फसल बीमा के नाम पर किसानों से मजाक: बरेली में फसल बर्बादी पर क्लेम में मिले 2 और 5 रुपए, इंश्योरेंस कंपनी हड़प गई करोड़ों, पढ़े पूरी खबर

बरेली में फसल बीमा योजना पर सवाल उठे हैं, जहां बाढ़ से फसल बर्बाद होने के बावजूद किसानों को 2 से 5 रुपये तक का ही क्लेम मिला। वहीं इफको-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने करीब 9.5 करोड़ रुपये की कमाई की।

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Bareilly Crop Insurance Claim: उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में प्रधामंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए राहत नहीं बल्कि आफत बनते हुए नजर आ रही है। बाढ़ से नष्ट हुई फसलों के लिए जब किसानों ने बीमा योजना का क्लेम मांगा तो रुपए मिलने के नाम पर सिर्फ दो से पांच रुपए मिल रहे हैं। जबकि इंश्योरेंस कंपनी करोड़ों की कमाई कर रही है। 

क्या पूरा मामला 

बरेली जिले के कई गांवों में खरीफ सीजन 2023-25 के दौरान आई बाढ़ से धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। जहां एक तरफ नुकसान की भरपाई होनी चाहिए थी लेकिन किसानों को बेहद ही मामूली राशि दी गई है। किसी किसान को 2.72 रुपए मिले तो किसी के खाते में 3.76 रुपये ही आए, जिसे देखकर किसान हैरान और खासा नाराज भी है।  Bareilly flood crop damage compensation

क्लेम के नाम पर चिंदी वापिस दी

बहेड़ी क्षेत्र के जाम अंतरामपुर निवासी बाबूराम को बाढ़ में धान की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी जिसके बाद उन्हें क्लेम के नाम पर सिर्फ  2.72 रुपये मिले। अखा गांव के सुरेश गंगवार को 3.76 रुपये की क्षतिपूर्ति दी गई। सुरेश ने बताया कि उन्होंने अपनी ढाई एकड़ जमीन पर धान की खेती की थी। किसान क्रेडिट कार्ड से उन्होंने 2.80 लाख रुपये का लोन लिया था। लेकिन फसल नष्ट होने से वह कर्जा नहीं चुका पाए। बैंक ने उनसे कितना प्रीमियम काटा, इसे उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।   PMFBY farmers issue

इंश्योरेंस कंपनी की करोड़ों की कमाई

जहां कई किसानों के खाते में 100 रुपए से भी कम पैसे आए, वहीं सेवा प्रदाता इफको-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने करीब 9.50 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त की। इसमें 3.84 करोड़ रुपए किसानों के प्रीमियम से आए। जबकि शेष राशि केंद्रांश और राज्यांश के रूप में दी गई। सवाल है कि इसना बड़ा अंतर कहां से आया और कैसे आया।   IFFCO Tokio insurance controversy

किसानों में भी दिखा बड़ा फर्क

खरीफ 2024-25 में जिले के 1,188 किसानों को क्लेम मिला। भदपुरा ब्लॉक के फुलवईया गांव के महेंद्रपाल को सबसे अधिक 76,289 रुपये मिले। उनके पास 50 बीघा जमीन है, जिसमें 20 बीघा में धान की फसल बाढ़ से नष्ट हुई थी। महेंद्रपाल भी मानते हैं कि नुकसान के हिसाब से मुआवजा कम है। 

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रबी सीजन में भी दोहराई गई कहानी

रबी सीजन 2024-25 में भ यही हाल रहा। 932 किसानों को क्लेम मिला लेकिन कईयों को उससे भी कम राशि मिली। क्यारा के सिमरा बोरी गांव के अशोक को 3.05 रुपये, बभिया के कलक्टर सिंह को 3.52 रुपये और सुरेश कुमार को 4.15 रुपये मिले। वहीं, सबसे ज्यादा 32,318 रुपये बहेड़ी के फिरोजपुर निवासी जीत सिंह को दिए गए। 

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प्रीमियम और बीमा का गणित

धान की फसल पर किसान से प्रति हेक्टेयर 1,610 रुपये और गेहूं पर 1,212 रुपये प्रीमियम लिया जाता है। इसके बावजूद जिले में सिर्फ 6,800 किसानों ने गेहूं की फसल का बीमा कराया। रबी सीजन 2025-26 में 18,500 गाटों पर 4,237 हेक्टेयर क्षेत्रफल की फसल बीमित की गई है। 

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अधिकारियों के बयान

इफको-टोक्यो जनरल इंश्योरेंस के जिला समन्वयक दीपक पटेल का कहना है कि क्रॉप कटिंग (Crop Cutting) के जरिए तय की गई उपज के आधार पर ही क्षतिपूर्ति दी जाती है, इसलिए किसी को कम तो किसी को ज्यादा राशि मिली। वहीं उप निदेशक कृषि हिमांशु पांडेय ने कहा कि कंपनी को तीन साल का टेंडर मिला है और यह अंतिम वर्ष है। केवल 6,800 किसानों का बीमा होना यह दिखाता है कि कंपनी योजना को गंभीरता से नहीं ले रही, जिस पर शासन स्तर पर पत्र लिखा जाएगा। 

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