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बुरहानपुर के जंगल में पेड़ों से गोंद निकालने पर रोक: हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, अगली सुनवाई 24 मार्च को

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जंगल में पेड़ों से गोंद निकालने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सरकार को स्पष्ट कहा हैं कि 14 फरवरी 2024 के प्रतिबंध आदेश का अक्षरस: पालन किया जाएं।

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sanjay warude
MP Gond Smuggling Ban

MP Gond Smuggling Ban: मध्यप्रदेश में बुरहानपुर जिले के जंगल के सलाई और धावड़ा पेड़ों से गोंद निकालने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।

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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को जंगल में पेड़ों से गोंद निकालने पर रोक लगाने के आदेश जारी किए है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने सरकार को स्पष्ट कहा हैं कि 14 फरवरी 2024 के प्रतिबंध आदेश का अक्षरस: पालन किया जाएं। गोंद निकालने की सभी गतिविधियों को रोका जाएं।

प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से दिए जा रहे हैं लाइसेंस

याचिकाकर्ता शौकत अली की ओर से वकील अहदुल्ला उस्मानी ने कोर्ट को बताया कि बुरहानपुर के जंगलों में सलाई और धावड़ा के पेड़ों से गोंद निकालने पर सरकारी प्रतिबंध होने के बावजूद धड़ल्ले से लाइसेंस दिए जा रहे हैं।

जंगल में 89% सलाई और 73% धावड़ा के पेड़ खराब

दायर याचिका में यह भी बताया कि डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र के 89% सलाई के पेड़ और 73% धावड़ा के पेड़ पूरी तरह खराब हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि तस्कर पेड़ों से अधिक रस निकालने के लिए कृत्रिम रसायनों (Artificial Chemicals) का उपयोग कर रहे हैं, जिससे पेड़ सूख रहे हैं। 

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केमिकल के इस्तेमाल के सबूत मिटाने जला रहे हैं पेड़

सुनवाई के दौरान यह गंभीर तथ्य भी सामने आया कि केमिकल के इस्तेमाल के सबूत मिटाने और रस की ग्रोथ बढ़ाने के लालच में कई पेड़ों को आग के हवाले किया जा रहा है। जिसमें से अधिकांश सूखने की कगार पर हैं तो कुछ सूखने लगी है। जो सूख चुके हैं, उन्हें जला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इन पेड़ों को तत्काल बचाने की गुहार लगाई।

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सरकार को कोर्ट का नोटिस, अगली सुनवाई 24 मार्च को

इस मामले में सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 24 मार्च 2026 तय की है, जिसमें राज्य सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी।

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उल्लंघन पर वन अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यदि आदेश के उल्लंघन का कोई भी मामला सामने आता है, तो संबंधित वन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। पेड़ों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही बिल्कुल न बरतें।

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