खंडवा में SAF बटालियन जरूरी: विधानसभा में दो मंत्रियों ने भी किया समर्थन, बोले- इलाका आतंकियों की हिट लिस्ट में

विधानसभा में खंडवा की सुरक्षा पर मंत्रियों के बयान सामने आए। नकली नोट, आतंकी गतिविधियों और त्योहारों में तनाव के कारण SAF बटालियन की मांग तेज।

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Khandwa SAF Battalion Demand: खंडवा की कानून व्यवस्था को लेकर मंगलवार (02 दिसंबर) को विधानसभा का माहौल अचानक गर्म हो गया। सत्तापक्ष के ही मंत्री और विधायक एक-दूसरे के बिल्कुल अलग दावे करते दिखे, जिससे सरकार असहज स्थिति में पहुंच गई। खंडवा क्षेत्र में सुरक्षा बल बढ़ाने की मांग पुराने समय से चल रही है।

सवाल से शुरू हुई बहस

भाजपा विधायक कंचन मुकेश तनवे ने प्रश्नकाल में पूछा कि खंडवा में सशस्त्र पुलिस बल की एसएएफ (SAF) बटालियन कब स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि जिले में पिछले वर्षों में कई गंभीर घटनाएं हुई हैं, इसलिए यहां स्थायी फोर्स बेहद जरूरी है।

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मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (फाइल फोटो)

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से राज्यमंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने जवाब दिया कि खंडवा में फिलहाल दो थानों और सात चौकियों को अपग्रेड किया जा रहा है। एसएएफ बटालियन की स्थापना खरगोन में प्रस्तावित है, इसलिए खंडवा में बटालियन की अभी जरूरत नहीं दिखती।

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तनवे ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि खंडवा के पेठिया गांव के मदरसे से पुलिस 20 लाख रुपए के नकली नोट जब्त कर चुकी है। उनका कहना था कि यह इलाका सिमी से जुड़े संदिग्धों और आतंकी गतिविधियों के दायरे में पहले भी रहा है। ऐसे में पुलिस बटालियन न होना सुरक्षा के लिहाज से बड़ा खतरा है। इसके जवाब में पटेल ने कहा कि जरूरत पड़ने पर खरगोन से फोर्स महज एक घंटे में पहुंच सकता है।

विजयवर्गीय बोले- त्योहार तक बिना सुरक्षा नहीं

यहीं से मामला उलझा। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि खंडवा की हालत ऐसी है कि यहां त्योहार भी बिना सुरक्षा के मनाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने मदरसों से नकली नोट बरामद होने को बेहद गंभीर बताया और कहा कि बटालियन लगाना बिलकुल सही मांग है।

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मंत्री विजय शाह भी इसी पक्ष में खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि खंडवा लंबे समय से गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से गुजर रहा है, यह आतंकियों की हिट लिस्ट में है। उन्होंने याद दिलाया कि यहां जेल ब्रेक, एनकाउंटर जैसी घटनाएं हो चुकी हैं और बटालियन के लिए 100 एकड़ जमीन पहले से आरक्षित है।

सरकार की स्थिति संभालने की कोशिश

अलग-अलग बयानों से पैदा हुई असहजता के बीच राज्यमंत्री पटेल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान को सरकार की आधिकारिक राय समझा जाए। स्पीकर ने भी कहा कि सरकार खंडवा की स्थिति को गंभीरता से ले रही है।

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क्यों माना जाता है खंडवा को संवेदनशील जिला

28 नवंबर 2009 को बकरीद के दिन हुए तिहरे हत्याकांड ने पूरे जिले को हिला दिया था, जिसमें एटीएस जवान सीताराम यादव, वकील संजय पाल और बैंक प्रबंधक रविशंकर पारे की हत्या सिमी आतंकियों ने की थी। इसके बाद शहर में सिमी मॉड्यूल की सक्रियता सामने आई। गणेश विसर्जन और दुर्गा विसर्जन के दौरान कई बार पथराव, लाठीचार्ज और कर्फ्यू जैसी स्थितियां बनीं।

खंडवा रेलवे जंक्शन होने के कारण यहां से आरोपी आसानी से देशभर में आवाजाही कर सकते हैं। उत्सवों के दौरान हमेशा अतिरिक्त फोर्स की जरूरत पड़ती है और जिला प्रशासन को इंदौर सहित अन्य स्थानों से RAF और पुलिस बुलवानी पड़ती है। राजनीतिक रूप से भी यह इलाका पूरी तरह भाजपा के कब्जे में है, चारों विधानसभा सीटें, सांसद और नगरीय निकाय के अध्यक्ष सभी भाजपा से हैं।

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