगह चेकपोस्ट लगाए गए हैं और आसपास के जिलों को सतर्क किया गया है। बावजूद इसके सलमान अब तक पकड़ में नहीं आया। इसी वजह से ग्रामीणों का शक बढ़ रहा है कि पुलिस या तो सही ट्रैक पर नहीं है, या किसी प्रशासनिक ढिलाई ने आरोपी को भागने का मौका दे दिया।
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