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एमपी HC अधिवक्ता संघ का बड़ा एक्शन: सीनियर एडवोकेट समेत 2 वकील 3 साल के लिए निष्कासित, लाइसेंस निरस्त करने MPSBC को भेजा पत्र

पेशेवर कदाचरण और अधिवक्ताओं के बीच जातिगत विद्वेष फैलाने के गंभीर आरोप पर संघ ने सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर और एडवोकेट विनायक शाह की सदस्यता तीन साल के निष्कासित कर दी है।

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sanjay warude
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MP High Court Advocates Association Action

MP High Court Bar Association Action: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता संघ (MPHCBA) ने बड़ा एक्शन लिया है। 

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पेशेवर कदाचरण और अधिवक्ताओं के बीच जातिगत विद्वेष फैलाने के गंभीर आरोप पर संघ ने सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर और एडवोकेट विनायक शाह की सदस्यता तीन साल के निष्कासित कर दी है। साथ ही, उनकी सनद (Practice License) निरस्त करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद (Madhya Pradesh State Bar Council) को पत्र लिखा गया है।

झूठे तथ्य पेश कर संघ की छवि धूमिल की

संघ द्वारा जारी आदेश के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने झूठे तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट में पत्र प्रस्तुत किया और मीडिया में संघ की छवि धूमिल की। उन्होंने दावा किया था कि ग्वालियर के वकील अनिल मिश्रा को संघ ने आमंत्रित किया था, जिसे संघ ने पूरी तरह निराधार बताया है।

पढ़ें लेटर...

MPHCBA

MP HCBA

अधिवक्ताओं, जजों पर जातिगत आरोप में दोषी

सीनियर अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर पर अधिवक्ताओं के बीच जातिगत वैमनश्यता पैदा करने और न्यायाधीशों पर जातिगत आधार पर आरोप लगाने का दोष पाया गया है। 16 जनवरी को जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर, 4 फरवरी को सामान्य सभा की बैठक में एकमत होकर उनके निष्कासन का प्रस्ताव पारित किया गया।

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वकील शाह पर भ्रामक, मनगढ़ंत पोस्ट का आरोप

एडवोकेट विनायक शाह को फेसबुक पर भ्रामक और मनगढ़ंत पोस्ट साझा करने का दोषी पाया गया है। आरोप है कि विनायक शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि संघ के पदाधिकारियों ने एक मनुवादी वकील को सम्मानित करने के लिए बुलाया था। 

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एचसी की स्वस्थ परंपरा दूषित करने वाला माना

संघ ने साफ किया कि संबंधित वकील (अनिल मिश्रा) अपने निजी केस के सिलसिले में कोर्ट आए थे और संघ का उनसे कोई लेना-देना नहीं था। उनके इस पोस्ट से हाईकोर्ट परिवार की स्वस्थ परंपराओं को दूषित करने वाला माना गया।

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तीन संघों की बैठक में लिया निष्कासन का निर्णय

यह निर्णय मध्यप्रदेश हाईकोर्ट अधिवक्ता संघ, जिला अधिवक्ता संघ और हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन की संयुक्त बैठक में लिया गया। संघ के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य को संघ की गरिमा और मर्यादा के विपरीत कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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