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इंदौर में दूषित पानी से 33वीं मौत: महीनेभर से चल रहा था इलाज, पत्नी की भी हो चुकी डेथ, बेटा बोला- पहले कोई बीमारी नहीं थी

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी हादसे में गुरुवार, 5 फरवरी देर रात एक जान चली गई। इस तरह अब तक गंदे पानी से मरने वालों की संख्या 33 हो चुकी है। अलगूराम यादव (70) नामक इस बुजुर्ग को 9 जनवरी को हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।

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BP Shrivastava
Indore Contaminated water Death

Indore Contaminated water Death: इंदौरके भागीरथपुरा में दूषित पानी हादसे में गुरुवार, 5 फरवरी देर रात एक जान चली गई। इस तरह अब तक गंदे पानी से मरने वालों की संख्या 33 हो चुकी है। अलगूराम यादव (70) नामक इस बुजुर्ग को 9 जनवरी को अरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था। उन्हें सांस संबंधी तकलीफ भी थी। 

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पत्नी उर्मिला की भी गंदा पानी पीने से हुई मौत

जानकारी के अनुसार, इससे पहले अलगूराम यादव की पत्नी उर्मिला यादव की भी दूषित पानी से मौत हो चुकी है। उर्मिला को भी उल्टी-दस्त की वजह से अस्पताल में एडमिट कराया गया था, लेकिन उर्मिला यादव की जान नहीं बच सकी। उनकी मौत को एक महीना हो चुका है।

मां के बाद पिता को खोया

मृतक अगलूराम यादव के बेटे संजय यादव का कहना है कि पिता को पहले से किसी तरह की बीमारी नहीं थी। उल्टी-दस्त होने पर अस्पताल में एडमिट किया था, जहां उनकी जान चली गई। अभी हॉस्पिटल में एडमिट तीन मरीजों का इलाज चल रहा, हालांकि स्थित गंभीर है। हादसे में 450 से ज्यादा लोग  प्रभावित होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।

1 फरवरी को हुई थी 32वीं मौत

इससे पहले 1 फरवरी को 32वीं मौत हुई थी। अनिता कुशवाह (65) नामक महिला एक महीने से ज्यादा समय से अस्पताल में एडमिट थीं। अनिता का भी बॉम्बे हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था। वे करीब एक महीने से बीमार थीं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं। बेटे नीलेश ने बताया था कि मां को भी पहले से कोई बीमारी नहीं थी।

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HC ने स्वतंत्र जांच आयोग बनाने का दिया था आदेश

एमपी के सबसे बड़े हादसा केस (इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी मामले) में  27 जनवरी को हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था और शासन एवं नगर निगम की रिपोर्ट को ‘आई-वॉश’ करार दिया था। कोर्ट ने माना कि यह केस गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति से जुड़ा है।

हाईकोर्ट ने कहा कि स्वच्छ पेयजल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतंत्र जांच आयोग बनाने का आदेश दिया था।

सरकार ने 16 मौतें दूषित पानी से होना माना

भागीरथपुरा मामले में दायर जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में ढाई घंटे से ज्यादा समय तक सुनवाई चली। सरकार की ओर से कोर्ट में 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें 16 मौतें दूषित पानी से होनी बताई गई। वहीं 4 मौतों को लेकर असमंजस और 3 मौतें दूषित पानी से नहीं होना बताया गया।

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मौतों की संख्या पर विरोधाभास

हाईकोर्ट ने मौतों की संख्या को लेकर गंभीर असहमति दर्ज की। कोर्ट में पेश सरकारी रिपोर्ट में 16 मौतें जलजनित बीमारी से मानी गईं। जबकि याचिकाओं में करीब 30 मौतों का दावा किया गया। कोर्ट ने कहा था कि रिपोर्ट में मौतों के स्पष्ट कारण दर्ज नहीं हैं। पर्याप्त वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूतों का अभाव है।

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