IAS Santosh Verma Controversy Update: अजाक्स के संतोष वर्मा ने फिर दिया भड़काऊ बयान, सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो 14 दिसंबर को CM हाउस का घेराव करेगा सपाक्स

IAS संतोष वर्मा के भड़काऊ बयान से विवाद फिर भड़का। सपाक्स ने FIR, गिरफ्तारी और निलंबन की मांग की। कार्रवाई न होने पर 14 दिसंबर को CM हाउस घेराव की चेतावनी दी।

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IAS Santosh Verma Controversy Update: भोपाल में IAS संतोष वर्मा से जुड़ा विवाद एक बार फिर उफान पर है। अजाक्स (अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ) के अध्यक्ष वर्मा का एक और नया और विवादित वीडियो सामने आते ही सियासी और सामाजिक संगठनों में नाराजगी फैल गई। सपाक्स (सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण समाज) ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो 14 दिसंबर को सीएम हाउस का घेराव किया जाएगा। दूसरी ओर, सपाक्स की महिला विंग ने भी वर्मा के भाषण को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

नए वीडियो में वर्मा ने क्या कहा

मंगलवार (9 दिसंबर) को वायरल हुए वीडियो में IAS संतोष वर्मा एक कार्यक्रम के दौरान कहते नजर आए कि कितने संतोष वर्मा को मारोगे, कितनों को जलाओगे, कितनों को निगल जाओगे। अब हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा और आपके पास इतनी ताकत नहीं होगी कि आप हर संतोष वर्मा को जला सको।

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हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं है। यह बयान सामने आते ही आरोप लगे कि वर्मा सामाजिक तनाव बढ़ाने वाले शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे पहले भी वे ब्राह्मण बेटी वाले विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में थे, जिस पर सरकार ने उन्हें नोटिस भेजा था।

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अपने नए विवादित वीडियो में संतोष वर्मा ने कहा- अब हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा।

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भीम आर्मी चीफ के बयान को दोहराया

विवाद की जड़ में सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद का वह बयान है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कितने संतोष वर्मा को मारोगे, हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा। इसी लाइन को संतोष वर्मा ने अपने नए भाषण में दोहराया और अपने तेवर साफ कर दिए कि वे पीछे नहीं हटने वाले।

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भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद

सपाक्स ने की कार्रवाई की मांग

नए बयान ने सपाक्स संगठन ने खुलकर विरोध किया है। राष्ट्रीय संयोजक हीरालाल त्रिवेदी ने कहा कि अगर हर घर में संतोष वर्मा पैदा होगा तो क्या हर घर की बेटी खतरे में जाएगी। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर महिला उत्पीड़न के मामले चल रहे हों और जिस पर बेटी का अपमान करने के आरोप हों, उस पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। त्रिवेदी ने साफ शब्दों में मांग की कि सरकार तुरंत वर्मा पर FIR दर्ज करे, उन्हें गिरफ्तार करे और निलंबित करे, वरना हालात और गंभीर होंगे। त्रिवेदी का कहना था कि ऐसे भाषण समाज में वर्ग संघर्ष जैसी स्थिति ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो 14 दिसंबर को CM हाउस घेराव किया जाएगा।

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सपाक्स के राष्ट्रीय संयोजक हीरालाल त्रिवेदी।

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महिला विंग ने भी जताई आपत्ति

सपाक्स संगठन महिला विंग ने भी इस बयान की तीखी आलोचना की है। प्रवक्ता वंदना द्विवेदी ने कहा कि अगर हर घर से संतोष वर्मा पैदा होगा तो हर घर से चंडी भी निकलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान विनाश की वजह बनते हैं और जो महिलाएं प्रतिकार करने उठेंगी, उनका सामना कोई नहीं कर पाएगा। वंदना का कहना था कि समाज को बांटने वाले और महिलाओं को असुरक्षित बताने वाले व्यक्ति को जीने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उनके शब्दों ने विवाद की आग को और भड़का दिया।

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सपाक्स महिला विंग प्रवक्ता वंदना द्विवेदी।

बेटी के अपमान पर कार्रवाई करने में इतना विलंब क्यों

मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है जिसने बेटी पूजन से सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत कर देश को नारी सम्मान की दिशा दिखाई थी। उन्होंने याद किया कि वर्ष 2020 में मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के दीपावली मिलन कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनकी बेटी का मंच पर पूजन कर यह परंपरा शुरू की, जिसके बाद 24 दिसंबर 2020 को इसे सभी सरकारी आयोजनों में लागू करने का आदेश जारी हुआ।

नायक के अनुसार इस पहल ने मध्यप्रदेश को लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के साथ नारी सम्मान का अग्रदूत बनाया और बाद में कई राज्यों ने इसका अनुसरण किया। उन्होंने दुख जताया कि जिस प्रदेश ने बेटियों को इतना सम्मान दिया, वहीं बेटियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने वाले अधिकारी आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई में अनुचित देरी हो रही है। नायक ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि कार्रवाई होगी, पर उसका समय पर होना जरूरी है ताकि उसकी सार्थकता बनी रहे। उन्होंने आग्रह किया कि मध्यप्रदेश इस मामले में भी कठोर और त्वरित कार्रवाई कर ऐसी नजीर पेश करे, जिसका अनुसरण अन्य प्रदेश भी करें।

कैसे शुरू हुआ विवाद

IAS संतोष वर्मा ने विवादित बयान 23 नवंबर को भोपाल में मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJAKS) के एक सम्मेलन के दौरान दिया था। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि जब तक सामाजिक समरसता पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाती और जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे या उससे रोटी-बेटी का संबंध न बना ले, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।

यह टिप्पणी सामने आते ही, पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समाज और अन्य सवर्ण संगठनों (जैसे सपाक्स) में भारी आक्रोश फैल गया। इस बयान को जातिवादी, अभद्र और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बताते हुए, जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए गए, पुतले जलाए गए और वर्मा की तत्काल बर्खास्तगी एवं गिरफ्तारी की मांग को लेकर पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई गईं।

MP Ajjaks Sammelan
अजाक्स के प्रांतीय सम्मेलन में प्रदेशभर के पदाधिकारी मौजूद रहे।

सरकार ने जारी किया कारण बताओ नोटिस

विवाद बढ़ने के बाद, सरकार ने अब तक वर्मा के खिलाफ कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि उनका बयान अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन है, जिससे सामाजिक समरसता को ठेस पहुंची है। उनसे 7 दिन के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक सरकार द्वारा उनकी बर्खास्तगी या निलंबन जैसी कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रदर्शनकारियों में रोष बना हुआ है।

सवर्ण समाज के आक्रोशित लोगों ने आईएएस संतोष वर्मा का पुतला जलाया।
संतोष वर्मा के बयान के बाद कई सवर्ण संगठनों ने पुलता जलाया था।

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मध्यप्रदेश की मंदसौर पुलिस का काला कारनामा सामने आया है। यहां की पुलिस पर 12वीं क्लास के टॉपर छात्र को बस से उठाकर NDPS एक्ट के तहत अफीम तस्करी के केस में फंसाने का आरोप है। इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने मंगलवार, 9 दिसंबर को सुनवाई की। इस दौरान मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा कोर्ट में पेश हुए और स्वीकार किया कि युवक को पकड़ने वाली पुलिस टीम मल्हारगढ़ थाने की ही थी। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके चलते पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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