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Stray Dog Case: SC की नसीहत-आवारा कुत्तों को अपने घर ले जाएं डॉग लवर्स, कुत्तों के हमले पर राज्य सरकारों को मुआवजा देना होगा

आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकते और पालतू कुत्ता रखने के लिए लाइसेंस जरूरी है। कोर्ट ने डॉग फीडर्स, पशु प्रेमियों, केंद्र और राज्य सरकारों को ABC नियम लागू न करने पर कड़ी फटकार लगाई।

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Shaurya Verma
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Stray Dog Supreme Court Order: आवारा कुत्तों मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को ABC नियम लागू न करने पर कड़ी फटकार लगाई। बेंच ने साफ कहा कि आवारा कुत्ते (Stray Dog) किसी की निजी संपत्ति नहीं है। अगर किसी को पालतू कुत्ता रखना ही है तो उन्हें इसके लिए लाइसेंस लेने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कुत्तों को खाना खिलाने वालों को भी कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यदि कुत्तों के काटने या उनसे मौत जैसी घटनाएं होती हैं तो उनकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

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बेंच ने कहा कि कुत्तों को अपने घर ले जाकर रखें, उन्हें सड़कों पर घूमने और लोगों को काटने या दौड़ाने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कुत्ते के काटने का असर जीवनभर रहता है।

आवारा कुत्तों पर कोर्ट की साफ राय

मंगलवार को सुनवाई के दौरान SC की बेंच ने कहा कि सड़कों पर घूमने वाले कुत्ते  किसी व्यक्ति, समूह या सोसाइटी के नहीं हो सकते। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों को पालने का दावा करने वालों को ये समझाना होगा कि सार्वजनिक जगहों पर उनकी मौजूदगी से आम नागरिकों की सुरक्षा पर असर पड़ता है।

नेशनल अडॉप्शन मिशन पर जज की नाराज़गी 

सुनवाई के दौरान एक वकील ने कुत्तों के लिए राष्ट्रीय गोद लेने अभियान (national adoption mission) की बात कही। जिस पर जस्टिस संदीप मेहता ने रेस्पॉन्स में कहा कि इंसेंटीवाइजेशन (incentivisation) का मतलब नसबंदी और टीकाकरण जैसी व्यवहारिक चीजें हो सकती हैं। जस्जिस मेहता ने ये भी कहा कि साल कि साल 2011 में पद संभालने के बाद ये सबसे लंबी दलीलें है। कभी इंसानों, खास कर सड़कों पर रहने वाले अनाथ बच्चों के लिए इतनी लंबी बहस नहीं हुई है।  

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कु्त्तों में डर से पैदा होती है आक्रामकता 

एक डॉग बाइट पीड़िता ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कुत्तों के प्रति करुणा दिखाने की अपील की। उन्होंने बताया कि उन्हें बिना किसी उकसावे के एक कुत्तों ने काट लिया था। पीड़िता ने बताया कि उस कुत्ते के साथ लंबे समय से क्रूरता हो रही थी, जैसे लात मारना और पत्थर फेंकना। उन्होंने कहा कि डर की वजह से कुत्ते अपनी रक्षा करने के लिए आक्रामक हो जाते हैं और उसी का नतीजा होता है डॉग बाइट। 

अगर कुत्ते के काटने से मौत तो फीडर जिम्मेदार  

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने डॉग फीडर्स (dog feeders) को भी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि जब कुत्तों के काटने या मौत की घटनाएं होती हैं, तो फीडर्स की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। बेंच ने सवाल किया कि अगर लोग कुत्तों से इतना प्रेम करते हैं तो उन्हें अपने घर में रखें। सड़कों पर घूमते हुए कुत्तों के काटने और पीछा करने का असर जीवनभर रहता है।

केंद्र और राज्य सरकारों पर कड़ी टिप्पणी

अदालत ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को आड़े हाथों लिया। बेंच ने कहा कि सरकारें एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम (ABC Rules) लागू करने में पूरी तरह से विफल रही हैं। कोर्ट ने कहा कि ये मुद्दा 1950 से संसद के सामने है लेकिन केंद्र और राज्यों की विफलता के कारण समस्या हजार गुना बढ़ गई है। बेंच ने चेतावनी दी कि डॉग बाइट से जान गंवाने वाले हर पुरुष, महिला और बच्चे के लिए जिम्मेदार सरकार पर बारी मुआवजा (compensation) लगाया जाएगा।  

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भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए, इंसानों का क्या

सुनवाई के दौरान बेंच ने पशु प्रेमियों (animal activists) की ओर से पेश एक वकील से कहा कि भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखाई देती हैं। इस पर वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि वह इंसानों से भावनात्मक रूप से जुड़ी हैं और यह मुद्दा दशकों से संसद के सामने है, जिसके बाद ABC नियम बने। 

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गेटेड सोसाइटी में स्ट्रीट डॉग पर बहस

वरिष्ठ अधिवक्ता दातार ने दलील दी कि गेटेड सोसाइटी (gated society) में रहने वाला स्ट्रीट डॉग, स्ट्रीट डॉग ही रहता है और उसे वहां रहने का कोई अधिकार (right) नहीं है। 

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डॉग लवर्स पर कोर्ट की नाराज़गी

बेंच ने गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के एक मामले का जिक्र किया, जहां एक वकील को कुत्ते ने काट लिया था। जब नगर निगम (municipal corporation) के कर्मचारी कुत्तों को पकड़ने पहुंचे तो उन्हें पीटा गया। अदालत ने कहा कि यह सब तथाकथित डॉग लवर्स और पशु प्रेमियों की वजह से हुआ, जो अब 7 नवंबर के आदेश को एयरपोर्ट और अदालतों तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। 

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