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एमपी में स्वच्छ जल अभियान का शंखनाद: अब रोबोट खोजेंगे लीकेज, हर मंगलवार होगी 'जल सुनवाई'

MP Clean Water Campaign launched: इंदौर में जहरीले पानी से 20 मौतों के बाद शनिवार, 10 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वच्छ जल अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया।

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sanjay warude
MP Clean Water Campaign launched

MP Clean Water Campaign launched: इंदौर में जहरीले पानी से 20 मौतों के बाद शनिवार, 10 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वच्छ जल अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब रोबोट लीकेज खोजेंगे। हर मंगलवार जल सुनवाई आयोजित की जाएगी। अभियान को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा। दूसरा चरण 1 मार्च से 31 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री प्रहलाद पटेल मौजूद रहे।

जल दूषित मिले तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करें

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से स्पष्ट किया कि घर-घर साफ जल पहुंचाना हमारी सामूहिक ​जवाबदारी है। किसी भी स्थिति में दूषिज पेयजल सप्लाई नहीं होना चाहिए। यदि जल दूषित पाया जाता है, तो तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सभी पेयजल स्त्रोतों की गुणवत्ता और एसटीपी की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।

पाइप लाइनों की जीआईएस से होगी मैपिंग

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता आधुनिक तकनीक का उपयोग है। पाइप लाइनों में दूषित पानी को मिलने से रोकने के लिए विभाग जीआईएस भौगोलिक सूचना प्रणाली मैपिंग का सहारा लिया जाएगा।

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ऐसे रोकेंगे लीकेज, करेंगे टैंक सफाई

प्रदेशभर में किसी भी क्षेत्र में पेयजल पाइप लाइनों में लीकेज और इंटर पॉइंट सेक्शन की जांच के लिए रोबोट का उपयोग किया जाएगा।

मध्यप्रदेश के सभी पेयजल के सभी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और टंकियों की सफाई की निगरानी जीआईएस मैप आधारित एप के जरिए की जाएगी।

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सीवेज और वॉटर पाइप लाइन की अलग-अलग मैपिंग कर उनके क्रॉस कनेक्शन वाले संवेदनशील बिंदुओं को चिहिृनत किया जाएगा।

अब आम जनता को पेयजल संबंधी समस्याओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। हर मंगलवार जिला और निकाय स्तर पर जल सुनवाई आयोजित की जाएगी।

पेयजल संबंधी शिकायतों को दर्ज करने के लिए 181 की विशेष व्यवस्था की गई है। टाइम लाइन से निराकरण कर आवेदन को इसकी सूचना दी जाएगी।

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