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Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में किस मंत्र का जाप करना चाहिए, कैसे मिलेगी कष्टों से मुक्ति, जानें इस खास मंत्र चमत्कार के उपाय

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Preeti Dwivedi
gupta navratri 2026

Gupt Navratri Upay Mantra 2026: आज से गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई हैंं हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि आती है। प्रगट नवरात्रि गृहस्थ जीवन के लिए तो गुप्त नवरात्रि तंत्र साधना के लिए खास मानी जाती है। ऐसे में अगर आप गृहस्थ जीवन में हैं और गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को प्रसन्न करना चाहते हैं तो चलिए जानते हैं पंडित लोकेश व्यास से कि गृहस्थ जीवन वालों को माघ माह की गुप्त नवरात्रि में किस मंत्र का जाप करना चाहिए। 

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कब-कब आती हैं गुप्त नवरात्रि 

पंडित लोकेश व्यास के अनुसार साल में दो बार प्रगट नवरात्री चेत्र और अश्विन महीने में आती है और गुप्त नवरात्री माघ और आषाढ़ माह में आती हैं। आज 19 जनवरी सोमवार से गुप्त नवरात्री प्रारंभ हो गई हैं। 

गुप्त नवरात्रि में किन महाविद्याओं का पूजन होता है 

हिन्दू धर्म के अनुसार गुप्त नवरात्रि में 10 महविद्याओं के पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दौरान मां देवी की दस महाविद्याओं के पूजन से आपके जीवन में अच्छे फल की प्राप्ति होती है। दस महविद्याओं की सिद्धी के लिए सबसे पहले जो लेख मिलता है तो उसके अनुसार ​ऋषि वसिष्ठ और विश्वामित्र के द्वारा इनकी पूजा अर्चना की गई लेकिन ऋषि वसिष्ठ और विश्वमित्र को जो देवी का आशीर्वाद दिया और सफलता प्राप्त वह गुप्त नवरात्री में ही हुई है। 

गुप्त साधना के लिए होती है गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्री का बेहद महत्व है। गुप्त नवरात्री साधकों के लिए खास होती है। क्योंकि इसमें यंत्र, मंत्र, तंत्र इन तीजों का समन्वय करके साधक को चमत्कारिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं। गृहस्थ भी गुप्त नवरात्री में पूजन कर सकती है। देवी का पूजन कर सकते हैं। इस दौरान बहुत सारी गुप्त पूजाएं होती है। गृहस्थ में अगर जातक मंत्र का जाप करना चाहते हैं तो इसके लिए नवार्ण मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करना चाहिए। इसके अलावा मंत्र या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
मंत्र का जाप करना चाहिए। 

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माघ महीने में सूर्य होते हैं मकर राशि में 

माघ के महीने में जो गुप्त नवरात्री आती हैं इस दौरान भगवान सूर्य मकर राशी में होते हैं। जबकि अषाढ़ की गुप्त नवरात्री में भगवान सूर्य कर्क या मिथुन राशि में होते है। सूर्य ग्रहों के राजा हैं और चंद्रमा को राजमाता का दर्जा प्राप्त है। गुप्त नवरात्री में जो भी जातक जातिका देवी की पूजन करते हैं उनको सूर्य और चंद्रमा इन दो ग्रहों का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच या वृश्चिक राशी में या तुला यानी नीच राशी में हैं या सूर्य और चंद्रमा पर क्रूर ग्रहों की दृष्टि है तो ऐसे में जीवन में उथलपुथल की स्थिती बनती है, मानसिक तनाव रहता है, दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है। ऐसे में गुप्त नवरात्री में देवी की पूजन जरूर करना चाहिए। 

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