Betul Cyber Fraud: MP में बड़ा साइबर फ्रॉड, 7 खातों से उड़ाए 9 करोड़ 84 लाख रुपए, बैंक कर्मचारी निकला ठगों का मददगार, 3 आरोपी गिरफ्तार

मध्यप्रदेश के बैतूल में बड़े साइबर फ्रॉड का बड़ा खुलासा हुआ है। यबां एक ही बैंक की सात शाखाओं के खातों से 9.84 करोड़ रुपए का हेरफेर किया गया, जिसमें एक मृत व्यक्ति के खाते का भी इस्तेमाल हुआ। हाईटेक जांच में तीन आरोपी पकड़े गए हैं।

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हाइलाइट्स

  • बैतूल में 9.84 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा।
  • इंदौर में छापामार कार्रवाई, 3 आरोपी गिरफ्तार।
  • मृत व्यक्ति का खाता भी बनाया ठगी का जरिया।

MP Betul Cyber Fraud Case: मध्यप्रदेश में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर फ्रॉड नए-नए पैंतरों से लोगों के साथ धोखाधड़ी कर उनकी मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। अब बैतूल पुलिस ने एक बड़ी साइबर ठगी का पर्दाफाश किया है, जिसमें मृत व्यक्ति के खाते से भी करोड़ों का लेन-देन हुआ। जांच में सात खातों से करीब 9 करोड़ 84 लाख रुपए के फर्जी ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ। ठगों का पूरा रैकेट ‘किट ट्रांसफर नेटवर्क’ से चल रहा था। यह भी सामने आया है कि बैंक का अस्थायी कर्मचारी गिरोह को गोपनीय डेटा लीक करता था। पुलिस ने इंदौर में छापामार करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। साथ ही बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं।

मजदूर की शिकायत से खुला करोड़ों का राज

मध्य प्रदेश के बैतूल में अब तक की सबसे बड़ी साइबर धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। पुलिस के हत्थे एक बड़ा साइबर गिरोह चढ़ा है, जिसने एक ही बैंक की सात शाखाओं के खातों में करोड़ों की हेराफेरी की।

यह साइबर धोखाधड़ी का मामला एक गरीब मजदूर की शिकायत के बाद सामने आया। खेड़ी सावलीगढ़ निवासी मजदूर बिसराम इवने ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत करते हुए बताया था, उसके जन-धन खाते में 2 करोड़ रुपए तक के संदिग्ध लेन-देन दिख रहे हैं। एक गरीब परिवार के खाते में इतनी बड़ी रकम का लेनदेन देखकर पुलिस हैरान रह गई और मामले में एसपी वीरेंद्र जैन के निर्देश पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की।

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मृत व्यक्ति का खाता भी बनाया ठगी का जरिया

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह ने बिसराम इवने, नर्मदा इवने, मुकेश उइके, नीतेश उइके, अमोल, चंदन और राजेश बर्दे नाम के खातों से कुल 9.84 करोड़ रुपए का फर्जी लेन-देन किया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि राजेश बर्दे की मृत्यु हो चुकी थी, फिर भी उसके खाते में लगातार ट्रांजैक्शन होते रहे। उसके मोबाइल नंबर बदल दिए गए, नया ATM कार्ड जारी हुआ और इंटरनेट बैंकिंग भी एक्टिव थी।

निवेश और इनाम का झांसा देकर ठगी

पुलिस के अनुसार जांच में खुलासा हुआ कि साइबर गिरोह पहले लोगों को ऑनलाइन निवेश, इनाम जीतने या आकर्षक नौकरी का झांसा देता था। जैसे ही वे उनकी निजी बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बना लेते, तुरंत खातों से बड़ी रकम निकालकर बैतूल में खोले गए फर्जी और चोरी हुए खातों में ट्रांसफर कर देते थे। इन खातों से पैसा कुछ ही मिनटों में निकाल लिया जाता, ताकि लेन-देन पकड़ना मुश्किल हो जाए। गिरोह की यह चेन लगातार सक्रिय रहती थी और हर दिन लाखों रुपये अलग-अलग खातों के जरिए घुमाए जा रहे थे।

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बैंक कर्मचारी की मदद से लीक हुआ ग्राहक डेटा

जांच में सामने आया कि पासबुक एंट्री करने वाला बैंक का अस्थायी कर्मचारी राजा उर्फ आयुष चौहान गिरोह को ग्राहकों की गोपनीय जानकारी देता था। KYC दस्तावेज, मोबाइल लिंकिंग और ग्राहक डेटा लगातार लीक किया जाता था।

गिरोह इन आधारों पर पूरी ‘किट’ बनाता था सिम कार्ड, ATM कार्ड, पासबुक और चेकबुक। यह किट बस के जरिए इंदौर भेजी जाती थी, जहां से बड़े ट्रांजैक्शन किए जाते थे। इसे गिरोह “किट ट्रांसफर नेटवर्क” कहता था।

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इंदौर में छापा, बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामग्री बरामद

तकनीकी सबूत जुटाने के बाद पुलिस ने जांच करते हुए इंदौर में दो ठिकानों पर छापामार करते हुए तीन आरोपियों को किया। गिरफ्तार आरोपियों में राजा उर्फ आयुष चौहान (28 साल, बैतूल) अंकित राजपूत (32 साल, इंदौर) और नरेंद्र सिंह राजपूत (24 साल, इंदौर) शामिल हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 15 मोबाइल फोन, 25 सिम, 21 ATM कार्ड, 11 पासबुक, 2 लैपटॉप, 2 POS मशीनें, ₹28,000 कैश और कई रजिस्टर बरामद किए हैं।

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साइबर सुरक्षा पर अब फोकस

बैतूल पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने कहा कि टीम ने तकनीकी दक्षता से इस जटिल साइबर ठगी का राज खोला है। मामले में फॉरेंसिक जांच जारी है और बाहरी नेटवर्क की तलाश की जा रही है। जिले में साइबर मॉनिटरिंग और भी सख्त की जाएगी।

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