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Bondi Beach Shooting: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित बोंडी बीच फायरिंग की घटना में जिस शख्स ने अपनी जान जोखिम में डालकर कथित हमलावर से बंदूक छीन ली, वह आज दुनिया भर में मानवता और साहस की मिसाल बन चुका है। अहमद अल-अहमद (Ahmed al-Ahmed) की बहादुरी को लेकर अब उनके परिवार ने बताया है कि उन्होंने यह कदम किसी शोहरत के लिए नहीं, बल्कि “अंतरात्मा की आवाज” पर उठाया।
परिजनों के मुताबिक, 43 वर्षीय अहमद अल-अहमद उस वक्त बोंडी बीच पर एक दोस्त के साथ कॉफी पी रहे थे, जब यहूदी त्योहार हनुक्का के दौरान अचानक गोलियों की आवाजें गूंजने लगीं। वहां मौजूद करीब 2000 लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही कथित हमलावर का गोला-बारूद खत्म हुआ, अहमद ने उस पर झपट्टा मारा और उससे बंदूक छीन ली। इस दौरान उन्हें कंधे में 4 से 5 गोलियां लगीं।
परिवार ने क्या कहा
अहमद के चचेरे भाई जोजाय ने बताया कि वे गंभीर लेकिन स्थिर हालत में सिडनी के सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती हैं और कई सर्जरी हो चुकी हैं। एक अन्य रिश्तेदार मुस्तफा अल-असाद ने कहा, “यह कोई बहादुरी दिखाने का क्षण नहीं था, बल्कि एक मानवीय कर्तव्य था। वे लोगों को मरते नहीं देख सकते थे।”
नेताओं ने बताया ‘रियल लाइफ हीरो’
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़, न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिन्स और अमेरिका के राष्ट्रपति तक ने अहमद की बहादुरी की सराहना की है। प्रीमियर मिन्स ने उन्हें “रियल लाइफ हीरो” बताया, जिनकी वजह से कई जानें बच सकीं।
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सीरियाई मूल, ऑस्ट्रेलियाई नागरिक
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सीरिया के इदलिब शहर से ताल्लुक रखने वाले अहमद 2006 में ऑस्ट्रेलिया आए थे और अब दो बेटियों के पिता हैं। उनके माता-पिता हाल ही में सीरिया से सिडनी पहुंचे थे। पिता ने कहा, “मेरा बेटा किसी की जाति, धर्म या राष्ट्रीयता नहीं देखता। वह सिर्फ इंसानियत देखता है।”
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मुस्लिम समुदाय के लिए संदेश
इस घटना के बाद ऑस्ट्रेलियाई मुस्लिम और सीरियाई समुदाय ने गर्व जताया है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि अहमद की बहादुरी यह साबित करती है कि इस्लाम शांति और मानवता का धर्म है।
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