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Magh Mela 2026: नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही प्रयागराज में आस्था और सनातन परंपरा का भव्य पर्व माघ मेला शुरू हो गया है। पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर संगम तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के कोने-कोने से आए संत, साधु, कल्पवासी और श्रद्धालु गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं। हर तरफ भक्ति, श्द्धा और अध्यात्म का वातावरण बना हुआ है। संगम की लहरों के साथ-साथ श्रद्धालुओं की आस्था भी प्रवाहित हो रही है।
कब से कब तक चलेगा माघ मेला?
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माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से होती है और इसका समापन महाशिवरात्रि के दिन अंतिम पवित्र स्नान के साथ होता है। इस बार माघ मेला करीब 40 दिनों से अधिक चलेगा और 15 फरवरी 2026 को संपन्न होगा। मेला शुरू होते ही संगम तट पर कल्पवास की परंपरा भी आरंभ हो गई है। कल्पवासी पूरे माघ मास संगम तट पर निवास करते हैं और संयम, साधना व तपस्या के साथ जीवन व्यतीत करते हैं।
12 लाख श्रद्धालुओं ने किया स्नान
प्रयागराज माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह 10 बजे तक करीब 9 लाख लोगों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। जबकि दोपहर 12 बजे तक यह संख्या बढ़कर लगभग 12 लाख तक पहुंच गई। आस्था का यही उत्साह प्रदेश के अन्य तीर्थ स्थलों पर भी नजर आया। वाराणसी के अलग-अलग घाटों पर करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। वहीं अयोध्या में ढाई लाख, मथुरा में एक लाख, फर्रुखाबाद और मिर्जापुर में करीब 50 हजार, जबकि हापुड़ में 25 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे प्रदेश में पौष पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है।
माघ मास में संगम स्नान का महत्व
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धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार माघ महीने में संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह समय दान, जप, तप, ध्यान और सत्कर्मों के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वर्ष 2026 सूर्य का वर्ष है, इसलिए इस वर्ष धर्म, तपस्या और आस्था का प्रभाव विशेष रूप से देखने को मिलेगा।
क्या होता है कल्पवास?
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कल्पवास माघ मेले की सबसे पवित्र और कठिन परंपरा मानी जाती है। कल्पवासी पूरे माघ मास ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करते हैं, एक समय सात्विक भोजन करते हैं, भूमि पर शयन करते हैं, इसके साथ ही जप, तप, ध्यान और दान करते हैं। क्रोध, अहंकार और भोग से दूरी बनाए रखते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि एक माघ मास का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल देता है। विशेष रूप से वृद्ध और गृहस्थ लोग इस परंपरा का पालन करते हैं।
माघ मेला 2026 की प्रमुख स्नान तिथियां
माघ मेले के दौरान कई महत्वपूर्ण स्नान पर्व पड़ते हैं। इसमें आज 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ) हुआ। 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 21 जनवरी को मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान), 30 जनवरी को बसंत पंचमी, 5 फरवरी को माघी पूर्णिमा, 15 फरवरी को महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन) आस्था, संस्कृति और साधना का महापर्व। माघ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत तस्वीर है। संगम तट पर संतों के प्रवचन, यज्ञ, भजन-कीर्तन और धार्मिक चर्चाओं से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। माघ मेला श्रद्धा, साधना और सेवा का ऐसा महापर्व है, जहां आस्था के साथ आत्मशुद्धि का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
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