Bastar Pandum 2026: जगदलपुर में होने वाले बस्तर पंडुम महोत्सव की तारीख बदल दीं गई है।

Bastar Pandum 2026: जगदलपुर में होने वाले बस्तर पंडुम महोत्सव की तारीख बदली गई है। अब यह सांस्कृतिक आयोजन 6 से 8 फरवरी के बीच होगा, जिसमें बस्तर संभाग के 7 जिलों के कलाकार 12 विधाओं में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे।

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Bastar Pandum 2026: जगदलपुर में आयोजित होने वाले बस्तर पंडुम महोत्सव की तारीखों में बदलाव किया गया है। अब यह भव्य सांस्कृतिक आयोजन 6 फरवरी से 8 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में बस्तर की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिलेगी।

प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि तारीखों में बदलाव विभिन्न प्रशासनिक और आयोजन संबंधी कारणों से किया गया है, ताकि कार्यक्रम को और बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सके। नई तारीखों के अनुसार तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।

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बस्तर संभाग के 7 जिलों के कलाकार होंगे शामिल

इस महोत्सव में बस्तर संभाग के सभी 7 जिलों से कलाकार हिस्सा लेंगे। अलग-अलग क्षेत्रों से आए प्रतिभागी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और दर्शकों को बस्तर की विविध सांस्कृतिक पहचान से रूबरू कराएंगे। इन जिलों से आने वाले कलाकार अपनी-अपनी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए महोत्सव को और भी रंगीन बनाएंगे।

12 विधाओं में दिखेगा कलाकारों का हुनर

बस्तर पंडुम महोत्सव में प्रतिभागी 12 अलग-अलग विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से लोकनृत्य, लोकगीत, नाट्य, पारंपरिक वाद्ययंत्र, शिल्पकला, चित्रकला, जनजातीय नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल होंगी। हर विधा के जरिए बस्तर की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाया जाएगा। दर्शकों को तीन दिनों तक विविध रंगों से भरे कार्यक्रम देखने को मिलेंगे।

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विशिष्ट अतिथियों को किया जाएगा आमंत्रित

इस भव्य आयोजन में देश और राज्य के कई विशिष्ट अतिथियों को आमंत्रित किया जाएगा। इनमें UPSC और CGPSC के अधिकारी, बैरिस्टर, डॉक्टर, इंजीनियर और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।

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संस्कृति और प्रतिभा का होगा भव्य संगम

बस्तर पंडुम महोत्सव के जरिए क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। यह आयोजन कलाकारों के लिए एक बड़ा अवसर साबित होगा, जहां वे अपनी कला को बड़े मंच पर प्रस्तुत कर सकेंगे। महोत्सव के माध्यम से बस्तर की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराएं और ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रशासन ने तेज की तैयारियां

तारीखों में बदलाव के बाद प्रशासन और आयोजन समिति ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंच, सुरक्षा व्यवस्था, कलाकारों की सुविधाएं और दर्शकों के लिए व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं ताकि कार्यक्रम सफल और यादगार बन सके।

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