Advertisment

ACB EOW की बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में फरार तहसीलदार और नायब तहसीलदार गिरफ्तार

(रिपोर्ट: अनंत, रायपुर) ACB EOW ACTION: भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में ACB-EOW ने फरार तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार किया। दोनों पर फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों के घोटाले का आरोप है।

author-image
Shantanu Singh
Bharatmala Compensation Scam

ACB EOW ACTION: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़े करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में ACB-EOW ने बड़ी कार्रवाई सामने आई है,जहां फरार चल रहे तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण को गिरफ्तार कर लिया है।

Advertisment

बता दें, दोनों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर और नियमों में हेरफेर कर मुआवजा राशि का अवैध आहरण कराने का आरोप है। जिससे शासन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 

लंबे समय से फरार थे दोनों अधिकारी

जांच एजेंसी के मुताबिक दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे और गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहे थे। बता दें, इससे पहले इनकी जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो चुकी थी।

जिसके बाद स्पेशल कोर्ट ने इनके खिलाफ स्थायी वारंट और प्रोक्लेमेशन आदेश जारी किया था। न्यायिक प्रक्रिया के बावजूद फरारी जारी रहने पर ACB-EOW ने सघन अभियान चलाकर दोनों को धर दबोचा।

Advertisment

यह भी पढ़ें: Aaj Ka Mudda : कांग्रेस का नया 'मोहरा', 2028 में चैतन्य चेहरा?

अन्य अधिकारियों को लेकर पूछताछ जारी 

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। ACB-EOW अधिकारियों का कहना है कि रिमांड अवधि के दौरान मुआवजा वितरण से जुड़े दस्तावेजों, फर्जी लाभार्थियों और इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य अधिकारियों व दलालों की भूमिका को लेकर विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में कई अहम नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

भुगतान के दौरान व्यापक स्तर पर धोखाधड़ी

दरअसल, भारत सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत सड़क और हाईवे निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहण किया गया था। इसी प्रक्रिया में मुआवजा निर्धारण और भुगतान के दौरान व्यापक स्तर पर धोखाधड़ी और हेराफेरी के आरोप सामने आए।

Advertisment

जांच में यह पाया गया कि अधिकारियों, भू-माफिया और दलालों की मिलीभगत से जमीन के कागजात और मूल्य में जानबूझकर गड़बड़ी की गई।

यह भी पढ़ें: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों से कुकर्म का आरोप: जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने लगाई याचिका, 2 बच्चों को कोर्ट में किया पेश

मीन मालिकों की जगह फर्जी नाम जोड़े 

जांच एजेंसी के मुताबिक कई मामलों में वास्तविक जमीन मालिकों की जगह फर्जी नाम जोड़कर या दस्तावेजों में हेरफेर कर कई गुना अधिक मुआवजा निकाला गया। नकली मालिक बनाकर भुगतान कराया गया, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

Advertisment

इस घोटाले में एसडीएम, पटवारी और अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिनकी जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है।

यह भी पढ़ें: पोटाकेबिन आवासीय स्कूलों में बड़ा राशन घोटाला: बीजापुर में बच्चों की फर्जी अटेंडेंस दिखाकर लाखों की हेराफेरी, चार प्रभारी अधीक्षक सस्पेंड

अधिग्रहण कानून का दुरुपयोग घोटाले को अंजाम दिया

विशेषज्ञों के अनुसार, 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य से दो से चार गुना तक और शहरी क्षेत्रों में लगभग दो गुना तक दिया जाता है। 

Advertisment

इसके अलावा 100 प्रतिशत अतिरिक्त राशि, फसल, पेड़ या मकान का अलग से भुगतान और पुनर्वास राशि का भी प्रावधान है। आरोप है कि इन्हीं प्रावधानों का दुरुपयोग कर मुआवजा घोटाले को अंजाम दिया गया।

मामला जांच और न्यायालय में विचाराधीन है

ACB-EOW ने स्पष्ट किया है कि ये मामला अभी जांच और न्यायालय में विचाराधीन है। पूछताछ के आधार पर आने वाले दिनों में और भी अधिकारियों, दलालों तथा लाभार्थियों पर कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

ACB-EOW

यह भी पढ़ें: भोपाल कमिश्नर-कलेक्ट्रेट की नई बिल्डिंग बनेगी: 15 विभागों को खाली करने होंगे ऑफिस, संभागायुक्त ने शिफ्टिंग की टाइम लिमिट तय करने को कहा

Advertisment



ACB EOW action Bharatmala Compensation Scam
Advertisment
चैनल से जुड़ें