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MP Bank Strike: श्रमिक कानून लागू करने समेत कई मांगों को लेकर केंद्रीय श्रमिक संगठनों का देशव्यापी बंद का मिलाजुला असर देखने को मिला। मध्यप्रदेश में खास तौर से केंद्रीय बैंकों और बीमा कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा। भोपाल में में प्रेस कॉम्पलेक्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक के सामने यूनियंस के कार्यकर्ता और लीडर्स ने रैली निकालकर आवाज बुलंद की। अपनी मांगों का पोस्टर और बैनर के साथ प्रदर्शन किया। साथ ही केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि जल्द उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो फिर देशव्यापी हड़ताल के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
हड़ताल में 25 करोड़ से ज्यादा कामगार शामिल हुए
ट्रेड यूनियंस ने देशभर में 25 करोड़ से ज्यादा श्रमिक संगठनों के कामगारों के शामिल होने का दावा किया है। इनमें इंटक, एटक, एचएमएस,सीटू, एआईयूटीयूसी, सेवा तथा बैंक, बीमा, बीएसएनएल, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एवं अन्य संस्थानों की ट्रेड यूनियनों से जुड़े कामगार कर्मचारी एवं अधिकारी शामिल हुए।
साथ ही ट्रेड यूनियंस का कहना है कि हड़ताल के कारण बैंक, बीमा, डाक, आयकर, सामान्य बीमा, बीएसएनएल, आगनबाड़ी, कोयला, परिवहन, तेल, पोर्ट, विमानन, एवं अन्य संस्थानों के कार्यालयों में कामकाज ठप रहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि संख्या की दृष्टि से यह विश्व की सबसे बड़ी हड़ताल है। यह हड़ताल मुख्य रूप से उन मुद्दों पर केंद्रित है जिनसे देश की जनता, हर ट्रेड यूनियन एवं कामगार प्रभावित होता है।
हड़ताली संगठनों की मुख्य मांगें
चारों श्रम संहिताओं/ लेबर कोड्स को खत्म करो
असंगठित क्षेत्र के मजदूरों, अनुबंध मजदूरों और योजना मजदूरों सहित सभी मजदूरों के लिए 26,000 रुपए प्रति माह का राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय हो।
किसी भी रूप में काम का आकस्मिककरण जैसे- फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट (निश्चित अवधि का रोजगार), आउट सोर्स, अप्रेंटिसशिप, प्रशिक्षु आदि विभिन्न योजनाओं और बहानों के तहत न किया जाए। ठेका कर्मियों के लिए समान कार्य के लिए समान वेतन तुरंत लागू किया जाए।
असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कृषि क्षेत्र के कामगारों सहित सभी श्रेणियों के कामगारों के लिए न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपए प्रतिमाह और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। घर से काम करने वाले कामगार, फेरीवाले, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामगार, निर्माण कामगार, प्रवासी कामगार, योजना कामगार, कृषि कामगार, दुकान/प्रतिष्ठानों में काम करने वाले, लोडिंग/अनलोडिंग कामगार, गिग वर्कर्स, नमक-कड़ाही कामगार, बीड़ी कामगार, ताड़ी निकालने वाले, रिक्शा चालक, ऑटो-रिक्शा-टैक्सी चालक, प्रवासी कामगार, मछली पकड़ने वाले समुदाय आदि जैसे कामगारों को पंजीकृत किया जाए और उन्हें पेंशन सहित व्यापक सामाजिक सुरक्षा में पोर्टेबिलिटी दी जाए।
पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए। एनपीएस और यूपीएस खत्म हो।
बोनस, भविष्य निधि के भुगतान और पात्रता पर सभी अधिकतम सीमाएं हटाई जाएं और ग्रेच्युटी की राशि बढ़ाई जाए।
आवेदन प्रस्तुत करने की तिथि से 45 दिनों के अंदर ट्रेड यूनियनों का अनिवार्य पंजीकरण हो; अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के कन्वेंशन सी-87 और सी-98 का तत्काल अनुसमर्थन हो।
मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण करें, खाद्यान्न, दवाइयां, कृषि-इनपुट और मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी हटाएं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस पर केन्द्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कमी करें। खाद्य सुरक्षा की गारंटी दें और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाएं।
सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों का निजीकरण बंद किया जाए। राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को खत्म किया जाए। खनिजों और धातुओं के खनन पर मौजूदा कानून में संशोधन हो और स्थानीय समुदायों, खासकर आदिवासियों और किसानों के उत्थान के लिए कोयला खदानों सहित खदानों से होने वाले मुनाफे में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।
सभी कृषि उपजों के लिए सी-2+50 प्रतिशत की दर से एमएसपी (MSP) की गारंटी के साथ खरीद की जाए। कानूनी गारंटी के साथ बीज, उर्वरक और बिजली आदि पर किसानों को दी जाने वाली इनपुट सब्सिडी में वृद्धि की जाए। व्यापक ऋण माफी और फसल बीमा योजनाएं हों। केन्द्र सरकार द्वारा एसकेएम को दिए गए लिखित आश्वासनों को लागू करें, जिसके आधार पर ऐतिहासिक किसान संघर्ष स्थगित किया गया था।
बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 वापस लिया जाए। बिजली का निजीकरण बंद हो। प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएं।
काम करने के अधिकार को मौलिक बनाया जाए। स्वीकृत पदों को भरें और बेरोजगारों के लिए रोजगार पैदा किए जाएं। मनरेगा (प्रति वर्ष 200 दिन और 600 रुपए प्रतिदिन मजदूरी के साथ) का विस्तार करें और उसे लागू करें। साथ शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम लागू करें।
सभी के लिए मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता के अधिकार की गारंटी दी जाए। नई शिक्षा नीति, 2020 को रद्द किया जाए। सभी के लिए आवास सुनिश्चित किया जाए।
वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का सख्ती से क्रियान्वयनय हो, वन (संरक्षण) अधिनियम, 2023 और जैव-विविधता अधिनियम तथा नियमों में संशोधन वापस लिया जाए, जो केन्द्र सरकार को निवासियों को सूचित किए बिना ही वनों की कटाई की अनुमति देता है। जोतने वाले को भूमि सुनिश्चित करें।
कल्याण कोष से अंशदान के साथ निर्माण मजदूरों को ईएसआई कवरेज दें, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी मजदूरों को स्वास्थ्य योजनाओं, मातृत्व हितलाभ, जीवन और विकलांगता बीमा का कवरेज भी दें। घरेलू मजदूरों और गृह-आधारित मजदूरों पर आईएलओ कन्वेंशनों की पुष्टि करें और उचित कानून बनाएं। प्रवासी मजदूरों पर व्यापक नीति बनाएं, मौजूदा नीतियों को मजबूत करें अंतर-राज्यीय प्रवासी कर्मकार (रोजगार विनियमन) अधिनियम, 1979 उनके सामाजिक सुरक्षा कवर की पोर्टेबिलिटी प्रदान करें।
अति धनवानों पर कर लगाएं: कार्पोरेट कर में वृद्धि करें, सम्पत्ति कर और उत्तराधिकार कर को पुनः लागू करें।
संविधान के मूल मूल्यों: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, विविध संस्कृतियों, भाषाओं, कानून के समक्ष समानता और देश के संघीय ढांचे आदि पर हमले बंद करें।
भाेपाल में रैली निकालकर आमसभा की
राजधानी भोपाल में बैंक, बीमा, डाक, बीएसएनएल विभाग, एटक, सीटू ,एआईयूटीयूसी, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव एवं अन्य संस्थानों की ट्रेड यूनियनों के हजारों कामगार एवं कर्मचारी रंग-बिरंगे बैनर, पोस्टर, प्ले कार्ड्स एवं कलरफुल ड्रेस के साथ गुरुवार, 12 फरवरी को प्रेस कांप्लेक्स स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शाखा के सामने एकत्रित हुए।
उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद करीब 2000 से ज्यादा हड़ताली कर्मियों की रैली प्रारंभ हुई। रैली में लोग नारे लगाते हुए चल रहे थे। अधिकांश लोग लाल रंग की टीशर्ट पहने हुए थे । उनके हाथों में प्ले कार्ड्स एवं संगठन की झंडियां थीं। इस कारण रैली कलरफुल एवं इंकलाबी नजर आ रही थी। रैली में महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी थी। रैली पंजाब नेशनल बैंक की शाखा से प्रारंभ हुई और वहीं आकर एक सभा में परिवर्तित हो गई।
सभा को हड़ताली संगठनों के पदाधिकारियों साथी वीके शर्मा, एसएस मोर्या, प्रमोद प्रधान, विनोद लोगरिया, नजीर कुरैशी, संजय मिश्रा, भूषण भट्टाचार्य,आर ए शर्मा, यशवंत पुरोहित, दीपक रत्न शर्मा,पूषण भट्टाचार्य, ए परसाई, शैलेंद्र कुमार शैली, संजय कुदेशिया, शैलेंद्र शर्मा आदि ने संबोधित किया।
हड़ताल के कारण बैंकों में कामकाज ठप
इन यूनियन लीडर्स ने कहा कि जब सरकार जन, श्रम एवं किसान विरोधी नीतियों के माध्यम से आमजन पर लगातार आक्रमण कर रही हो, कामगार और किसान वर्ग का दुख-दर्द गहराता जा रहा हो, अर्थव्यवस्था सबसे निचले स्तर पर हो, जनता की भलाई के लिए सरकार यथार्थवादी नीतियों को लागू करने में हिचकिचा रही हो, कामगार वर्ग की समस्याओं की भी सुनवाई नहीं हो रही हो, बेरोजगारी चरम सीमा पर हो एवं रोजगार घट रहे हों, लगातार सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों एवं ट्रेड यूनियनों पर हमले हो रहे हों, यह आवश्यक रूप से आंदोलन का रूप धारण करेगा तथा उसका स्तर और तीव्रता भी उच्च होगी।
यूनियन लीडर्स ने दावा किया है कि हिंदुस्तान के इतिहास में यह विश्व की सबसे बड़ी हड़ताल होगी। उन्होंने कहा जनता पर प्रहार करने वालों पर प्रहार करो, सरकार के अत्याचारों को रोकने के लिए हड़तालों से आक्रमण करो।
मध्य प्रदेश बैंक एंप्लाईज एसोसिएशन के महासचिव वीके शर्मा ने बताया कि बैंकिंग उद्योग की यूनियनें- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, बैंक एम्पलाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने केंद्रीय श्रमिक संगठनों की मांगों का समर्थन करते हुए देशव्यापी आम हड़ताल में भाग लिया। हड़ताल के कारण बैंकों में कामकाज ठप रहा।
कामगारों की यह मांगे भी
हड़ताल के दौरान वित्तीय संस्थानों की ट्रेड यूनियंस द्वारा बैंक एवं वित्तीय संस्थानों के कामगारों की निम्न मांगों को सरकार के ध्यान में लाया गया ।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों को मजबूत करो।
निजीकरण और विनिवेश पर रोक लगाओ
बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश पर रोक लगाओ
सार्वजनिक सामान्य बीमा कंपनियों का एकीकरण करो
पर्याप्त नई भर्तियों करो।
आउटसोर्सिंग व ठेका प्रथा पर रोक लगाओ
एनपीएस हटाकर पुरानी पेंशन योजना लागू करो
कारपोरेट से बकाया ऋण वसूली के लिए सख्त कार्यवाही करो।
आम ग्राहकों पर सेवा शुल्क में कमी करो
चार नई श्रम संहिताओं/लेबर कोड्स को वापस लो
ट्रेड यूनियन अधिकारों में हस्तक्षेप बंद करो
आईडीबीआई बैंक को बेचने का निर्णय वापस लो, आदि मजदूरों की आज की इस देशव्यापी हड़ताल में बैंक, बीमा , केंद्रीय कर्मचारी, पोस्टल, टेलीफोन, एनएफएल, भेल, परिवहन, ऑटो चालक, खेतिहर मजदूर, हम्माल, पल्लेदार, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, आंगनवाड़ी, आशा-उषा वर्कर्स, स्कीम वर्कर्स, संविदा कर्मी, ट्रांसपोर्ट वर्कर्स आदि से संबंधित करीब 5 लाख मजदूर, कामगार, कर्मचारी, अधिकारियों के शामिल होने के कारण इन जगह कामकाज ठप रहा।
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यूनियंस की सरकार को चेतावनी
वक्ताओं ने केंद्र सरकार को आगाह किया की मांगे ना माने जाने की स्थिति में आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा जिसमें धरना, प्रदर्शन ,सभाओं के अलावा देशव्यापी हड़ताल भी शामिल है।
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