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VIT Bhopal Update: यूनिवर्सिटी पहुंची प्रभारी मंत्री स्टूडेंट्स से मिलीं, मैनेजमेंट की बैठक बाद प्रभारी मंत्री बोली- जांच रिपोर्ट पर होगी कार्रवाई

VIT छात्रा नेहा की मौत। खराब भोजन, गंदे पानी और प्रबंधन की लापरवाही पर छात्रों ने उग्र प्रदर्शन किया। कैंपस में आगजनी, एग्जाम और क्लासेस पर संकट। नेहा के पिता ने की फीस लौटाने की मांग।

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Wasif Khan
Minister Krishna Gaur

VIT Bhopal Update: सीहोर के आष्टा में स्थित VIT यूनिवर्सिटी इन दिनों गंभीर आरोपों, छात्रों के विरोध और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग के बीच घिरी हुई है।

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सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने गुरुवार को VIT (वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) कॉलेज प्रबंधन के साथ एक बैठक की। बैठक समाप्त होने के बाद, प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कड़ा और बड़ा बयान जारी करते हुए VIT प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रबंधन की तरफ से लापरवाही हुई है। हमने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ बड़ी और कठोर कार्रवाई की जाएगी।

छात्रा की मौत बाद पिता ने फीस लौटाने की मांग की

हॉस्टल की सुविधाओं, खाने-पानी की गुणवत्ता और मेडिकल सपोर्ट को लेकर लंबे समय से चल रहे असंतोष ने अब बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है। छात्रों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रबंधन ने न तो हालत सुधारी और न ही उनकी बातें सुनीं। यहां तक शिकायत करने पर छात्रों से मारपीट की गई। 19 वर्षीय छात्रा नेहा साहुकार की मौत के बाद पिता ने ट्यूशन और हॉस्टल फीस लौटाने की मांग की है। सीएम मोहन यादव ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए जरूर निर्देश दिए हैं।

सीएम मोहन यादव ने जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने VIT यूनिवर्सिटी से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर को तुरंत परिसर पहुंचकर छात्रों और प्रबंधन से बातचीत करने और जरूरी कदम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार को निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की उच्च स्तरीय समीक्षा करने, छात्रों से जुड़े मुद्दों की पहचान करने और उनका तुरंत समाधान कराने के आदेश दिए गए हैं। सीएम ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन को छात्रों के भोजन और पानी से जुड़ी समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। उनके अनुसार छात्रों का हित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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VIT पहुंची निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की टीम

निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की टीम VIT कॉलेज पहुंची, जहां आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल शिवानी के साथ MGM के डॉक्टर भी मौजूद रहे। टीम ने प्रबंधन और छात्रों से बातचीत कर पूरे कॉलेज परिसर की स्थिति का निरीक्षण किया। प्रो. शिवानी ने बताया कि समिति जल्द ही विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपेगी।

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निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग की टीम VIT कॉलेज पहुंची।

अवमानना का आरोप, छात्र बोले- शिकायत करने पर सजा मिलती है

विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने बताया कि हॉस्टल में पीने का पानी गंदा है और खाने की हालत इतनी खराब है कि कई बार छात्र बीमार हुए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनकी बात आगे बढ़ाने पर टीचर और वार्डन परेशान करने लगते थे। छात्राओं के परिजन जब बात करने की कोशिश करते थे, तब भी प्रबंधन टाल देता था। छात्रों का कहना है कि अनुशासन के नाम पर शिकायत को दबा दिया जाता है और शिकायतकर्ता को टारगेट किया जाता है।

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एक अन्य छात्र ने बताया कि 8 दिसंबर से एग्जाम हैं, लेकिन विश्वविद्यालय ने 8 दिसंबर तक छुट्टी घोषित कर दी है। इससे पढ़ाई और परीक्षा को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। उनके अनुसार प्रबंधन ने अभी तक न तो क्लियर नोटिस जारी किया है और न ही स्टूडेंट्स की समस्याओं पर कोई बैठक की है।

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एबीवीपी और एनएसयूआई आमने-सामने

दिन भर चले तनाव के बीच एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी गेट पर प्रबंधन का पुतला फूंका। दूसरी ओर एनएसयूआई ने हाल की घटनाओं और छात्रों की सुरक्षा को लेकर ज्ञापन सौंपा। दोनों छात्र संगठनों ने प्रशासन की विफलता को मुख्य कारण बताया और उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

