Bhopal Pension Scam: भोपाल में सरकारी पेंशन खातों में बड़ा घोटाला, बैंक कर्मचारियों ने 212 खातों से उड़ाए 44 लाख रुपए, 7 लोगों पर केस दर्ज

भोपाल में बड़ी बैंकिंग धांधली उजागर हुई। बैंक कर्मचारियों ने 212 निष्क्रिय खातों को अवैध तरीके से सक्रिय कर एटीएम से 44 लाख रुपए निकाल लिए।

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Bhopal Pension Scam:भोपाल में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के खातों से की गई बड़ी बैंकिंग हेराफेरी का पर्दाफाश हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने बैंक ऑफ इंडिया की सैफिया कॉलेज शाखा से जुड़े सात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि कर्मचारियों ने फिनैकल सिस्टम का दुरुपयोग कर 212 निष्क्रिय खातों को नियमों के खिलाफ सक्रिय किया और तीन साल में एटीएम के जरिए 44.11 लाख रुपए निकाल लिए। यह पूरा खेल जनवरी 2016 से मार्च 2019 के बीच चलता रहा।

कैसे खुली धोखाधड़ी की परतें

मार्च 2019 में भगवती देवी नाम की महिला ने अपने मृत पति के खाते से अवैध निकासी की शिकायत दी। यहीं से मामला खुलना शुरू हुआ। बैंक की शुरुआती जांच में ट्रांजैक्शन दो कर्मचारियों विशेष सहायक दीपक जैन और स्टाफ क्लर्क अजय सिंह परिहार से जुड़े मिले। इसके बाद बैंक विजिलेंस और ईओडब्ल्यू (EOW ) की जांच में पता चला कि दोनों ने विभागीय मानकों को नजरअंदाज कर निष्क्रिय खातों को अपने स्तर पर एक्टिव किया और एंट्री तथा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी खुद ही पूरी कर ली।

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मामला तब शुरू हुआ जब मार्च 2019 में भगवती देवी नाम की महिला ने अपने मृत पति के खाते से अवैध निकासी की शिकायत दी।

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फिनैकल सिस्टम से किया गया खिलवाड़

जांच में यह सामने आया कि फिनैकल लॉग और ऑडिट ट्रेल में कई ऐसे एंट्री रिकॉर्ड मिले जो स्पष्ट करते हैं कि खातों को अवैध तरीके से एक्टिव किया गया था। 212 खातों में से 64 खाते तो सीधे सहकर्मियों की आईडी का दुरुपयोग कर दीपक जैन ने सक्रिय किए। इन खातों का उपयोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राहत राशि को दूसरे खातों में भेजने के लिए किया गया।

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यह धोखाधड़ी बैंक ऑफ इंडिया की सैफिया कॉलेज शाखा में की गई।

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राशि कैसे पहुंची आरोपियों तक

पैसा चार परिचितों खुशबू खान, कल्पना जैन, ललिता ठाकुर और अफरोज खान के खातों में ट्रांसफर किया गया। इन खातों के एटीएम कार्ड दीपक जैन के पास थे, जिससे वह रकम निकालता रहा। निकाली गई राशि को 70 और 30 के अनुपात में बांटने का खुलासा भी हुआ। सीसीटीवी फुटेज, एटीएम निकासी रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री ने इस पूरी हेराफेरी को पुष्ट कर दिया।

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी पता चला कि दीपक जैन और उनकी पत्नी हेमलता जैन के खातों में अचानक बड़ी रकम जमा हुई। अजय परिहार के खातों में भी असामान्य लेनदेन मिले, जो गड़बड़ी के सीधे संकेत थे। बैंक की एसओपी (SOP) और सुपरवाइजरी कंट्रोल का घोर उल्लंघन इस केस को और गंभीर बनाता है।

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कौन-कौन हुए नामजद

जांच में पुख्ता सबूत मिलने पर ईओडब्ल्यू ने सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें दीपक जैन, अजय सिंह परिहार, खुशबू खान, अफरोज खान, ललिता ठाकुर, कल्पना जैन और हेमलता जैन शामिल हैं। सभी पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक साजिश, पहचान और डेटा के दुरुपयोग तथा साइबर फ्रॉड की धाराएं लगाई गई हैं।

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मध्यप्रदेश की मंदसौर पुलिस का काला कारनामा सामने आया है। यहां की पुलिस पर 12वीं क्लास के टॉपर छात्र को बस से उठाकर NDPS एक्ट के तहत अफीम तस्करी के केस में फंसाने का आरोप है। इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने मंगलवार, 9 दिसंबर को सुनवाई की। इस दौरान मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा कोर्ट में पेश हुए और स्वीकार किया कि युवक को पकड़ने वाली पुलिस टीम मल्हारगढ़ थाने की ही थी। उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में निर्धारित जांच प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसके चलते पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।

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