/bansal-news/media/media_files/2026/03/05/rbi-new-rules-2026-03-05-09-55-00.jpg)
RBI New Rules: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों यानी NBFC के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने साफ कहा है कि अगर कोई ग्राहक पहले से लिए गए लोन की किस्त समय पर नहीं चुका रहा है और डिफॉल्टर की श्रेणी में आ गया है, तो उसे नया लोन देने से पहले कंपनियों को स्पष्ट और सख्त नीति बनानी होगी।
यह नीति NBFC के बोर्ड से मंजूर होनी चाहिए और उसके तहत ही ऐसे ग्राहकों को नया कर्ज दिया जा सकेगा। RBI का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और खराब कर्ज को छिपाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है।
जांच में सामने आया एवरग्रीनिंग का मामला
हाल ही में RBI की वार्षिक जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ NBFC कंपनियां ऐसे ग्राहकों को भी नया कर्ज दे रही थीं जो पहले से ही अपने पुराने लोन की किस्त नहीं चुका पाए थे।
कई मामलों में यह भी देखा गया कि नए लोन की राशि का उपयोग पुराने कर्ज को चुकाने के लिए किया जा रहा था। इससे कागजों में लोन खाते सामान्य दिखाई देते थे, लेकिन वास्तविक स्थिति में कर्ज की समस्या बनी रहती थी। इस तरह की प्रक्रिया को वित्तीय क्षेत्र में ‘एवरग्रीनिंग’ कहा जाता है।
क्या होता है एवरग्रीनिंग
एवरग्रीनिंग का मतलब है किसी ऐसे ग्राहक को नया लोन देना जो पहले से आर्थिक संकट में हो, ताकि वह पुराने कर्ज की किस्त चुका सके और खाता खराब श्रेणी में जाने से बच जाए।
इस प्रक्रिया से कंपनियों की बैलेंस शीट में खराब कर्ज की असली स्थिति सामने नहीं आती। RBI का मानना है कि अगर इस तरह की प्रथाओं को समय रहते नहीं रोका गया तो इससे पूरे वित्तीय तंत्र की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
90 दिन तक किस्त नहीं भरी तो NPA
RBI के नियमों के अनुसार अगर कोई ग्राहक लगातार 90 दिनों तक लोन की किस्त नहीं भरता है तो उस खाते को NPA यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया जाता है।
इसका मतलब है कि वह लोन अब खराब श्रेणी में आ गया है और उसकी वसूली मुश्किल हो सकती है। लेकिन कई बार कंपनियां नए लोन के जरिए पुराने कर्ज की भरपाई कर देती हैं, जिससे वह खाता NPA घोषित होने से बच जाता है। RBI ने कहा है कि अब ऐसी स्थिति में कंपनियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।
डिफॉल्टर को लोन देने पर पूरी तरह रोक नहीं
केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह डिफॉल्टर को लोन देने पर पूरी तरह रोक नहीं लगा रहा है। लोन देना या न देना कंपनी का व्यावसायिक निर्णय रहेगा, लेकिन इसके लिए पारदर्शी नियम होना जरूरी होगा।
NBFC कंपनियों को अपने बोर्ड से मंजूर एक विस्तृत नीति बनानी होगी, जिसमें यह तय होगा कि किन परिस्थितियों में किसी डिफॉल्टर को नया कर्ज दिया जा सकता है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
इस फैसले का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। अगर किसी व्यक्ति ने पहले लिया हुआ लोन समय पर नहीं चुकाया है या उसकी EMI बार बार लेट होती रही है, तो भविष्य में उसे नया पर्सनल लोन, होम लोन या वाहन लोन मिलने में परेशानी हो सकती है। अब कंपनियां ग्राहकों की क्रेडिट हिस्ट्री और भुगतान रिकॉर्ड पर पहले से ज्यादा ध्यान देंगी।
वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम लंबे समय में वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करेगा। इससे NBFC कंपनियों को अपने कर्ज पोर्टफोलियो की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देना होगा और जोखिम भरे कर्ज देने से बचना पड़ेगा। साथ ही निवेशकों और ग्राहकों को भी कंपनियों की वास्तविक वित्तीय स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
भविष्य में होगी सख्त निगरानी
RBI ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में NBFC कंपनियों के कामकाज की और सख्ती से निगरानी की जाएगी। निरीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि कंपनियां अपनी बोर्ड से मंजूर नीतियों का सही तरीके से पालन कर रही हैं या नहीं। अगर नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आते हैं तो कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
यह भी पढ़ें: इंदौर सुसाइड केस: पुलिस के थप्पड़ से खौफजदा युवक ने मल्टी की 5वीं मंजिल से लगाई छलांग, मां के सामने तोड़ा दम
/bansal-news/media/agency_attachments/2025/12/01/2025-12-01t081847077z-new-bansal-logo-2025-12-01-13-48-47.png)
Follow Us