यात्रियों की जान से खिलवाड़: प्लेटफॉर्म खाली, अशोकनगर स्टेशन पर मेन लाइन पर आई पैसेंजर ट्रेन, पैदल पार किया ट्रैक

अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर मालगाड़ी के पहिए में आग लगने से प्लेटफॉर्म बंद हुआ, पैसेंजर ट्रेन मेन लाइन पर रोकी गई और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ी।

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Ashoknagar Railway News: जरा सोचिए कि आप रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर खड़े हैं और सामने से आ रही पैसेंजर ट्रेन प्लेटफॉर्म की बजाय मेन लाइन पर आकर रुक जाती है। उसी वक्त अनाउंसमेंट होता है कि यात्री पटरी पार न करें, पैदल पुल का उपयोग करें। ऐसा ही हाल मध्य प्रदेश के अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहां यात्रियों को न सिर्फ भारी परेशानी झेलनी पड़ी, बल्कि उनकी सुरक्षा भी सवालों में आ गई।

मालगाड़ी में आग से ब्लॉक हुआ प्लेटफॉर्म

घटना की वजह कोयला लेकर जा रही एक मालगाड़ी बनी। बताया जा रहा है कि मालगाड़ी के एक पहिए में हॉट एक्सल की वजह से आग लग गई। इस आगजनी के चलते प्लेटफॉर्म नंबर 1 की लाइन पूरी तरह ब्लॉक हो गई। रेलवे कर्मचारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक यात्री ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो चुकी थी।

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मेन लाइन पर लाई गई पैसेंजर ट्रेन

प्लेटफॉर्म की लाइन खाली न होने के कारण लेट हो रही पैसेंजर ट्रेन को मजबूरी में मेन लाइन पर लाना पड़ा। आमतौर पर मेन लाइन पर ट्रेनों का ठहराव नहीं होता, लेकिन ट्रैक खाली नहीं होने के चलते रेलवे ने यह फैसला लिया। इससे ट्रेन में सवार यात्रियों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई।

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पटरी पर उतरने को मजबूर हुए यात्री

मेन लाइन पर ट्रेन रुकते ही यात्रियों को उतरने और चढ़ने के लिए पटरियों का सहारा लेना पड़ा। न तो प्लेटफॉर्म की ऊंचाई थी और न ही सुरक्षित रास्ता। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे ट्रेन से उतरकर पटरी पर खड़े नजर आए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यात्रियों को करीब आधे घंटे तक पटरियों पर ही इंतजार करना पड़ा।

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खाली पटरी पर दूसरी ट्रेन का डर

इस दौरान यात्रियों में डर और असमंजस की स्थिति बनी रही। कई लोग बार-बार आसपास की पटरियों की ओर देखते रहे कि कहीं दूसरी ट्रेन तो नहीं आ रही। अनाउंसमेंट में बार-बार पटरी पार न करने की चेतावनी दी जा रही थी, जबकि हकीकत यह थी कि यात्रियों को मजबूरी में पटरियों पर चलना पड़ रहा था।

रेलवे की ओर से असुविधा के लिए खेद का अनाउंसमेंट तो होता रहा, लेकिन मौके पर सुरक्षा के ठोस इंतजाम नजर नहीं आए। यात्रियों का कहना था कि ऐसी स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था या अस्थायी प्लेटफॉर्म की जरूरत थी।

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