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Weather Update: मौसम विभाग के वैज्ञानिकों को कैसे पता चलता है, कब होगी बारिश, कैसा रहेगा मौसम ? जानें सबकुछ

बारिश कब होगी ? मौसम कैसा रहेगा ? क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम विभाग के वैज्ञानिक कैसे सटीक भविष्यवाणी करते हैं। आखिर वे कौनसी चीजें हैं जो मदद करती हैं।

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Rahul Garhwal
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Weather Update: बारिश कब होने वाली है ? ठंड कितनी तेज पड़ने वाली है ? कोहरा रहेगा या नहीं ? इन सभी सवालों के जवाब मौसम विभाग के पास होते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि मौसम विभाग के वैज्ञानिक मौसम की सटीक भविष्यवाणी कैसे करते हैं।

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कैसे होती है मौसम की भविष्यवाणी ?

भारतीय मौसम विभाग भोपाल के हेड अजय सिंह ने कहा कि यह काफी कॉम्प्लिकेटेड साइंस है। और हमारे इंडिया में आपको सरफेस ऑब्जरवेटरी है, अपर एयर ऑब्जरवेटरी है। डॉपर वैदर रडार का नेटवर्क है और इसके अलावा ह्यूमन इनपुट्स भी इसमें आते हैं। हमारे सेटेलाइट नेटवर्क भी अवेलेबल है। इन सबके कंबाइड इफेक्ट से हम फिर डाटा को एनालिसिस करते हैं। डाटा को एनालिसिस करते हैं और उसी के बेसिस पर हम मौसम की भविष्यवाणी करते हैं।

टेक्नोलॉजी बढ़ने से मौसम की सटीक भविष्यवाणी

IMD भोपाल के हेड अजय सिंह ने कहा कि जैसे-जैसे साइंस में डेवलपमेंट हुआ है। टेक्नोलॉजी चेंज हुई है। जब हमारे डिपार्टमेंट की शुरुआत हुई थी। तब हमारे पास सरफेस ऑब्जर्बेशन होते थे। ह्यूमन इनपुट्स होते थे। उसके आधार पर फोरकास्ट देते थे। लेकिन 1875 की टेक्नोलॉजी अलग थी, साइंस अलग था। अब काफी डेवलपमेंट इसमें हो चुका है। धीरे-धीरे अपर एयर ऑब्जर्वेशन के नेटवर्क भी शुरू हो गए। वैदर रडार एक्जिसटेंस में आने लगे। जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी अपग्रेड होती गई। हमने अपने आप को अपग्रेड किया। मौसम की भविष्यवाणी में सुधार आता गया।

लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से हर 15 मिनट में मिल रहा डाटा

IMD भोपाल के हेड अजय सिंह ने कहा कि 1950 के करीब हमारे पास सिर्फ एक कन्वेंशनल रडार हुआ करता था। लेकिन अब हमने स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी, डॉपलर वैदर रडार का नेटवर्क पूरे इंडिया में इस्टैब्लिश कर दिया है। अब हमारे पास डॉपलर सिंपल वैदर रडार थे। अब हमारे पास सिंगल पोलराइज डॉपलर रडार आए। अब हमारे पास ड्यूल पोलराइज डॉपलर वैदर रडार नेटवर्क भी आ गए।

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टेक्नोलॉजी इतनी अपग्रेड हो चुकी है। पहले हमारे पास सरफेस ऑब्जरवेशन के 3-3 घंटे में डाटा आया करता था। लेकिन अब लेटेस्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग करके 15-15 मिनट पर सरफेस ऑब्जरवेटी का डाटा लेना शुरू कर दिया है।

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छोटी से छोटी वैदर रिलेटेड फिनोमा पकड़ते हैं सेटेलाइट्स

IMD भोपाल के हेड अजय सिंह ने कहा कि अपर एयर में हमारे एसेट इतने एक्यूरेट हो चुके हैं कि अप टू 40 किलोमीटर हम आराम से अपर एयर के वैदर का पैरामीटर GPS टेक्नोलॉजी से मेजर कर रहे हैं। सेटेलाइट नेटवर्क में ISRO ने काफी योगदान दिया है। वैदर सेटेलाइट्स छोटी से छोटी वैदर रिलेटेड फिनोमा को पकड़ने में सक्षम है।

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अगले 10 सालों में और भी एक्यूरेट होगा वैदर फॉरकास्ट

IMD भोपाल के हेड अजय सिंह ने कहा कि हमने सुपर कंप्यूटिंग को एडप्ट कर लिया है। हमारे पास वॉल्यूमिनस डाटा है। डाटा इतना है कि सुपर कंप्यूटर भी सफिशिएंट नहीं हो पा रहे हैं। हम इससे भी आगे बढ़ने को सोच रहे हैं। जब क्वांटम कंप्यूटर की टेक्नोलॉजी आ जाएगी तो उसे भी एक्सेप्ट अगले 10 सालों में और भी एक्यूरेट तरीके से हम वैदर फॉरकास्ट करेंगे।

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