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MP High Court MSP: मध्यप्रदेश की कृषि उपज मंडियों में किसानों की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर बिकने के आरोपों को लेकर अब मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सवाल किया है कि जब इस संबंध में पहले ही स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं, तो मंडियों में MSP से नीचे खरीदी कैसे हो रही है?
मामले को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य शासन और मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड से जवाब तलब किया है।
अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति द्वारिकाधीश बंसल की एकलपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह याचिका अन्नदाता किसान संगठन समिति के अध्यक्ष मनोहर श्रीवास्तव की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ एडवोकेट स्वप्निल खरे ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि साल 2018 में हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि सरकार द्वारा घोषित MSP से कम कीमत पर किसानों की उपज की नीलामी शुरू नहीं की जा सकती।
MSP के बावजूद मंडियों में कम दाम
याचिका में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा रबी विपणन वर्ष 2024-25 के लिए घोषित MSP के बावजूद प्रदेश की कई मंडियों में किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
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रबी 2024-25: MSP बनाम मंडी भाव
| फसल | MSP (₹/क्विंटल) | मंडियों में औसत भाव (₹) | अंतर (₹) |
|---|---|---|---|
| गेहूं | 2275 | 2100 – 2300 | लगभग 175 कम |
| चना | 5440 | 4800 – 5200 | 240 से 640 कम |
| मूंग | 8558 | 6500 – 7500 | 1050 से 2050 कम |
किसानों के हक पर सवाल
कोर्ट ने इस स्थिति को पहले के आदेशों की अवहेलना मानते हुए गंभीरता दिखाई है। अब राज्य शासन और कृषि विपणन बोर्ड को यह स्पष्ट करना होगा कि जब MSP लागू है, तब किसानों की उपज कम कीमत पर क्यों खरीदी जा रही है। मामले की अगली सुनवाई में कोर्ट राज्य सरकार के जवाब पर विचार करेगा।
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