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Bhojshala Controversy Update: मध्यप्रदेश के धार के बहुचर्चित भोजशाला-सरस्वती मंदिर प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अब इस मामले की मुख्य रिट याचिका (क्रमांक 10497/2022) पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इस विशेष बेंच का नेतृत्व अधिमानतः मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा किया जाए। एएसआई महानिदेशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी किया गया व्यवस्था संबंधी आदेश (पूजा और नमाज का समय) पूर्ववत लागू रहेगा।
ASI सर्वे रिपोर्ट खुली अदालत में होगी पेशी
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की गोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया भी तय कर दी है। एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर खुले न्यायालय में पेश किया जाएगा। रिपोर्ट की कॉपी दोनों पक्षों को मुहैया कराई जाएगी।
आपत्ति दर्ज कराने दो सप्ताह अतिरिक्त समय
यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा तकनीकी कारणों से कॉपी करने योग्य नहीं है, तो विशेषज्ञों की उपस्थिति में उसके निरीक्षण की अनुमति दी जाएगी। दोनों पक्षों को रिपोर्ट पर अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय मिलेगा।
अंतिम फैसले तक भोजशाला से बदलाव नहीं
न्यायालय ने भोजशाला के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए सुरक्षात्मक रुख अपनाया है। जब तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, भोजशाला के वर्तमान स्वरूप या मूल ढांचे में कोई भी छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
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एससी ने कहा कि मेरिट पर कोई राय नहीं दी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उन्होंने इस विवाद के गुण-दोष (मेरिट) पर अपनी कोई राय नहीं दी है। सभी कानूनी पक्ष हाईकोर्ट के समक्ष अपनी दलीलें रखने के लिए स्वतंत्र हैं। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पैरवी की, जबकि हाईकोर्ट में अब अधिवक्ता विनय जोशी मामले को आगे बढ़ाएंगे।
भोजशाला का वास्तविक स्वरूप हाईकोर्ट बताएगी
धार से याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने इस निर्णय को एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति बताया है। उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा किए गए विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर अब भोजशाला के वास्तविक धार्मिक स्वरूप का निर्धारण हाईकोर्ट द्वारा किया जाएगा।
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