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MPPSC: मेडिकल ऑफिसर भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 15 दिन के अंदर दोबारा परीक्षा कराने के आदेश

MPPSC: MPPSC की ओर से निकाली गई मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सैकड़ों डॉक्टर्स को राहत दी है.

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Satya Sharma
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MPPSC: एमपीपीएससी की ओर से निकाली गई मेडिकल ऑफिसर भर्ती को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने अहम फैसला सुनाया है. जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सैकड़ों डॉक्टर्स को राहत दी है. कोर्ट की तरफ से जारी बयान में भर्ती प्रक्रिया को गड़बड़ी पूर्ण बताया गया है और पूरी प्रक्रिया को फिर से आयोजित करने के निर्देश दिए हैं.

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मेडिकल ऑफिसर भर्ती मामले में आया कोर्ट का फैसला 

हाईकोर्ट ने जांच में पाया कि 2024-25 में निकाली गई मेडिकल ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं थी. भर्ती के दौरान MPPSC ने एन वक्त पर एडिशनल रजिस्ट्रेशन का नियम जोड़ दिया, जिसके चलते कई MBBS डॉक्टर्स को इंटरव्यू से बाहर कर दिया गया था. यह भी आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों के पास उस समय रजिस्ट्रेशन नहीं था, उन्हें फोन कर इंटरव्यू से हटा दिया गया. बता दें कि इस मामलों को लेकर जो डॉक्टर प्रक्रिया को पूरी होने के बाद अचानक से बाहर हुए, उन्होंने इंदौर हाई कोर्ट में एडवोकेट तुषार सोडानी के माध्यम से एक याचिका लगाई थी.
 
हाई कोर्ट ने दिया 15 दिन में फिर से परीक्षा कराने का आदेश 

अभ्यर्थियों ने इसको लेकर प्रतिनिधिमंडल भेजा था, लेकिन विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया था. इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान “रूल ऑफ द गेम” बदले नहीं जा सकते. कोर्ट ने इस प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए MPPSC को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर फैसला लिया जाए और नई भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए. 

इंदौर हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि एडिशनल रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नियमों में नहीं है. असल आवश्यकता केवल पीजी मार्कशीट और पीजी रिजल्ट की थी. जिसे अभ्यार्थी पहले ही प्रस्तुत कर चुके थे. कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 'रूल ऑफ द गेम बीच में बदले नहीं जा सकते.' अब हाई कोर्ट की इंदौर बेच ने एमपीपीएससी को निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर सभी प्रतिनिधित्व पर निर्णय लें और नई प्रक्रिया में पात्रता सुनिश्चित करें. साथ ही भर्ती के लिए आवेदन करने वाले सभी अभ्यार्थियों को मौका दें और रिपोर्ट कोर्ट में सबमिट करें.

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