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कैंपस के अंदर की तस्वीरें।

कैंपस में गुस्सा इस कदर बढ़ा कि छात्रों ने एक इमारत में आग लगा दी। बसों और वाहनों को भी क्षति पहुंचाई गई। हालात काबू से बाहर होते देख पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती करनी पड़ी। स्वास्थ्य विभाग की टीम को बुलाकर बड़ी संख्या में छात्रों के ब्लड सैंपल लिए गए, ताकि यह पता चल सके कि खाने और पानी की वजह से स्वास्थ्य पर कितना असर हुआ था।

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नेहा के पिता ने फीस लौटाने की मांग की

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नेहा साहुकार के पिता सुनील साहुकार का दर्द भरा मेल सामने आया। उन्होंने लिखा कि उनकी बेटी 10 दिनों तक ICU में जिंदगी के लिए लड़ती रही और 24 नवंबर को उसकी मौत हो गई। पिता ने कॉलेज से ट्यूशन और हॉस्टल फीस लौटाने की मांग की, साथ ही यह भी कहा कि खराब भोजन और विश्वविद्यालय की लापरवाही ने उनकी बेटी की हालत बदतर कर दी।

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नेहा साहुकार

सुनील साहुकार ने मृत्यु प्रमाण पत्र भी भेजा, जिसमें Septic Shock, Abdominal Sepsis, Acute Fulminant Pulmonary Tuberculosis, ARDS और intestinal tubercular perforation की पुष्टि दर्ज थी। उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर को कॉलेज से फोन आया कि नेहा की हालत बहुत खराब है। उसे तुरंत बिलासपुर ले जाया गया, जहां पता चला कि उसकी आंत में गंभीर रुकावट है। सर्जरी से पहले किए गए टेस्ट में सामने आया कि उसे प्रोग्रेसिव TB भी है, जो लंबे समय से बढ़ रहा था और खराब डाइट ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

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नेहा के पिता का मेल।

डॉक्टरों के मुताबिक TB मई से विकसित हो रही थी और विटामिन की कमी तथा कमजोर इम्युनिटी की वजह से यह तेज़ी से बढ़ी। सर्जरी के बाद भी उसकी हालत बिगड़ती गई और मल्टी-ऑर्गन फेल्योर के कारण उसकी मौत हो गई।

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खराब भोजन, गंदा पानी को लेकर छात्रों का विरोध

उग्र आंदोलन कर रहे छात्रों ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। छात्रों के आरोप इस प्रकार थे कि हॉस्टल में परोसा जाने वाला भोजन अत्यंत निम्न स्तर का है, पीने के पानी में गंदगी मिलती है और हॉस्टल में मेडिकल सुविधा लगभग नहीं है। बीमार छात्रों की शिकायतें नज़रअंदाज कर दी जाती हैं, जिससे समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

कई छात्रों ने कहा कि हाल के महीनों में बीमार होने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ी है, लेकिन प्रबंधन हर बार सिर्फ आश्वासन देता है। स्थिति इतनी खराब हो गई कि स्वास्थ्य विभाग तक को हस्तक्षेप करना पड़ा।

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मंगलवार रात से शुरू हुआ हंगामा

मंगलवार (25 नवंबर) की रात हजारों छात्र कैंपस में इकट्ठा हुए और लंबे समय से चल रही अव्यवस्थाओं के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनके अनुसार प्रबंधन उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें चुप कराने में लगा रहता है। रात होते-होते विवरण गंभीर मोड़ लेता गया। कैंपस की एक इमारत में आग लगा दी गई, बसों में तोड़फोड़ हुई और माहौल हिंसक हो गया।

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कैंपस में छात्रों का उग्र प्रदर्शन।

पुलिस ने हालात काबू में करने की कोशिश की, लेकिन देर रात तक तनाव बना रहा। अगले दिन सुबह तक पैरामिलिट्री फोर्स कैंपस और आसपास के इलाकों में तैनात कर दी गई। प्रशासन ने पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी और जिले के वरिष्ठ अधिकारी विश्वविद्यालय पहुंच गए।

कैंपस की स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है और सामान्य गतिविधियां ठप हैं। छात्र एग्जाम डेट्स, क्लासेस और हॉस्टल की सुरक्षा पर साफ जानकारी की मांग कर रहे हैं।

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