UP BJP President: क्यों मजबूत है पंकज चौधरी का दावा? जानें सात बार के सांसद का पूरा राजनीतिक सफर

UP BJP President की रेस में पंकज चौधरी सबसे आगे हैं। कुर्मी ओबीसी समीकरण, सात बार सांसद रहने का अनुभव और पूर्वांचल में मजबूत पकड़ के चलते उनका दावा मजबूत माना जा रहा है। जल्द नाम की औपचारिक घोषणा संभव है।

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UP BJP President: उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में बड़े बदलाव की आहट के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केंद्रीय मंत्री और सात बार के सांसद पंकज चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। दिल्ली में हुई मैराथन बैठक के बाद उनके नाम पर सहमति बनने की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। माना जा रहा है कि वह उत्तर प्रदेश भाजपा के 17वें प्रदेश अध्यक्ष बन सकते हैं। Pankaj Chaudhary BJP President Cadidate

गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर हुई करीब तीन घंटे की बैठक में यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए कई नामों पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने इस बार ओबीसी चेहरे को जिम्मेदारी देने पर सहमति बनाई। अंतिम दौर में योगी सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी के नाम पर मंथन हुआ, लेकिन अंततः पंकज चौधरी का पलड़ा भारी रहा।

पंकज चौधरी का दावा क्यों मजबूत?

पंकज चौधरी कुर्मी बिरादरी से आते हैं, जो उत्तर प्रदेश में ओबीसी वर्ग के भीतर यादवों के बाद सबसे बड़ी आबादी मानी जाती है। हालिया लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में कुर्मी वोटों के खिसकने से भाजपा को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में पार्टी नेतृत्व कुर्मी–ठाकुर–ब्राह्मण समीकरण को फिर से मजबूत करना चाहता है। पंकज चौधरी की पूर्वांचल में कुर्मियों के बीच मजबूत पकड़ इस रणनीति को धार देती है। दूसरी ओर, धर्मपाल सिंह लोध बिरादरी से हैं, जो लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ largely खड़ी रही—इसलिए रणनीतिक प्राथमिकता कुर्मी चेहरे पर गई। UP BJP President Election 

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पार्षद से सांसद तक का सफर

15 नवंबर 1964 को जन्मे पंकज चौधरी ने 1989 में गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के रूप में राजनीति में कदम रखा। 1990 में वह भाजपा जिला कार्य समिति के सदस्य बने। 1991 में महाराजगंज लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद 1996 और 1998 में फिर जीत दर्ज की। 1999 में हार मिली, 2004 में वापसी हुई, 2009 में पराजय के बाद 2014 से लगातार लोकसभा सदस्य हैं—कुल मिलाकर सात बार सांसद। OBC Politics UP

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मंत्रिमंडल विस्तार की भी तैयारी 

नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद योगी मंत्रिमंडल विस्तार पर भी मंथन हुआ है। तय है कि 15 जनवरी को खरमास समाप्त होते ही विस्तार किया जाएगा, ताकि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधा जा सके।

चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची

प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए 464 मतदाताओं की सूची जारी की गई है, जिनमें सांसद, विधायक, एमएलसी और प्रांतीय परिषद के सदस्य शामिल हैं। 13 दिसंबर को नामांकन, 14 दिसंबर को नाम की घोषणा और आवश्यकता पड़ने पर रविवार को मतदान होगा। 

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