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Holashtak 2026:होली से पहले के 8 दिनों को होलाष्टक कहा जाता है। इस दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। इस दौरान लोग शुभ कार्यों से दूर होकर होलिका दहन की तैयारियां करते हैं। आखिर होलाष्टक में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते, इसकी वजह क्या है ?
होलाष्टक क्या है ?
एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशिक ने बताया कि विवाह आदि शुभ कर्मों के लिए फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक के 8 दिन को होलाष्टक कहा जाता है।
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होलाष्टक किसके लिए शुभ काल ?
कार्मिक एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशिक ने कहा कि होलाष्टक में शुभ मुहूर्त नहीं करते हैं। ये एक रीजनल बेस था। शतद्रु नदी सतलज और विपाशा ब्यास नदी के तटीय प्रांतों के लिए होलाष्टक काल शुभ कहा गया है।
होलाष्टक में क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य ?
एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशिक ने बताया कि ये एक साइंटिफिक साइंस पैटर्न बेस्ड साइंस है। आकाश में खगोलीय घटना की वजह से पृथ्वी पर असर पड़ता है। इसके कारण होलाष्टक को उस समय के साइंटिस्ट ने डिफाइन किया था।
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संहिता में होलाष्टक के बारे में क्या लिखा है ?
एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशिक ने बताया कि संहिता में होलाष्टक का डायरेक्ट इंपैक्ट नहीं दिखाया गया है। मॉर्डन वर्ड जैसे स्ट्रेस मैनेजमेंट या कॉन्फ्लिक्ट प्रोबैविलिटी को अवॉइड करने की बातें नहीं कही गई हैं। संहिता में उपद्रव, कलह, भय, अनिष्टकाल, लुनार फेस, सीजनल जंक्शन, ऋतु संधि की बात हुई थीं। संहिता में होलाष्टक का डायरेक्ट चैप्टर नहीं है।
होलाष्टक का आध्यात्मिक पक्ष
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आचार्य कौशिक का कहना है कि ठंड तब आती है जब सूर्य पृथ्वी के पास होता है। अब सूर्य पृथ्वी से दूर जा रहा है। आप उल्टा सोचिए। सूर्य जब दूर जाता है तो ऋतु संधि होती है। बसंत, ठंड और गर्मी के बीच संधि होती है। इससे लुनार न्यूरो इफेक्ट होता है। इसमें टेम्पेरेचर बदलता है। मेटाबॉलिक डिमांड होती है और टेम्परेरी साइकोलॉजिकल फटीक होता है।
होलाष्टक एनशिएंट प्रिवेंटिव साइंस ऑफ प्रोटोकॉल
एस्ट्रोलॉजर आचार्य कौशिक ने कहा कि होलाष्टक के दौरान हमारी इम्युनिटी में गिरावट आती है और स्ट्रेस लेवल हाई होता है। होलाष्टक एनशिएंट प्रिवेंटिव साइंस ऑफ प्रोटोकॉल था जो मानव शरीर, मानस और समाज तीनों को हाई स्ट्रेस ट्रांजिशन से सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया था।
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शीतलाष्टमी की मान्यता
हिंदू धर्म में शीतलाष्टमी की मान्यता है। इसी समय के आसपास कुछ ऐसे वायरल प्रकोप होते थे जिसमें व्यक्ति को परिवार समेत दूर रहना पड़ता था। आकाशीय घटनाओं के परिवर्तन को शरीर कितने आसानी से संभाल पाएगा, उसके लिए होलाष्टक ग्रेस पीरियड है। शरीर आने वाले समय के लिए तैयार हो जाए और हम ऐसा कोई विशेष काम न करें कि वो नियंत्रित न हो पाए।
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