भोपाल लिटरेचर और आर्ट फेस्टिवल: पूर्व राजदूत मंजीत सिंह पुरी बोले पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोदी में नहीं बैठता

Bhopal Litrature and Art Festival: भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल बीएलएफ के दूसरे दिन एक सत्र में पूर्व राजदूत मंजीत सिंह पुरी ने कहा कि पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोद में नहीं बैठता। भारत हाई टेबल पर बैठने वाला देश है।

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Bhopal Litrature and Art Festival: भोपाल लिटरेचर एंड आर्ट फेस्टिवल बीएलएफ के दूसरे दिन भारत भवन में साहित्य, कला, विचार और संगीत का संगम देखने को मिला। दिनभर अलग अलग विषयों पर सत्र हुए, जिनमें कूटनीति और संस्कृति समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। शाम होते होते सूफी संगीत ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक रंग दे दिया।  तीन दिवसीय इस ‘नॉलेज के महाकुंभ’ में दिनभर विचारों का मंथन चलता रहा, तो शाम होते होते भावनाओं और अध्यात्म से जुड़ी सूफियाना रंगत ने पूरे वातावरण को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। कला और साहित्य पर केंद्रित विविध सत्रों के बीच जब सूर्यास्त की लालिमा घुलने लगी, तब बहिरंग में सजी सूफी शाम ने BLF को सुरों की इबादत में बदल दिया। 

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पाकिस्तान पर सख्त बयान

ऑपरेशन सिंदूर एंड पाकिस्तान द अनटोल्ड स्टोरी विषय पर हुए सत्र में पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन और मंजीत सिंह पुरी ने भारत की कूटनीति पर बात की। मंजीव सिंह पुरी ने कहा कि पहलगाम हमला भारत के सामाजिक ताने बाने को तोड़ने की साजिश थी। उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान की तरह भारत किसी की गोद में नहीं बैठता। भारत हाई टेबल पर बैठने वाला देश है। सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि पाकिस्तान झूठे नैरेटिव और फेक न्यूज के जरिए भ्रम फैलाता है, लेकिन भारत आज वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति में है।

PoK पर चर्चा

वागर्थ सभागार में आयोजित इस विशेष सत्र में पाक अधिकृत कश्मीर के इतिहास और कूटनीति पर सत्र हुआ। राघवेन्द्र सिंह और सैयद अकबरुद्दीन ने बताया कि यह सिर्फ जमीन का विवाद नहीं बल्कि रणनीति और राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला है। युवाओं से कहा गया कि वे इतिहास को समझें और सवाल पूछें।

शिव को बताया आदर्श पति

प्रशांत दीक्षित ने अपनी पुस्तक आदिदेव पर आधारित सत्र में कहा कि शिव पार्वती को बराबरी का सम्मान देते हैं। उन्होंने शिव को सर्वश्रेष्ठ पति और प्रेमी बताया जो प्रेम, समर्पण और समानता का प्रतीक हैं। जनरल जोरावर सिंह की वीरता कर्नल अजय रैना और लेफ्टिनेंट कर्नल अंशुमन अग्रहरी ने जनरल जोरावर सिंह के जीवन संघर्ष और साहस पर बात की। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास और अनुशासन का संदेश दिया।

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संस्कृति से बनेगा बेहतर समाज

प्रभात तिवारी ने कहा कि स्थानीय संस्कृति समाज की पहचान होती है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश के जनजातीय कलाकारों को पद्मश्री जैसे सम्मान मिले हैं। इससे साबित होता है कि लोक कला को सही मंच मिले तो वह राष्ट्रीय पहचान बना सकती है। वहीं एक अन्य सत्र में डॉ प्रशांत कुमार पोनुगोटी ने कहा कि आज हमारे व्यवहार, पसंद और फैसले ALGORITHM से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने डिजिटल गवर्नेंस और ARTIFICIAL INTELIGENCE पर अपनी चिंताएं जताई।

अभिमन्यु: महाभारत का सबसे करुण और प्रेरक नायक

तीसरा सत्र ‘वागार्थ’ में “इंक्रेडिबल स्टोरी ऑफ अभिमन्यु: सन ऑफ अर्जुन” विषय पर संपन्न हुआ। इस सत्र की मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका अनुजा चंद्रमौली रहीं।सत्र का संचालन अनीता सरमा एवं भाव्या सिंह ने संयुक्त रूप से किया।  लेखिका अनुजा चंद्रमौली ने कहा कि अभिमन्यु महाभारत का सबसे भावनात्मक और प्रेरक पात्र है। उनका जीवन छोटा था लेकिन प्रभावशाली रहा।

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शाम-ए-कलाम म्यूजिकल कंसर्ट

इस संगीतमय संध्या में कबीर, मीरा, बाबा बुल्लेशाह, बाबा फरीद, अमीर खुसरो और नजीर अकबराबादी जैसे संत-कवियों के कालजयी कलामों को सुरों की माला में पिरोकर प्रस्तुत किया गया। और लोकप्रिय ‘जुगनी’ गीत की मनभावन प्रस्तुति पर श्रोताओं की तालियों ने कलाकारों का न सिर्फ उत्साह बढ़ा दियाबल्कि संगीत ने लोगों को भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ा

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अन्य सत्रों में की गई बातें 

अनकहे शब्द सत्र में युवाओं के रिश्तों, आत्म प्रेम और मानसिक संघर्ष पर खुलकर बात हुई। वक्ताओं ने भावनाओं को स्वीकार करने पर जोर दिया।
इंडियाज ट्रबल्ड ईस्टर्न नेबरहुड सत्र में बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार से भारत के रिश्तों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारत को संतुलित रणनीति अपनानी होगी।
आई ऐम नॉट फ्रॉम द लेफ्ट ऑर द राइट आई ऐम फ्रॉम द हिस्ट्री विंग सत्र में आभास मालदहियार ने कहा कि वे किसी विचारधारा से नहीं बल्कि इतिहास से जुड़े हैं। उन्होंने भारत नाम की उत्पत्ति और भारतीय दर्शन पर रोचक तथ्य बताए।
द अयोध्या एलायंस एंड द 7000 ईयर ओल्ड सीक्रेट सत्र में अश्विन सांघी ने बताया कि रामायण के सौ से ज्यादा संस्करण दुनिया भर में मौजूद हैं। उन्होंने इतिहास को नए नजरिए से देखने की बात कही।
सत्र ज़ेन और राजनीतिक रूप से अस्थिर समय में प्रेम की कला में शबनम मिनवाला ने अपने उपन्यास ज़ेन पर बात करते हुए टीनएज प्रेम और दो समय रेखाओं की कहानी साझा की।

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