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Ghaziabad Triple Suicide Update: गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड में ट्विस्ट, कोरियन लड़कों से शादी, भारतीय नाम से चिढ़, क्या हैं इस मिस्ट्री का सच?

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Preeti Dwivedi
Gaziyabad Tripal Suicide

Ghaziabad Triple Suicide Update: 4 फरवरी को गाजियाबाद में 9वीं मंजिल से गिरकर तीन सगी बहनों ने सुसाइड कर लिया। प्राथमित तौर पर जो जानकारी सामने आई थी उसके अनुसार इसके पीछे की वजह टास्क बेस्ट कोरियन गेम (Korean game) खेलना बताया जा रहा था लेकिन अब 10 घंटे की छानबीन के बाद जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार कोरियन कल्चर के आदि हो जाने के चलते पिता चेतन ने बच्चों को डांटा था। मोबाइल भी छीन लिया था। जिसके कारण वे तनाव में थीं। 

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यूट्यूब से सीखी थी कोरियल लैंग्वेज

तीनों बहने खुद को कोरियन मानती थीं। निशिका 16 साल, प्राची 14 साल जबकि पाखी 12 साल की थी। उनके कमरे से डायरी मिली जिसमें परिवार ने बेटियों की जिंदगी के बारे में बताया कि बच्चियां खुद को भारतीय नहीं, कोरियन मानने लगी थीं। उन्हें लड़के भी कोरियन पसंद आते थे। वे अपना नाम बदल चुकी थीं।

यूट्यूब चैनल बनाकर उस पर ही उन्होंने कोरियल भाषा सीखी थी। जिसके बाद वे अपने यूट्यूब चैनल पर  कोरियन कंटेंट जनरेट करती थीं। इतना ही नहीं घर की बातचीत भी कोरियाई भाषा का उपयोग करती थीं। कैसे ये बच्चियां खुद को कोरियन समझने लगीं.

कोविड में छोड़ी थी पढ़ाई

कोविड महामारी के दौरान स्कूल बंद होने से बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित हुई और इसी दौरान उनका झुकाव मोबाइल की ओर बढ़ गया। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्य बेहद चौंकाने वाले हैं। बीते करीब छह वर्षों में तीनों बहनें धीरे-धीरे कोरियन कल्चर में पूरी तरह ढल चुकी थीं।

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वर्ष 2020 के कोविड काल में जब स्कूल छूटे, तो मोबाइल पर पहले कोरियन फिल्में और बाद में वेब सीरीज देखने की आदत लग गई। सबसे पहले बड़ी बहन निशिका कोरियन कंटेंट से लगाव हुआ, जिसके बाद छोटी बहनें प्राची और पाखी भी उसी राह पर चल पड़ीं और अपनी बड़ी बहन को फॉलो करने लगीं।

सोनू सूद ने करी ये मांग, बंद होना चाहिए

सोनू सूद ने गाजियाबाद की घटना के बाद सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए ऑनलाइन गेमिंग पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग की। उन्होंने लिखा, “आज गाजियाबाद में तीन छोटी लड़कियों की जान चली गई। न हिंसा से, न गरीबी से, बल्कि ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत के अनदेखे दबाव से। मैंने पहले भी आवाज उठाई है और मैं फिर कहूंगा। 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगनी चाहिए, सिवाय पढ़ाई के।”

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक 

भोपाल के मनोचिकित्सक सत्यकांत त्रिवेदी के अनुसार ऑनलाइन गेमिंग अब मानसिक महामारी का रूप लेती जा रही है। जिस तरह से ऑनलाइन गेम्स डिज़ाइन किए जा रहे हैं। वे बच्चों की भावनाओं और निर्णय क्षमता पर गहरा असर डाल रहे हैं। ऑनलाइन गेम्स पर पूरी तरह बैन लगाना समाधान नहीं है। असल ज़रूरत है बच्चों को डिजिटल समझ और संतुलन सिखाने की है। पाठ्यक्रम में डिजिटल और टेक्नोलॉजी से जुड़े विषय शामिल किए जाएं ताकि बच्चे तकनीक का उपयोग उन्नयन के लिए करना चाहिए विनाश के लिए नहीं।

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बीते दिन बुधवार को आई थी खबर 

गाजियाबाद तीन सगी बहनों के ट्रिपल सुसाइड केस में नया मोड़ सामने आया है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने सुसाइड केस में जांच ने बड़ा खुलासा किया है। जिसके अनुसार तीनों बहनों की मौत किसी ऑनलाइन गेम या कोरियन लव गेम की वजह से नहीं हुई बल्कि कोरियन कल्चर की वजह से हुई है।  डायरी में सामने आया है कि बच्चियां कोरियन कल्चर के साथ साथ K-POP और कोरियन कंटेंट की आदी थीं। मोबाइल बंद होने से वे डिजिटल दुनिया से दूरी को सहन नहीं कर पा रही थीं। जिसकी वजह से वे तनाव में थीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें...

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