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इंदौर में दूषित पानी से 30वीं मौत: अब भी 3 मरीज ICU, एक वेंटिलेटर पर, हाईकोर्ट ने दिया यह आदेश

इंदौर में दूषित पानी से 30 दिन में 30वीं मौत हो गई। इस कांड में पहली मौत 29 दिसंबर को हुई थी। आज यानी बुधवार, 28 जनवरी को भागीरथपुरा में रहने वाले  62 साल की लक्ष्मी रजक को दो दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। जहां उनकी मौत हो गई।

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BP Shrivastava
Indore Contaminated Water Death (3)

Indore Contaminated Water Death: इंदौर में दूषित पानी से 30 दिन में 30वीं मौत हो गई। इस कांड में पहली मौत 29 दिसंबर को हुई थी। आज यानी बुधवार, 28 जनवरी को भागीरथपुरा में रहने वाले  62 साल की लक्ष्मी रजक को दो दिन पहले उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनकी मौत हो गई। इलाज के दौरान पता चला की उनकी किडनी में इनफेक्टेड है। इससे पहले मंगलवार को खूबचंद की भी मौत हो चुकी है।

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अब भी 3 आईसीयू में, एक वेंटिलेटर पर

जानकारी के अनुसार, अब भी भर्ती मरीजों की संख्या  6 है। इनमें से 3 आईसीयू में हैं। एक वेंटिलेटर पर है।

 इसी मामले को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में मंगलवार (27 फरवरी) को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट में केस को लेकर ढाई घंटे से ज्यादा समय तक सुनवाई चली।

शुरुआत में मुख्य सचिव अनुराग जैन 10 मिनट तक वर्चुअल उपस्थित हुए। इस दौरान 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें से 16 मौतें दूषित पानी से मानी गईं, जबकि चार को लेकर असमंजस की स्थिति बताई है। वहीं सरकार ने तीन लोगों की मौत दूषित पानी से नहीं मानी है।

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Indore Contaminated Water Death (4)
शासन-प्रशासन की लापरवाही को लेकर परिजनों ने बुधवार सुबह खूबचंद का शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया।

हाईकोर्ट ने दिए स्वतंत्र जांच के आदेश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतंत्र जांच के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा, स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। यह मामला गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है।

कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम इंदौर की प्रस्तुत रिपोर्ट पर सवाल उठाए और कहा, जमीनी स्तर पर शुद्ध पानी की सप्लाई, इलाज और जांच संबंधी निर्देशों का पूरा पालन नहीं हुआ है।

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मौतों की संख्या को लेकर विवाद

गंदे पाने हुई मौतों के आंकड़ों को लेकर भी विवाद सामने आया है। जहां सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतों को दूषित पानी से जोड़ा गया है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने मृतकों की संख्या करीब 30 बताई है।

हाईकोर्ट ने बनाया जांच आयोग

मामले की नजाकत समझते हुए हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग बनाया है। आयोग जल प्रदूषण के कारणों, वास्तविक मौतों की संख्या, बीमारियों की प्रकृति, चिकित्सा व्यवस्था की पर्याप्तता, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही और पीड़ितों को मुआवजे पर रिपोर्ट देगा।

5 मार्च को अगली सुनवाई 

कोर्ट ने दैनिक जल गुणवत्ता जांच और नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार और नगर निगम से चार हफ्ते में अंतरिम रिपोर्ट मांगी है।मामले में अब अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी।

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आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार

काईकोर्ट ने आयोग को सिविल कोर्ट के समान अधिकार दिए गए हैं। वह अधिकारियों और गवाहों को तलब कर सकेगा, दस्तावेज मंगा सकेगा, पानी का परीक्षण करा सकेगा और मौके पर पहुंचकर निरीक्षण कर सकेगा। राज्य सरकार आयोग को आवश्यक स्टाफ, कार्यालय और संसाधन उपलब्ध कराएगी।

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