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इंदौर में गंदे पानी से 18 मौतें: भागीरथपुरा छावनी में तब्दील, हाईकोर्ट बोला- पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं.. ये बेहद गंभीर स्थिति, शहर की छवि को नुकसान

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने प्रदेशभर के वार्डों में प्रदर्शन किया। वहीं हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सख्त टिप्पणी की है।

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BP Shrivastava
Indore Contaminated Water Deaths update

Indore Contaminated Water Deaths update: इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मुद्दे को लेकर मंगलवार, 6 जनवरी को इंदौर सहित प्रदेशभर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सभी वार्डों में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल हुए।

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'इंदौर अब दूषित पानी के कारण देश में चर्चित'

इधर, मामले की सुनवाई मंगलवार (6 जनवरी) को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना से इंदौर शहर की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा है। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब दूषित पेयजल के कारण पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है।

 पूरे इंदौर के पानी की गुणवत्ता पर सवाल- कोर्ट

कोर्ट ने कहा, यदि पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं है, तो यह बेहद गंभीर स्थिति है। यह समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शहर के जल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। कोर्ट ने इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को सुनना जरूरी बताया है।

मुख्य सचिव को उपस्थित होने के निर्देश

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई में राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअली उपस्थित हों। मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को तय की गई है।

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गौरतलब है कि दूषित पानी पीने से अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। वर्तमान में 110 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। कुल 421 मरीज अब तक अस्पताल में भर्ती किए गए, जिनमें से 311 को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है। 15 मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में भर्ती हैं। वहीं, उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें से 6 मरीजों को अरबिंदो हॉस्पिटल रेफर किया गया है।

भागीरथपुरा में बुजुर्ग महिला की मौत

भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया है। 1 जनवरी को 70 साल से ज्यादा उम्र की महिला हरकू बाई कुंवर ने दम तोड़ दिया। परिजन का आरोप है कि दूषित पानी पीने के बाद बुजुर्ग की तबीयत अचानक बिगड़ी थी। बुजुर्ग की बेटी ने बताया कि 30 दिसंबर की रात मां को अचानक तेज उल्टी-दस्त शुरू हो गए थे। हालत बिगड़ती ही गई और 1 जनवरी को उनकी मौत हो गई। परिवार में तीसरे का कार्यक्रम होने की वजह से वे प्रशासन को जल्दी जानकारी नहीं दे सके थे।

याचिकाकर्ता ने कहा- सप्लाई हो रहा पानी दूषित

पिछली सुनवाई पर 31 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम इंदौर को निर्देश दिया था कि नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। इस पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी है कि प्रभावित क्षेत्र में अब भी जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह दूषित है, न कि स्वच्छ और पीने योग्य।

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पहले ही शिकायतें सुन लेते तो ये नौबत नहीं आती

अन्य याचिकाकर्ताओं में यह मुद्दा भी उठाया कि इस घटना से पहले ही स्थानीय निवासियों की ओर से कई शिकायतें की गई थीं, लेकिन प्रशासन ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर समय रहते इन शिकायतों पर संज्ञान लिया गया होता और उचित रोकथाम के कदम उठाए गए होते तो यह घटना ही नहीं होती।

3 साल पहले मेयर के प्रस्ताव पर नहीं मिला फंड 

Indore Contaminated Water Deaths

सीनियर काउंसिल ने यह भी कोर्ट को बताया कि 2022 में मेयर द्वारा पीने के पानी की आपूर्ति के लिए नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव पारित किया गया था, लेकिन फंड जारी न होने के कारण यह काम अब तक नहीं हो पाया।

प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पर नहीं लिया एक्शन

 पिटीसनर्स की ओर से यह भी दलील दी गई कि साल 2017-18 में इंदौर के अलग-अलग इलाकों से पानी के 60 सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 59 सैंपल पीने योग्य नहीं पाए गए। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की इस रिपोर्ट के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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पिटीशनर्स ने यह भी तर्क दिया कि इस मामले में संबंधित अफसर केवल नागरिक (सिविल) जिम्मेदारी के ही नहीं, बल्कि आपराधिक जिम्मेदारी के भी दोषी हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस पूरे मामले की जांच के लिए हाईलेवर कमेटी बनाने की मांग की है।

हाईकोर्ट ने कहा- सरकार एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करे

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में अपना जवाब दाखिल करें और एक नई स्टेटस रिपोर्ट पेश करें। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में स्वच्छ पेयजल का अधिकार भी शामिल है।

हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी मुद्दों को 7 कैटेगरी में बांटा है...

  • प्रभावित लोगों के लिए तत्काल और आपात निर्देश।

  • रोकथाम और सुधारात्मक उपाय।

  • जिम्मेदारी तय करना।

  • अनुशासनात्मक कार्रवाई।

  • मुआवजा।

  • स्थानीय निकायों को निर्देश।

  • जन-जागरूकता और पारदर्शिता।

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इन अफसरों पर हुई कार्रवाई

  • दिलीप यादव, निगम आयुक्त को हटाया।

जिम्मेदारी- गंदे पानी की शिकायतों को अनदेखा किया। पाइपलाइन की टेंडर प्रक्रिया पर नजर नहीं रखी।

  • रोहित सिसोनिया, अपर आयुक्त-सस्पेंड

जिम्मेदारी- अगस्त में टेंडर हुए थे, उन्हें रोक कर रखा। शिकायतों की अनदेखी की।

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  • संजीव श्रीवास्तव, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री-सस्पेंड

जिम्मेदारी- गंदे पानी की लोगों की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

  • शुभम श्रीवास्तव, उपयंत्री (जोन-4) -सस्पेंड

जिम्मेदारी- दूषित जल का निराकरण करना था, लेकिन नहीं किया।

  • योगेश जोशी, सहायक यंत्री-सस्पेंड

जिम्मेदारी - हेल्पलाइन पर आने वाली जल शिकायतों के अनुसार लीकेज की मरम्मत समय पर नहीं की।

  • शालिग्राम शितोले: जोनल अधिकारी- (जोन-4)-सस्पेंड

साफ-सफाई से लेकर लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध करान की जिम्मेदारी।

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